फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   Supreme Court judgments are being translated into 16 languages: CJI

16 भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का किया जा रहा अनुवाद : सीजेआई

Sat, 20 Dec 2025 11:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Dec 2025 11:09 PM IST
विज्ञापन
इटावा। 16 भाषाओं में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अनुवाद किया जा रहा है। ताकि कोर्ट में आने वाले लोगों को यह आसानी हो सके। यह बात शनिवार को इस्लामियां इंटर कॉलेज में हुए इटावा हिंदी सेवा निधि के तैंतीसवें सारस्वत समारोह में आए मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कही।
विज्ञापन

हिंदी सेवा निधि के मंच से मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उप्र, बिहार के लोगों को हिंदी में रूपांतरित कॉपी मिलेगी, जो तमिलनाडू में है उसे तमिल, कर्नाटक के लोगों को कन्नड़ भाषा में फैसला आसानी से मिल जाएगा। कहा कि संविधान में उल्लेखित सभी स्थानीय और राज्य स्तर की भाषाओं में फैसले आ सकें, इसका प्रयास किया जा रहा है। सामान्य कामकाज, कोर्ट की कार्यवाही सभी चीजें आसान भाषा में मिल सकें इसका प्रयास जारी रहेगा। इसमें तकनीकी की मदद भी ली जाएगी। सभी को सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला कोर्ट तक सरल भाषा में फैसले मिल सकें, यह प्रयास किए जा रहे हैं।
विज्ञापन




आगे कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त जी ने हिंदी भाषा का जो आंदोलन शुरू किया वह सिर्फ इटावा तक सीमित नहीं रहेगा। इस आंदोलन को हिंदी सेवा निधि पूरे देश तक पहुंचाएगी। न्यायाधीश स्व. प्रेमशंकर गुप्ता लगभग 15 साल इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश के पद पर रहे थे। इस दौरान उन्होंने लगभग 4000 फैसले हिंदी में लिखे। कहा कि हिंदी के लिए सेवा और समर्पण नहीं हो सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि इटावा को गंग देव की नगरी प्राचीन काल से जाना जाता है। गंग अकबर के समय से बहुत अख्खड़ कवि माने जाते थे ओर देव रीति काल के बड़े कवि हैं। दो महान हस्तियों के नाम से गंग देव इटावा को जाना गया तो स्वभाविक है कि यहां कि मिट्टी, हवा में रचना, साहित्य बसा हुआ है। इटावा एक सांस्कृतिक राजधानी के रूप में उभरकर आता है। इस आंदोलन और संकल्प में आप सभी आगे बढ़ें।




अपना साहित्य से जुड़ाव बताते हुए कहा कि कानून में प्रैक्टिस के दौरान साहित्य से जुड़ाव कम हो जाता है। अदालती माहौल ऐसा है कि कोर्ट में काम बहुत ज्यादा होता है। अक्सर जो लोग कविता और साहित्य से जुड़ जाते हैं और जज हो जाते हैं तो कला और साहित्य से उनकी दूरी हो जाती है। मेरा पूरा प्रयास रहता है कि मैं इस तरह के आयोजनों से जुड़ा रहूं, लेकिन संभव नहीं हो पाता। कहा कि साहित्य, हिंदी और संस्कृत के लिए मेरी जो पारिवारिक जिम्मेदारी थी शायद मैं वह नहीं निभा पाया। कहा कि यहां आने का निमंत्रण मिला तो मुझे लगा कि यह उस जिम्मेदारी को निभाने का एक मौका मिला। उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि मेरे कॉलेज के समय के एक साहित्यक दोस्त थे। हम दोनों लिखी हुई कविताओं का आदान प्रदान करते थे, क्योंकि उन्हें भी लिखने का शौका था और मुझे भी। जब मैं प्रैक्टिस करने लगा तो उन्हीं दोस्त का एक पत्र आया उसमें कविता के अंदाज में लिखा गया था कि अब तुम्हारे हाथ को क्या हो गया कि तुमने लिखना बंद कर दिया। मैंने भी कविता के अंदाज में ही जवाब लिखा...पोंछ दी है अर्थ की सब तख्तियां, अब मदरसे जाऊंगा किस वास्ते...। कहा कि मेरे पिता और दादा जी ने जो लेखन में दिया उसके सहारे में मैं संस्थाओं से जुड़ा रहा और जुड़ा रहूंगा। कहा कि मेरे दादा जी ने एक संस्कृत विद्यालय शुरू किया था, मैं और मेरे परिवार के लोगों का प्रयास किया है कि उस संस्थान को हम बड़ी ऊंचाइयों तक ले जा सकें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed