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सीजी: मां काछनदेवी और मां रैला देवी की पूजा के साथ बस्तर दशहरा शुरू, 75 दिनों तक चलेगा ऐतिहासिक महापर्व

Sun, 11 Oct 2026 07:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जगदलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जगदलपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 11 Oct 2026 07:33 AM IST
सार

बस्तर में करीब सात सदियों पुरानी परंपरा के तहत काछन गादी की रस्म के साथ 75 दिवसीय दशहरा महापर्व शुरू हुआ। कन्या पीहू ने मां काछनदेवी का स्वरूप धारण किया। बस्तर राजपरिवार और श्रद्धालुओं ने देवी का आशीर्वाद लिया।

 

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Permission granted to celebrate the world-famous Bastar Dussehra festival; immense enthusiasm
बस्तर महाराजा कमल चंद्र भंजदेव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपनी अनूठी, प्राचीन और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए विश्वभर में विशेष पहचान रखने वाले बस्तर के ऐतिहासिक महापर्व बस्तर दशहरा के विभिन्न पूजा विधान हर्षोल्लास और गहरी आस्था के साथ शुरू हो गए हैं। करीब सात सदियों पुरानी इस गौरवशाली परंपरा का शुभारंभ परंपरागत पूजा विधान काछन गादी के साथ हुआ। इस दौरान पनका समाज की नाबालिग कुंवारी कन्या पीहू ने मां काछनदेवी का स्वरूप धारण किया।

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धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अनुष्ठान के दौरान कन्या के शरीर में स्वयं मां काछनदेवी का वास होता है। देवी स्वरूपा बालिका को जब बेल के नुकीले कांटों से तैयार किए गए झूले पर लिटाया गया, तो वहां मौजूद श्रद्धालु अपार श्रद्धा और उत्साह से भर उठे। इस कठिन अनुष्ठान के बाद देवी ने बस्तर राजपरिवार, अंचल की जनता और प्रशासन को आगामी कार्यक्रम निर्बाध और सकुशल संपन्न कराने तथा 75 दिनों तक चलने वाले महापर्व के आयोजन की अनुमति प्रदान की।

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अनुष्ठान के दौरान बस्तर राजपरिवार के सदस्य एवं माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने मां काछनदेवी के समक्ष शीश झुकाकर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने गोलबाजार पहुंचकर मिरगान समुदाय की इष्ट देवी मां रैला देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की और उनका भी आशीर्वाद प्राप्त किया। इन पारंपरिक रस्मों के संपन्न होते ही काछन गुड़ी और गोलबाजार का पूरा इलाका पारंपरिक वाद्ययंत्र मोहरी बाजा की ध्वनि से गूंज उठा।

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इस ऐतिहासिक और पावन क्षण का साक्षी बनने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, देश-विदेश से पहुंचे हजारों पर्यटकों और बस्तर अंचल के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम में सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप, समिति के उपाध्यक्ष बलराम मांझी, महापौर संजय पाण्डे, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, बस्तर रेंज के आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित मांझी-चालकी, नाइक-पाइक, मेंबर-मेंबरिन, पुजारी, गायता और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यहां की जीवंत आदिवासी संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक है। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी को समर्पित यह महापर्व क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और विभिन्न समुदायों की सामूहिक सहभागिता को दर्शाता है। काछन गादी की रस्म के साथ महापर्व की शुरुआत हो गई है। अब इसके तहत विभिन्न पारंपरिक अनुष्ठानों का सिलसिला आगे बढ़ेगा।

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