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कोचिंग सेंटरों में आग से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं
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झज्जर। जिले में करीब 50 बड़े कोचिंग सेंटर हैं जिनमें हजारों बच्चे हर रोज पढ़ने आते हैं। मगर इनमें आग लगने पर बचाव के कोई उपाय नहीं हैं। सोमवार को लखनऊ में हुए हादसे ने जिले के कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झज्जर शहर में धौड़ चौक, छिक्कारा चौक, बैंक रोड, आर्य नगर, पुराना बस स्टैंड के पीछे, पुराना बस स्टैंड रोड और मेडिकल रोड बाईपास के अलावा बहादुरगढ़, बेरी, बादली, साल्हावास और छुछकवास में कई कोचिंग सेंटर और अकादमियां संचालित हैं। इनमें से ज्यादातर कोचिंग सेंटर किराये की इमारतों में चल रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कई सेंटरों में नियमों की अनदेखी की गई है और बड़े हॉल को बांटकर छोटे कमरे बना दिए गए हैं। अधिकांश भवनों में बाहर निकलने के लिए केवल एक ही गेट है और आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं है। इससे किसी भी हादसे की स्थिति में गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
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हर रोज खुल रहे नए सेंटर
सबसे बड़ी समस्या यह है कि कहीं भी कोई भी बिल्डिंग किराये पर लेकर कोचिंग सेंटर शुरू कर देता है। सभी कोचिंग सेंटरों की जानकारी भी फायर ब्रिगेड के पास नहीं है। ऐसे में वहां नियम पूरे होने का सवाल ही नहीं उठता है।
छत से निकलने का भी रास्ता नहीं
कई कोचिंग सेंटर ऐसे हैं जिनमें पहली मंजिल पर भी कक्षाएं लगती हैं। मगर वहां से निकलने का आपातकालीन रास्ता कोई नहीं बनाया गया है। अगर वहां आगजनी की घटना होती है तो वहां पढ़ने वाले छात्रों को मुख्य रास्ते से ही बाहर निकलना होगा।
वर्जन
कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए टीम को भेजा जाएगा। जिस भी सेंटर में नियमों की अवहेलना पाई जाएगी उनको नोटिस जारी किए जाएंगे।- प्रमोद दुग्गल, फायर अफसर, झज्जर।
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झज्जर शहर में धौड़ चौक, छिक्कारा चौक, बैंक रोड, आर्य नगर, पुराना बस स्टैंड के पीछे, पुराना बस स्टैंड रोड और मेडिकल रोड बाईपास के अलावा बहादुरगढ़, बेरी, बादली, साल्हावास और छुछकवास में कई कोचिंग सेंटर और अकादमियां संचालित हैं। इनमें से ज्यादातर कोचिंग सेंटर किराये की इमारतों में चल रहे हैं।
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जानकारी के अनुसार, कई सेंटरों में नियमों की अनदेखी की गई है और बड़े हॉल को बांटकर छोटे कमरे बना दिए गए हैं। अधिकांश भवनों में बाहर निकलने के लिए केवल एक ही गेट है और आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं है। इससे किसी भी हादसे की स्थिति में गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
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हर रोज खुल रहे नए सेंटर
सबसे बड़ी समस्या यह है कि कहीं भी कोई भी बिल्डिंग किराये पर लेकर कोचिंग सेंटर शुरू कर देता है। सभी कोचिंग सेंटरों की जानकारी भी फायर ब्रिगेड के पास नहीं है। ऐसे में वहां नियम पूरे होने का सवाल ही नहीं उठता है।
छत से निकलने का भी रास्ता नहीं
कई कोचिंग सेंटर ऐसे हैं जिनमें पहली मंजिल पर भी कक्षाएं लगती हैं। मगर वहां से निकलने का आपातकालीन रास्ता कोई नहीं बनाया गया है। अगर वहां आगजनी की घटना होती है तो वहां पढ़ने वाले छात्रों को मुख्य रास्ते से ही बाहर निकलना होगा।
वर्जन
कोचिंग सेंटरों की जांच के लिए टीम को भेजा जाएगा। जिस भी सेंटर में नियमों की अवहेलना पाई जाएगी उनको नोटिस जारी किए जाएंगे।- प्रमोद दुग्गल, फायर अफसर, झज्जर।