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मजदूर का बेटा बना वायुसेना में लेफ्टिनेंट, भावुक पिता बोले- मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा वर्दी पहनेगा
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17jjrp16- गांव माजरा डी-दूबलधन निवासी अजय के लेफ्टिनेंट बनने पर उसका सम्मान करते ग्रामीण। स्रोत
बेरी। गांव माजरा डी-दूबलधन में मजदूर के बेटे का वायुसेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयन हुआ है। अजय के पिता महाबीर ने भावुक होते हुए कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा बेटा एक दिन वर्दी पहनेगा। उसकी मेहनत ने आज हमें समाज में सिर ऊंचा करके जीने का अवसर दिया है।
अजय वायुसेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयन होने पर ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। मंगलवार को लेफ्टिनेंट अजय का गांव में पहुंचने पर ग्राम पंचायत व ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया।
ग्रामीणों ने गांव में पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि अजय ने यह साबित कर दिया कि यदि लगन और हौंसला हो तो कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है। एक साधारण मजदूर परिवार से ताल्लुक रखने वाले अजय की यह सफलता सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे गांव, समाज और देश के लिए प्ररेणा है।
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शुरू से ही अनुशासित छात्र रहा अजय
अजय का जन्म माजरा डी-दूबलधन गांव में हुआ। उनके पिता महाबीर मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित साधनों के बीच भी उन्होंने अपने बेटे की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। अजय ने गांव के बीएमडी स्कूल से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई की। अजय पढ़ाई में शुरू से होशियार और अनुशासित छात्र रहा।
सेना में जाने का सपना हुआ साकार
अजय का सपना था कि वे सेना में जाएं और देश की सेवा करें। अजय ने बारहवीं पास करने के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी एनडीए की तैयारी शुरू की। कई कठिनाइयों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने एयरफोर्स की परीक्षा पास की। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब वह लेफ्टिनेंट के रूप में वायुसेना में नियुक्त हो गए हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अजय की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है, जो ग्रामीण परिवेश से हैं, लेकिन बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित किया कि कड़ी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।
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अजय वायुसेना में लेफ्टिनेंट के पद पर चयन होने पर ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। मंगलवार को लेफ्टिनेंट अजय का गांव में पहुंचने पर ग्राम पंचायत व ग्रामीणों ने फूल-मालाओं के साथ स्वागत किया।
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ग्रामीणों ने गांव में पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि अजय ने यह साबित कर दिया कि यदि लगन और हौंसला हो तो कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है। एक साधारण मजदूर परिवार से ताल्लुक रखने वाले अजय की यह सफलता सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे गांव, समाज और देश के लिए प्ररेणा है।
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शुरू से ही अनुशासित छात्र रहा अजय
अजय का जन्म माजरा डी-दूबलधन गांव में हुआ। उनके पिता महाबीर मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित साधनों के बीच भी उन्होंने अपने बेटे की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। अजय ने गांव के बीएमडी स्कूल से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई की। अजय पढ़ाई में शुरू से होशियार और अनुशासित छात्र रहा।
सेना में जाने का सपना हुआ साकार
अजय का सपना था कि वे सेना में जाएं और देश की सेवा करें। अजय ने बारहवीं पास करने के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी एनडीए की तैयारी शुरू की। कई कठिनाइयों और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने एयरफोर्स की परीक्षा पास की। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अब वह लेफ्टिनेंट के रूप में वायुसेना में नियुक्त हो गए हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अजय की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है, जो ग्रामीण परिवेश से हैं, लेकिन बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने साबित किया कि कड़ी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।