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झारखंड के पूर्व चीफ जस्टिस भगवती प्रसाद का गुजरात में 68 साल की उम्र में निधन

Mon, 20 Nov 2017 10:06 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Mon, 20 Nov 2017 10:06 PM IST
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Justice Bhagwati Prasad former chief justice of the Jharkhand High Court passes away
जस्टिस भगवती प्रसाद - फोटो : jharkhandhighcourt.nic.in
झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भगवती प्रसाद का 68 साल की उम्र में निधन हो गया। गुजरात के अहमदाबाद में रविवार को एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रसाद के पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक वे निम्न रक्तचाप संबंधी समस्याओं के चलते शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। भगवति प्रसाद गुजरात राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष थे और राजस्थान और गुजरात हाईकोर्ट में भी जज रहे थे।
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भगवती प्रसाद का जन्म 13 मई 1949 में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के भद्रा में हुआ था। प्रसाद ने वकालत की शुरुआत राजस्थान हाईकोर्ट में साल 1972 में की। जोधपुर विश्वविद्यालय से एलएलएम की डिग्री लेने के बाद उन्होंने जोधपुर विश्वविद्यालय में लॉ के शिक्षक भी रहे। इस दौरान उन्होंने ‘फंडामेंटलिज्म, लॉ एंड नेशनल इंटीग्रेशन : ए स्टडी विद स्पेशल रेफरेंस टू इंडिया’ पर थीसिस भी लिखी। अप्रैल 1996 में वह राजस्थान हाईकोर्ट के जज बने। फरवरी 2008 में उनका तबादला गुजरात हाईकोर्ट में हो गया। इसके बाद अगस्त 2010 में वे झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। प्रसाद को गुजरात राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बनाया गया। जस्टिस प्रसाद राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के प्रमुख और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे। 
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जस्टिस भगवती प्रसाद 22 अगस्त 2010 को झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने और 12 मई 2011 को रिटायर हुए। जस्टिस प्रसाद ने झारखंड में कई जनहित याचिकाओं पर बेहद कड़े निर्णय दिए। आम लोगों की समस्या दूर करने के लिए कई बार उन्होंने प्रदेश की सरकार और सरकारी अधिकारियों को फटकार लगाई।  रांची से अतिक्रमण हटाने, सरकारी जमीन से अवैध निर्माण हटाने  संबंधी कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए। जस्टिस प्रसाद के ही आदेश से रांची पॉलिटेक्निक की जमीन से इस्लामनगर और नागा बाबा खटाल से अतिक्रमण हटाया गया। इतना ही नहीं कांटाटोली बस स्टैंड को सुव्यवस्थित करने में भी उनका फैसला बहुत अहम था। हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच के लिए कई बार जस्टिस भगवती प्रसाद खुद निकल पड़ते थे। यदि उन्हें लगता था कि आदेशों के पालन में कोताही बरती गई है, तो इसके लिए वे सरकार और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते थे। 
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जस्टिस प्रसाद के निधन पर झारखंड हाईकोर्ट के जजों के साथ ही वकीलों ने भी शोक व्यक्त किया। गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली और मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने भी जस्टिस प्रसाद के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
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