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मिट्टी से बनीं प्रतिमाओं को अधिक पसंद किया जा रहा
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-फोटो 96 : गणेश जी की मूर्ति। स्रोत समिति
बहादुरगढ़। शहर में गणेश महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस बार गणेश प्रतिमाओं को लेकर लोगों की पसंद में बदलाव आया है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता के कारण मिट्टी से बनीं प्रतिमाओं को अधिक पसंद किया जा रहा है।
मूर्ति विक्रेताओं के पास मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है। बहादुरगढ़ में गणेश महोत्सव की शुरुआत करीब 22 साल पहले हुई थी। महाराष्ट्र के नेलकंरजी गांव से आए रविकांत भोसले ने गणपति चौक पर इसकी शुरुआत की थी। उस समय यह महोत्सव कुछ ही स्थानों पर आयोजित होता था। अब इसका दायरा बढ़ गया है। इस वर्ष शहर में 50 से अधिक छोटे-बड़े पंडाल लगाए जा रहे हैं। मेन बाजार सहित कई अन्य स्थानों पर भी महोत्सव आयोजित हो रहा है।
शहर के कई हिस्सों में गणपति के पंडाल सज रहे हैं। इनमें ओमेक्स, एचएल सिटी, सेक्टर-दो मंदिर, सेक्टर-6, किला मोहल्ला, दुर्गा मंदिर, जटवाड़ा मोहल्ला, तीन शक्ति मंदिर और बॉम्बे वाली गली शामिल हैं। लोग बड़ी संख्या में अपने घरों में भी गणपति स्थापित कर रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, मिट्टी की प्रतिमाएं पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प हैं। विसर्जन के बाद मिट्टी पानी में आसानी से घुल जाती है, इसलिए श्रद्धालु अब प्लास्टर ऑफ पेरिस की बजाय मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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मूर्ति विक्रेताओं के पास मिट्टी की प्रतिमाओं की मांग बढ़ी है। बहादुरगढ़ में गणेश महोत्सव की शुरुआत करीब 22 साल पहले हुई थी। महाराष्ट्र के नेलकंरजी गांव से आए रविकांत भोसले ने गणपति चौक पर इसकी शुरुआत की थी। उस समय यह महोत्सव कुछ ही स्थानों पर आयोजित होता था। अब इसका दायरा बढ़ गया है। इस वर्ष शहर में 50 से अधिक छोटे-बड़े पंडाल लगाए जा रहे हैं। मेन बाजार सहित कई अन्य स्थानों पर भी महोत्सव आयोजित हो रहा है।
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शहर के कई हिस्सों में गणपति के पंडाल सज रहे हैं। इनमें ओमेक्स, एचएल सिटी, सेक्टर-दो मंदिर, सेक्टर-6, किला मोहल्ला, दुर्गा मंदिर, जटवाड़ा मोहल्ला, तीन शक्ति मंदिर और बॉम्बे वाली गली शामिल हैं। लोग बड़ी संख्या में अपने घरों में भी गणपति स्थापित कर रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, मिट्टी की प्रतिमाएं पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प हैं। विसर्जन के बाद मिट्टी पानी में आसानी से घुल जाती है, इसलिए श्रद्धालु अब प्लास्टर ऑफ पेरिस की बजाय मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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