{"_id":"6a15d71f5600470c6d038481","slug":"gypsum-has-not-arrived-for-the-last-two-and-a-half-years-farmers-are-getting-worried-jhajjar-news-c-195-1-nnl1001-135499-2026-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिछले ढाई वर्ष से नहीं आया जिप्सम, किसान हो रहे परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिछले ढाई वर्ष से नहीं आया जिप्सम, किसान हो रहे परेशान
विज्ञापन
झज्जर। पिछले ढाई वर्षाें से शहर के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पास स्थित सरकारी दुकान पर किसानों की मांग के बाद भी जिप्सम नहीं आ रहा है। इसके अलावा यूरिया और डीएपी की भी दुकान पर कमी है, जिस कारण किसान खाली हाथ वापस जा रहे हैं।
खरीफ फसल के बुआई का सीजन आ चुका है। इसको लेकर किसान भी खाद की दुकानों पर यूरिया और डीएपी की मांग करने के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा कुछ किसान पिछले काफी लंबे समय से जिप्सम की मांग कर रहे हैं, लेकिन किसानों को जिप्सम नहीं आने के चलते खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।
धान की बुआई से पहले जिप्सम अधिक लाभदायक होती है। इसके चलते किसानों की तरफ से जिप्सम की मांग की जा रही है। इसके अलावा 12 मई को 500 बैग डीएपी के वितरित किए थे, लेकिन इसके बाद से डीएपी नहीं पहुंचा है। धान व अन्य फसल की बुआई से पहले और बुआई के समय डीएपी की अधिक मांग रहती है। वहीं, डीएपी के साथ-साथ किसान यूरिया की भी मांग कर रहे है। प्रतिदिन डीएपी, यूरिया व जिप्सम लेने के लिए पहुंच रहे किसानों को मायूस होकर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
विज्ञापन
वर्जन
पिछले ढाई वर्षों से झज्जर में जिप्सम नहीं आया है। किसानों की तरफ से लगातार जिप्सम की मांग की जा रही है। धान की बुआई से पहले जिप्सम अधिक लाभदायक होता है। इसके अलावा यूरिया और डीएपी की भी कमी है। किसान लगातार चक्कर लगा रहे हैं।
बालकिशन शर्मा, उप प्रबंधक, एचएलआरडीसी, झज्जर
विज्ञापन
खरीफ फसल के बुआई का सीजन आ चुका है। इसको लेकर किसान भी खाद की दुकानों पर यूरिया और डीएपी की मांग करने के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा कुछ किसान पिछले काफी लंबे समय से जिप्सम की मांग कर रहे हैं, लेकिन किसानों को जिप्सम नहीं आने के चलते खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।
विज्ञापन
धान की बुआई से पहले जिप्सम अधिक लाभदायक होती है। इसके चलते किसानों की तरफ से जिप्सम की मांग की जा रही है। इसके अलावा 12 मई को 500 बैग डीएपी के वितरित किए थे, लेकिन इसके बाद से डीएपी नहीं पहुंचा है। धान व अन्य फसल की बुआई से पहले और बुआई के समय डीएपी की अधिक मांग रहती है। वहीं, डीएपी के साथ-साथ किसान यूरिया की भी मांग कर रहे है। प्रतिदिन डीएपी, यूरिया व जिप्सम लेने के लिए पहुंच रहे किसानों को मायूस होकर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
विज्ञापन
वर्जन
पिछले ढाई वर्षों से झज्जर में जिप्सम नहीं आया है। किसानों की तरफ से लगातार जिप्सम की मांग की जा रही है। धान की बुआई से पहले जिप्सम अधिक लाभदायक होता है। इसके अलावा यूरिया और डीएपी की भी कमी है। किसान लगातार चक्कर लगा रहे हैं।
बालकिशन शर्मा, उप प्रबंधक, एचएलआरडीसी, झज्जर