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डॉल्फिन को भा रहा यूपी का यह जलक्षेत्र, पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है इस दुर्लभ प्रजाति का जिक्र

Wed, 10 Oct 2018 02:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 10 Oct 2018 02:01 PM IST
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Dolphin rare species is loving to live in this area of ganga in UP
डॉल्फिन

गंगा में पाई जाने वाली दुर्लभ जीव डॉल्फिन को बिजनौर से ब्रजघाट तक का क्षेत्र भा रहा है। पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में डॉल्फिन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। तीन साल में इनकी संख्या 11 से बढ़कर अब 17 पहुंच गई है। आज से बिजनौर बैराज से शुरू हो रही डॉल्फिन की गणना में पांच दिन बाद पता चलेगा कि इस बार इनकी संख्या बढ़ी है या कम हुई है। 

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गांगेय डॉल्फिन विश्व में पाई जाने वाली दुर्लभ डॉल्फिन की प्रजातियों में से एक प्रजाति है। डॉल्फिन का वर्णन पौराणिक ग्रंथों एवं ऐतिहासिक पुस्तकों में भी मिलता है। स्तनधारी जीव होने के कारण यह नदी की सतह पर आकर सांस लेतीं है। श्वांस की ध्वनि के कारण ही इसको आमतौर पर सूंस या सुसु के नाम से भी जाना जाता है। किसी समय बड़ी संख्या में पाई जाने वाली गांगेय डॉल्फिन की संख्या अब घटकर केवल तीन हजार रह गई है। इसका मुख्य कारण प्रतिदिन नदियों का घटता जलस्तर और प्रदूषण है। 
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गंगा नदी अभ्यारण्य घोषित 
वर्तमान में गांगेय डॉल्फिन भारत, नेपाल एवं बांग्लादेश में गंगा, ब्रह्मपुत्र, मेघना एवं करनाफुल्ली नदी में पाई जाती है। गांगेय डॉल्फिन का 80 प्रतिशत क्षेत्र भारत की सीमा में आता है। भारत में गांगेय डॉल्फिन को भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत कानूनी संरक्षण के साथ-साथ राष्ट्रीय जलीय जीव का दर्जा भी प्राप्त है।
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डॉल्फिन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए 1991 में भारत सरकार द्वारा बिहार में सुल्तानगंज से कहलगांव के बीच 50 किमी लंबाई में फैली गंगा नदी को विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य घोषित किया गया था। यूपी में डॉल्फिन के आवास संरक्षण की पहल करते हुए विश्व प्रकृति निधि भारत एवं वन विभाग के संयुक्त प्रयास से गढ़मुक्तेश्वर से नरोरा बैराज के बीच की लगभग 100 किमी गंगा नदी को रामसर साइट 2005 में घोषित कराया गया था। 

मेरी गंगा-मेरी सूंस अभियान
मेरी गंगा-मेरी सूंस अभियान 2018 का उद्देश्य बिजनौर बैराज से नरोरा के बीच डॉल्फिन का वितरण और उसके रहवास की जानकारी एकत्र करना है। इस साल ये डॉल्फिन गणना बिजनौर बैराज से 10 अक्तूबर से शुरू की जा रही है। जोकि 15 अक्तूबर को नरोरा बैराज पर समाप्त होगी। 
-अदिति शर्मा डीएफओ 

 वर्षवार डॉल्फिन गणना
     2015 - बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर -11, गढ़मुक्तेश्वर से नरोरा तक - 11 
     2016-  बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर -13, गढ़मुक्तेश्वर से नरोरा तक - 17 
     2017-  बिजनौर से गढ़मुक्तेश्वर -17, गढ़मुक्तेश्वर से नरोरा तक - 15


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