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MP High Court: नियमों की गलत व्याख्या करते हुए कर दिया अनुकंपा नियुक्ति से वंचित, हाईकोर्ट से मिली राहत

Sun, 02 Jul 2023 08:46 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 02 Jul 2023 08:46 AM IST
सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में पुनर्विचार करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया था। नए नियमों का हवाला देते हुए पिता की उम्र 55 साल से अधिक होने के कारण उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उम्र सीमा के आधार पर आवेदन निरस्त किए जाने को अवैधानिक माना। 

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Deprived of compassionate appointment due to misinterpretation of rules, got relief from MP High Court
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बैंक द्वारा नियमों की गलत व्याख्या करते हुए अनुकंपा नियुक्ति से वंचित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस जीएस अहलुवालिया ने पाया कि बैंक ने मृतक की आयु सीमा के आधार पर याचिकाकर्ता का आवेदन निरस्त किया है। नियम में आयु सीमा को उल्लेख नहीं किया गया है। एकलपीठ ने उम्र सीमा के आधार पर आवेदन निरस्त किए जाने को अवैधानिक मानते हुए पुन: विचार के आदेश जारी किए हैं।
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बता दें कि याचिकाकर्ता प्रहलाद सोधिंया की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसके पिता मध्यांचल ग्रामीण बैंक में पदस्थ थे। उनकी मृत्यु के बाद उसने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया था। नए नियमों का हवाला देते हुए पिता की उम्र 55 साल से अधिक होने के कारण उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि नए नियम के खंड 1 ए के अनुसार कार्यरत कर्मचारी की मौत या 55 साल से पहले मेडिकल आधार पर सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारियों के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति देने का उल्लेख किया गया है। नियम के खंड 1 बी में आयु सीमा का उल्लेख किया गया है। दोनों नियम अलग-अलग हैं, इसलिए उन्हें एक साथ जोड़कर निर्णय नहीं लिया जा सकता है।
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एकलपीठ ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा कि पहले नियम में उम्र निर्धारण का उल्लेख नहीं है। उम्र के आधार पर आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता है। एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के आवेदन पर पुन विचार के निर्देश जारी किए हैं।  
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