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बेरी के माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में राधा अष्टमी पर उमड़ी भीड़
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19jjrp04- बेरी के माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बेरी। राधा अष्टमी के अवसर पर माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तगण नवरात्र के अतिरिक्त हर माह की अष्टमी पर भी पूजा-अर्चना के लिए यहां आते हैं। सुबह करीब 5 बजे मां को अंदर वाले दरबार से बाहर लाया गया।
पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ स्नान करवाया और मंगला आरती की। इसके बाद भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। मंदिर के पुजारी कुलदीप वशिष्ठ ने बताया कि हर माह की अष्टमी पर भी भक्तों की भीड़ उमड़ती है। महिलाओं ने पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर मन्नतें मांगीं। बेरी शहर चौकी प्रभारी पीएसआई सागर ने बताया कि हरियाणा और दिल्ली समेत आसपास के श्रद्धालु दर्शन को पहुंचते हैं। मंदिर में भक्तों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन है। विद्वानों के अनुसार, पांडु पुत्र भीम मां की मूर्ति को पाकिस्तान के हिंगजाल पर्वत से लाए थे। मां ने भीम से कहा था कि जहां उतारोगे, वहीं स्थापित हो जाऊंगी। भीम ने बेरी कस्बे में लघु शंका के लिए मां को कंधे से उतारा, जिसके बाद वह वहीं स्थापित हो गईं। महाभारत युद्ध के बाद यहां मंदिर की स्थापना की गई।
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बेरी। राधा अष्टमी के अवसर पर माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तगण नवरात्र के अतिरिक्त हर माह की अष्टमी पर भी पूजा-अर्चना के लिए यहां आते हैं। सुबह करीब 5 बजे मां को अंदर वाले दरबार से बाहर लाया गया।
पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ स्नान करवाया और मंगला आरती की। इसके बाद भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए। मंदिर के पुजारी कुलदीप वशिष्ठ ने बताया कि हर माह की अष्टमी पर भी भक्तों की भीड़ उमड़ती है। महिलाओं ने पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर मन्नतें मांगीं। बेरी शहर चौकी प्रभारी पीएसआई सागर ने बताया कि हरियाणा और दिल्ली समेत आसपास के श्रद्धालु दर्शन को पहुंचते हैं। मंदिर में भक्तों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
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मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन है। विद्वानों के अनुसार, पांडु पुत्र भीम मां की मूर्ति को पाकिस्तान के हिंगजाल पर्वत से लाए थे। मां ने भीम से कहा था कि जहां उतारोगे, वहीं स्थापित हो जाऊंगी। भीम ने बेरी कस्बे में लघु शंका के लिए मां को कंधे से उतारा, जिसके बाद वह वहीं स्थापित हो गईं। महाभारत युद्ध के बाद यहां मंदिर की स्थापना की गई।
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