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बदमाशों से पुलिस को साल भर मिलीं चुनौतियां
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Tue, 26 Dec 2017 02:27 AM IST
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crime in 2017
- फोटो : demo
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अपराध और कानून व्यवस्था के मोर्चे पर साल 2017 पुलिस के लिए चुनौतियों से भरा रहा। एक के बाद एक ताबड़तोड़ ढंग से हुई आपराधिक वारदातों ने पुलिस को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया। पुलिस के लिए सुखद केवल इतना रहा कि ज्यादातर बड़ी घटनाओं का खुलासा करने में वह कामयाब रही। चैन स्नैचिंग, चोरी जैसी घटनाएं साल भर जारी रहीं। इनमें से कम ही खुल पाईं, ज्यादातर में पुलिस हवा में ही हाथ-पैर मारती रही। महिला सुरक्षा और यातायात नियंत्रण के मामले में पुलिस अपनी कोई छाप नहीं छोड़ पाई।
1- निशाने पर रही ‘आधी आबादी’
महिला सुरक्षा के मामले में यह साल खासा निराशाजनक रहा। महिलाएं न घर में महफूज रहीं और न बाहर। हर जगह उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडराता रहा। साल के शुरुआती दौर में 23 मार्च को प्रेमनगर थाना इलाके में महिला रेल कर्मचारी ममता की सरे राह चाकू मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 05 जुलाई को जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. राजेंद्र सिंह की मां लाड़कुंवर की घर में घुसे बदमाशों ने निर्ममता से हत्या कर दी थी। जबकि, 04 अक्तूबर को मेवातीपुरा में सिरफिरे युवक ने युवती सुनंदा (21) की उसके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इन घटनाओं के अलावा भी महिलाएं साल भर बदमाशों के निशाने पर रहीं। खासतौर पर चैन स्नैचिंग की घटनाओं से महिलाएं भयभीत रहीं। यहां तक कि पूर्व विधायक कृष्णपाल राजपूत की पत्नी की भी बाइक सवार बदमाशों ने दिनदहाड़े मिशन कंपाउंड से चैन लूट ली थी।
2- व्यापारियों पर भारी बीता साल
12 जुलाई की रात थाना कोतवाली इलाके से सराफा कारोबारी राजू कमरया और राहुल अग्रवाल का अपहरण कर लिया गया था। एसटीएफ और पुलिस ने घटना के पंद्रह दिन बाद कारोबारियों को आगरा में अपहरणकर्ताओं से मुक्त कराया था। यह घटना प्रदेश भर में सुर्खियों में रही थीं। बाद में पुलिस आरोपियों को भी जेल भेजने में कामयाब रही। हाल ही में अभी 19 दिसंबर को सराफा कारोबारी पवन कुमार अग्रवाल के घर डकैती पड़ी। घर के पुराने नौकर के साथ आए चार बदमाशों ने घटना को अंजाम दिया। सभी बदमाशों की शिनाख्त हो गई है, परंतु पुलिस अब तक उन्हें पकड़ नहीं पाई है। वहीं, लोहा मंडी क्षेत्र में लगभग एक दर्जन व्यापारियों के गोदामों को बदमाशों ने निशाना बनाया। कई अन्य दुकानों में भी चोरी की घटनाएं हुईं, लेकिन इनमें से ज्यादातर घटनाएं खुल नहीं पाईं हैं।
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3- सड़कों पर रौंदे गए यातायात नियम
यातायात नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस साल भर कोशिश करती रही, लेकिन इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। अब भी इक्का-दुक्का दोपहिया चालक ही हेलमेट पहने नजर आते हैं। चौपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने वालों की संख्या इससे भी कम है। साल भर सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी रहा। इसके अलावा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की सुधार की दिशा में भी पुलिस कोई कारगर कदम नहीं उठा पाई। बाजारों में जाम के हालात पहले जैसे ही बने रहे।
4- पुलिस पर भारी रहे वाहन चोर
वाहन चोर साल भर अपना हुनर दिखाते रहे। खासतौर पर नवाबाद थाना इलाके में चोरों ने जमकर कहर बरपाया। दोपहिया, चौपहिया सभी गाड़ियां चोरों के निशाने पर रहीं। बैंक, होटल, सार्वजनिक स्थानों के अलावा घरों से भी गाड़ियां चोरी हुईं। चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पीड़ितों को चप्पलें रगड़नी पड़ीं। हालांकि, बीच-बीच में पुलिस ने वाहन चोरों को दबोचा भी और गाड़ियां भी बरामद कीं, परंतु चोरी नहीं रुक पाई।
5- जुआ-सट्टा बंद कराने में कामयाबी
जुटा - सट्टा पर लगाम कसने के मामले में इस साल पुलिस कामयाब रही। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस ने एक्शन मोड में आते हुए तेजी से इस दिशा में कार्रवाई शुरू की। इसका खासा असर भी देखने को मिला। ज्यादातर जुए के अड्डे बंद हो चुके हैं, सुनियोजित ढंग से सट्टा भी नहीं खिलाया जा रहा है। अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश के लिए पुलिस सक्रिय तो बहुत रही, परंतु इसे रोक नहीं पाई।
6- एंटी रोमियो स्क्वाएड ने कराई किरकिरी
महिलाओं के साथ होने वाली छेड़खानी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने एंटी रोमियो स्क्वाएड बनाया था। लेकिन, स्क्वाएड की पहली ही कार्रवाई से पुलिस की खूब किरकिरी हुई। किले के भीतर स्क्वाएड ने छेड़खानी के नाम पर कई ऐसे युवक-युवतियों को निशाने पर लिया, जो मित्र भाव से वहां बैठे हुए थे। सरेआम लड़कों से उठक बैठक लगवाई गई। यह मामला प्रदेश भर में सुर्खियों में रहा। इसके बाद से एंटी रोमियो स्कवाएड ठंडे बस्ते में चला गया।
7- साइबर क्राइम बढ़ा
इस साल साइबर क्राइम का ग्राफ खूब बढ़ा। किसी के खाते से पैसे निकाल लिए गए, तो किसी को एटीएम के जरिये लूटा गया। शिक्षित वर्ग के लोग ज्यादातर साइबर क्राइम का शिकार बने। ज्यादातर मामलों में लोगों ने रकम तो गंवाई ही, साथ ही एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पाई।
1- निशाने पर रही ‘आधी आबादी’
महिला सुरक्षा के मामले में यह साल खासा निराशाजनक रहा। महिलाएं न घर में महफूज रहीं और न बाहर। हर जगह उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडराता रहा। साल के शुरुआती दौर में 23 मार्च को प्रेमनगर थाना इलाके में महिला रेल कर्मचारी ममता की सरे राह चाकू मारकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 05 जुलाई को जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. राजेंद्र सिंह की मां लाड़कुंवर की घर में घुसे बदमाशों ने निर्ममता से हत्या कर दी थी। जबकि, 04 अक्तूबर को मेवातीपुरा में सिरफिरे युवक ने युवती सुनंदा (21) की उसके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी। इन घटनाओं के अलावा भी महिलाएं साल भर बदमाशों के निशाने पर रहीं। खासतौर पर चैन स्नैचिंग की घटनाओं से महिलाएं भयभीत रहीं। यहां तक कि पूर्व विधायक कृष्णपाल राजपूत की पत्नी की भी बाइक सवार बदमाशों ने दिनदहाड़े मिशन कंपाउंड से चैन लूट ली थी।
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2- व्यापारियों पर भारी बीता साल
12 जुलाई की रात थाना कोतवाली इलाके से सराफा कारोबारी राजू कमरया और राहुल अग्रवाल का अपहरण कर लिया गया था। एसटीएफ और पुलिस ने घटना के पंद्रह दिन बाद कारोबारियों को आगरा में अपहरणकर्ताओं से मुक्त कराया था। यह घटना प्रदेश भर में सुर्खियों में रही थीं। बाद में पुलिस आरोपियों को भी जेल भेजने में कामयाब रही। हाल ही में अभी 19 दिसंबर को सराफा कारोबारी पवन कुमार अग्रवाल के घर डकैती पड़ी। घर के पुराने नौकर के साथ आए चार बदमाशों ने घटना को अंजाम दिया। सभी बदमाशों की शिनाख्त हो गई है, परंतु पुलिस अब तक उन्हें पकड़ नहीं पाई है। वहीं, लोहा मंडी क्षेत्र में लगभग एक दर्जन व्यापारियों के गोदामों को बदमाशों ने निशाना बनाया। कई अन्य दुकानों में भी चोरी की घटनाएं हुईं, लेकिन इनमें से ज्यादातर घटनाएं खुल नहीं पाईं हैं।
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3- सड़कों पर रौंदे गए यातायात नियम
यातायात नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस साल भर कोशिश करती रही, लेकिन इसका ज्यादा असर देखने को नहीं मिला। अब भी इक्का-दुक्का दोपहिया चालक ही हेलमेट पहने नजर आते हैं। चौपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने वालों की संख्या इससे भी कम है। साल भर सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी रहा। इसके अलावा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की सुधार की दिशा में भी पुलिस कोई कारगर कदम नहीं उठा पाई। बाजारों में जाम के हालात पहले जैसे ही बने रहे।
4- पुलिस पर भारी रहे वाहन चोर
वाहन चोर साल भर अपना हुनर दिखाते रहे। खासतौर पर नवाबाद थाना इलाके में चोरों ने जमकर कहर बरपाया। दोपहिया, चौपहिया सभी गाड़ियां चोरों के निशाने पर रहीं। बैंक, होटल, सार्वजनिक स्थानों के अलावा घरों से भी गाड़ियां चोरी हुईं। चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पीड़ितों को चप्पलें रगड़नी पड़ीं। हालांकि, बीच-बीच में पुलिस ने वाहन चोरों को दबोचा भी और गाड़ियां भी बरामद कीं, परंतु चोरी नहीं रुक पाई।
5- जुआ-सट्टा बंद कराने में कामयाबी
जुटा - सट्टा पर लगाम कसने के मामले में इस साल पुलिस कामयाब रही। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद पुलिस ने एक्शन मोड में आते हुए तेजी से इस दिशा में कार्रवाई शुरू की। इसका खासा असर भी देखने को मिला। ज्यादातर जुए के अड्डे बंद हो चुके हैं, सुनियोजित ढंग से सट्टा भी नहीं खिलाया जा रहा है। अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश के लिए पुलिस सक्रिय तो बहुत रही, परंतु इसे रोक नहीं पाई।
6- एंटी रोमियो स्क्वाएड ने कराई किरकिरी
महिलाओं के साथ होने वाली छेड़खानी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने एंटी रोमियो स्क्वाएड बनाया था। लेकिन, स्क्वाएड की पहली ही कार्रवाई से पुलिस की खूब किरकिरी हुई। किले के भीतर स्क्वाएड ने छेड़खानी के नाम पर कई ऐसे युवक-युवतियों को निशाने पर लिया, जो मित्र भाव से वहां बैठे हुए थे। सरेआम लड़कों से उठक बैठक लगवाई गई। यह मामला प्रदेश भर में सुर्खियों में रहा। इसके बाद से एंटी रोमियो स्कवाएड ठंडे बस्ते में चला गया।
7- साइबर क्राइम बढ़ा
इस साल साइबर क्राइम का ग्राफ खूब बढ़ा। किसी के खाते से पैसे निकाल लिए गए, तो किसी को एटीएम के जरिये लूटा गया। शिक्षित वर्ग के लोग ज्यादातर साइबर क्राइम का शिकार बने। ज्यादातर मामलों में लोगों ने रकम तो गंवाई ही, साथ ही एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पाई।