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डकैती प्रयास मामले में चार आरोपी कोर्ट से बरी
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-अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए किया बरी
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की अदालत ने डकैती के प्रयास के मामले में संजय उर्फ छोटा, पवन, कवित और परवीन उर्फ बब्बू को बरी कर दिया। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 20 मई 2016 को बहादुरगढ़ के लाइन पार क्षेत्र में पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग चोर पियाऊ मोड़ पर राहगीरों को लूटने की योजना बना रहे हैं। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो आरोपियों ने कथित तौर पर सरकारी वाहन को रोककर लूटने का प्रयास किया।
पुलिस ने संजय और पवन से देसी पिस्तौल व कारतूस तथा कवित से लोहे की रॉड बरामद होने का दावा किया था। परवीन उर्फ बब्बू को बाद में गिरफ्तार किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटनास्थल व्यस्त होने के बावजूद पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। जांच अधिकारी के बयानों में भी विसंगतियां थीं। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि सरकारी वाहन पर लगा पुलिस का पहचान चिह्न ढका हुआ था। अदालत ने इन परिस्थितियों को अभियोजन पक्ष की कहानी पर संदेह का आधार माना।
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आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 401 के तहत भी आरोप था, लेकिन उनके आदतन चोरी करने वाले गिरोह का हिस्सा होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना और चारों को बरी कर दिया।
बरी किए गए आरोपियों में संजय उर्फ छोटा निवासी पिनाना (सोनीपत), पवन निवासी झज्जर, कवित निवासी माजरी (झज्जर) और परवीन उर्फ बब्बू निवासी मित्राऊ (दिल्ली) शामिल हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुखप्रीत सिंह की अदालत ने डकैती के प्रयास के मामले में संजय उर्फ छोटा, पवन, कवित और परवीन उर्फ बब्बू को बरी कर दिया। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी किया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 20 मई 2016 को बहादुरगढ़ के लाइन पार क्षेत्र में पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग चोर पियाऊ मोड़ पर राहगीरों को लूटने की योजना बना रहे हैं। पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो आरोपियों ने कथित तौर पर सरकारी वाहन को रोककर लूटने का प्रयास किया।
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पुलिस ने संजय और पवन से देसी पिस्तौल व कारतूस तथा कवित से लोहे की रॉड बरामद होने का दावा किया था। परवीन उर्फ बब्बू को बाद में गिरफ्तार किया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि घटनास्थल व्यस्त होने के बावजूद पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। जांच अधिकारी के बयानों में भी विसंगतियां थीं। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि सरकारी वाहन पर लगा पुलिस का पहचान चिह्न ढका हुआ था। अदालत ने इन परिस्थितियों को अभियोजन पक्ष की कहानी पर संदेह का आधार माना।
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आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 401 के तहत भी आरोप था, लेकिन उनके आदतन चोरी करने वाले गिरोह का हिस्सा होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले। अदालत ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना और चारों को बरी कर दिया।
बरी किए गए आरोपियों में संजय उर्फ छोटा निवासी पिनाना (सोनीपत), पवन निवासी झज्जर, कवित निवासी माजरी (झज्जर) और परवीन उर्फ बब्बू निवासी मित्राऊ (दिल्ली) शामिल हैं।