केशव की टीम में शामिल होने के लिए जोड़-तोड़ कर रहे हैं भाजपाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य ने अभी अध्यक्षी नहीं संभाली है लेकिन उनकी टीम में जगह पाने के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है।
इनमें कुछ नए भाजपाई हैं तो पुरानों की संख्या भी कम नहीं है। संघ से लेकर विहिप के दरबार में हाजिरी लगनी शुरू हो गई है। इसी के साथ मौजूदा पदाधिकारियों के भविष्य को लेकर कयास भी लगाए जा रहे हैं।
केशव मौर्य की उम्र और उनकी पृष्ठभूमि को देखते हुए यह माना जा रहा है कि प्रदेश की नई टीम में ज्यादातर युवा चेहरे ही होंगे। केशव चूंकि खुद अति पिछड़ी जाति से हैं, इसलिए माना जा रहा है कि उनकी नई टीम में सामान्य और दलित वर्ग से जुड़े चेहरों को तवज्जो मिल सकती है ताकि 2017 के चुनाव के लिए भाजपा के समीकरण दुरुस्त रखे जा सकें। साथ ही यह तर्क भी दिया जा सके कि भाजपा सभी को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है।
इसी नाते युवा ब्रिगेड के सदस्य भी प्रदेश पदाधिकारी बनने की संभावना तलाशने में जुट गए हैं। इनमें विद्यार्थी परिषद और युवा मोर्चा से जुड़े कई कार्यकर्ता शामिल हैं।
युवा चेहरों को केशव की टीम में जगह संभव
इसके अलावा मौजूदा टीम में पदाधिकारी कृष्णा पासवान, नीलिमा कटियार, समीर सिंह, कांता कर्दम जैसे लोग भी केशव की टीम में कद व पद बनाए रखने के लिए समीकरण फिट करने में जुटे हैं।
मीडिया टीम के भी कुछ चेहरे इस कोशिश में हैं कि उन्हें नई टीम में मौका मिल जाए। जहां तक मौजूदा टीम में महामंत्री पद की जिम्मेदारी निभा रहे धर्मपाल सिंह और स्वतंत्र देव सिंह का सवाल है तो पार्टी नेताओं का आकलन है कि इन दोनों को अमित शाह की नई राष्ट्रीय टीम में जगह दी जा सकती है ताकि इनकी जानकारी, क्षमताओं और समीकरणों का विधानसभा चुनाव में लाभ उठाया जा सके। निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को राष्ट्रीय टीम में काम करने का मौका मिलने की चर्चा है।
चुनाव लड़ने वालों को नई टीम में मौका नहीं
संघ सूत्रों की मानें तो विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वालों को नई टीम में जगह नहीं मिलेगी। अपवादस्वरूप दो-तीन चेहरे ही ऐसे रहेंगे जो मौजूदा विधायक हैं और पहले भी सांगठनिक जिम्मेदारी संभालते हुए चुनाव लड़ते रहे हैं।
भगवा टोली के रणनीतिकारों की इच्छा है कि संगठन में रहने वाले पूरी तरह सांगठनिक गतिविधियां ही देखें। साथ ही चुनाव लड़ने के बजाय चुनावी प्रबंधन टीम का हिस्सा बनें।
इसलिए तय किया गया है कि टीम बनाने से पहले इस मुद्दे पर भी लोगों का मन टटोल लिया जाए। जो लोग चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं उन्हें टीम में न रखकर चुनावी तैयारियों पर ध्यान देने को कहा जाए।