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छात्र नामांकन में फर्जीबाड़े पर लगी रोक, परीक्षाफल का प्रतिशत भी बढ़ा
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छात्र नामांकन में फर्जीबाड़े पर लगी रोक, परीक्षाफल का प्रतिशत भी बढ़ा
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संवाद न्यूज़ एजेंसी
इटावा । यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के पिछले तीन वर्षो की समीक्षा की जाए तो लगातार अभ्यर्थियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है । वही परीक्षाफल का प्रतिशत बढ़ा है।वही शिक्षा विभाग से जुड़े लोगो की माने तो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और सीसीटीवी केमरा की वजह से छात्र नामांकन में फर्जीवाडे पर काफी हद तक लगाम लगी है । शिक्षा का स्तर भी सुधर रहा हूं। परीक्षाफल के अनुसार जनपद के माध्यमिक शिक्षा परिषद का आकलन किया जाए तो बीते तीनवर्षो से शिक्षा का स्तर बेहतर हुआ है । वर्ष 2018 में हाईस्कूल में 22411 परीक्षार्थी थे तब परीक्षाफल 70.69 प्रतिशत आया था हालांकि 2019 में परीक्षार्थियों की संख्या बढ़कर 22605 हो गई । परीक्षाफल बढ़कर 83.03 प्रतिशत हो गया । 2020 में परीक्षार्थियों की सँख्या 21724 रह गई और परीक्षाफल बढ़कर 86.59 प्रतिशत हो गया । वही अगर इंटरमीडिएट के आंकडो पर गौर करे तो 2018 में 19072 छात्र छात्राओं ने परीक्षा दी। जिनका परीक्षाफल का प्रतिशत 79.70 प्रतिशत था। 2019 में परीक्षाफल का प्रतिशत बढ़कर 80.04 हो गया । इस वर्ष 18142परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे । 2020 में परीक्षा में 18029 छात्र बैठे। प्रतिशत बढ़कर 82.98 हो गया । आंकडो से प्रदर्शित होता है बीते कुछ वर्षो से परीक्षाफल का औसत बढ़ता जा रहा है । 'डीआइओएस राजू राणा ने बताया रेगुलर क्लासिस , शिक्षको की बेहतर रणनीति , ऑनलाइन व्यवस्था के बाद फर्जी छात्रो का गायब होना और नकल रोकने के लिए आवश्यक उपाय कराए जाने के बाद से परीक्षाफल में बढ़ौत्तरी होना स्वाभाविक है । बीते वर्षो से हुआ है प्रक्रिया में बदलाव .......... बीते कुछ वर्षो से लगातार यूपी बोर्ड के द्वारा संचालित कराई जा रही परीक्षाओं में खासा आधुनिक तकनीकि का उपयोग किया जारहा है।चाहे ऑनलाइन फॉर्म से लेकर फीडिंग की व्यवस्था हो या ओडिओ रिकार्डिग केसाथ सीसीटीवी फुटेज।इसवर्ष तो जनपद के प्रत्येक परीक्षा केंद्र को हाईटेक बनाया गया था जिसके तहत जनपद मुख्यालय को सभी केंद्रो से ऑनलाइन जोड़ने की व्यवस्था कराई गई थी।