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एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं मिलने पर किया हंगामा
गाजीपुर
Updated Fri, 29 Jun 2018 11:07 PM IST
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इंजेक्शन
- फोटो : डेमो फोटो
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जिला अस्पताल सहित ग्रामीण इलाके के सीएचसी और पीएचसी पर कुत्ता और बंदर काटने का इंजेक्शन मौजूद नहीं है। एंटी रेबीज इंजेक्शन न होने से मरीज भटक रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य महकमा उदासीन बना हुआ है। यह स्थिति कई दिनों से बनी हुई है। जिला अस्पताल में भी बीते 26 जून से इंजेक्शन नहीं लग रहा है। इससे नाराज मरीज और उनके साथ आए तीमारदारों ने शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय में घुस कर हो-हल्ला मचाया और इंजेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की।
जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन-एआरवी की सप्लाई बंद हो गई है। इंजेक्शन उपलब्ध न होने से लोग प्राइवेट मेडिकल स्टोर से एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीद रहे हैं। ऐसे में मरीजों का जमकर शोषण हो रहा है तथा मेडिकल संचालक मालामाल हैं। यह हालात जिला मुख्यालय पर ही नहीं ग्रामीण इलाके के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी देखने को मिल रही है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म होने से लोग शोषण के शिकार हो रहे हैं। देखा जाए तो पिछले 26 जून से ही जिला अस्पताल में इंजेक्शन खत्म हो गया है। जबकि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 150 से 200 लोग कुत्ता और बंदर काटने के बाद इंजेक्शन लगवाने आते हैं, लेकिन जब से अस्पताल से एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म हो गया है, लोग यहां से मायूस और निराश होकर वापस लौट जा रहे हैं। ऐसे में लोगों को सीधे बाजार का रास्ता दिखा दिया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में एक रुपये की पर्ची पर लोगों को रेबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। यही व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी और पीएचसी पर दी गई है, लेकिन बाजार में मेडिकल स्टोरों पर एंटी रेबीज इंजेक्शन की कीमत 330 रुपये है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह इंजेक्शन खरीदना काफी कठिन है।
कुत्ता और बंदर काटने के बाद सही समय पर अगर एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं लगा तो काफी खतरा हो सकता है। सादात ब्लॉक के कटया निवासी रामकरन राम शुक्रवार को कुत्ते का इंजेक्शन लगवाने जिला अस्पताल पहुंचे थे। वहां बताया गया कि एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं है। निराश हो वह वापस लौट गया।
शहर के अदरक बाजार निवासी राहुल शर्मा, करकापुर निवासी शैलेश यादव, आरीपुर निवासी खुशी पांडेय तथा मेदनीपुर निवासी भोला कुशवाहा ने बताया कि आम जनता परेशान है, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी चुप्पी साधे हुए हैं। लोगों ने कहा कि समस्या का हल तत्काल नहीं निकला तो लोग सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।
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जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन-एआरवी की सप्लाई बंद हो गई है। इंजेक्शन उपलब्ध न होने से लोग प्राइवेट मेडिकल स्टोर से एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीद रहे हैं। ऐसे में मरीजों का जमकर शोषण हो रहा है तथा मेडिकल संचालक मालामाल हैं। यह हालात जिला मुख्यालय पर ही नहीं ग्रामीण इलाके के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी देखने को मिल रही है।
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स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म होने से लोग शोषण के शिकार हो रहे हैं। देखा जाए तो पिछले 26 जून से ही जिला अस्पताल में इंजेक्शन खत्म हो गया है। जबकि जिला अस्पताल में प्रतिदिन 150 से 200 लोग कुत्ता और बंदर काटने के बाद इंजेक्शन लगवाने आते हैं, लेकिन जब से अस्पताल से एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म हो गया है, लोग यहां से मायूस और निराश होकर वापस लौट जा रहे हैं। ऐसे में लोगों को सीधे बाजार का रास्ता दिखा दिया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में एक रुपये की पर्ची पर लोगों को रेबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। यही व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी और पीएचसी पर दी गई है, लेकिन बाजार में मेडिकल स्टोरों पर एंटी रेबीज इंजेक्शन की कीमत 330 रुपये है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह इंजेक्शन खरीदना काफी कठिन है।
कुत्ता और बंदर काटने के बाद सही समय पर अगर एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं लगा तो काफी खतरा हो सकता है। सादात ब्लॉक के कटया निवासी रामकरन राम शुक्रवार को कुत्ते का इंजेक्शन लगवाने जिला अस्पताल पहुंचे थे। वहां बताया गया कि एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं है। निराश हो वह वापस लौट गया।
शहर के अदरक बाजार निवासी राहुल शर्मा, करकापुर निवासी शैलेश यादव, आरीपुर निवासी खुशी पांडेय तथा मेदनीपुर निवासी भोला कुशवाहा ने बताया कि आम जनता परेशान है, लेकिन अधिकारी और कर्मचारी चुप्पी साधे हुए हैं। लोगों ने कहा कि समस्या का हल तत्काल नहीं निकला तो लोग सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे।