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अमर उजाला लाइव : नगर निगम के अस्पताल ही ‘बीमार’ 

Thu, 29 Sep 2016 12:14 AM IST
टीम डिजिटल, राजकुमार सैनी
टीम डिजिटल, राजकुमार सैनी Updated Thu, 29 Sep 2016 12:14 AM IST
सार

चिकित्सक नहीं, फार्मेसिस्ट देख रहे हैं मरीज, दवाइयों का टोटा 
सुबह आठ बजे का समय, दस बजे तक भी नहीं आते हैं कर्मचारी 
शहर के अस्पताल मरीजों से भरे, निगम के अस्पताल पड़े हैं खाली

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 Amar Ujala Live: municipal hospital 'sick'
hospital - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नगर निगम के अस्पताल ‘बीमार’ हो गए हैं। जिम्मेदार लोगों की लापरवाही के कारण इनकी हालत बिगड़ती जा रही है। न तो चिकित्सक समय पर ड्यूटी आते हैं और न ही अधिकारी समय से दवाइयों का बजट पास करते हैं। नतीजा, बुखार के प्रकोप के बीच भी ये खाली पड़े हैं। यहां पर फार्मेसिस्ट और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही डॉक्टर बन गए हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने इन अस्पतालों का दौरा किया तो पूरी सच्चाई सामने आ गई। मेरठ में साकेत गोल मार्केट स्थित होम्योपैथी डिस्पेंसरी और कोतवाली स्थित डिस्पेंसरी की हालत खस्ता नजर आई। दस बजे तक यहां कोई चिकित्सक नजर नहीं आया।
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सुबह समय 9.15 बजे

 Amar Ujala Live: municipal hospital 'sick'
hospital - फोटो : अमर उजाला
साकेत गोल मार्केट में नगर निगम की होम्योपैथी डिस्पेंसरी है। इस डिस्पेंसरी पर मुख्य चिकित्सक, दो फार्मेसिस्ट और दो अनुचर तैनात हैं। जब संवाददाता डिस्पेंसरी पर पहुंचा तो देखा कि मुख्य चिकित्सक डॉ. आरएस चौहान, सहित दोनों फार्मेसिस्ट की कुर्सी खाली पड़ी हैं। डिस्पेंसरी पर केवल अनुचर राजकुमारी बैठी थी और अनुचर अजीज दवाई घर में लगे हीटर पर चाय गर्म कर रहे थे। जैसे ही रिपोर्टर अनुचरों से बातचीत कर रहे थे तो पीछे से फार्मेसिस्ट संजीव गुप्ता आ गए और थोड़ा लेट होने की बात कहने लगे। संजीव गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में दवाइयां पर्याप्त हैं। 40-45 मरीज प्रतिदिन देख रहे हैं। जब इनसे मुख्य चिकित्सक और फार्मेसिस्ट सरिता के बारे में पूछा गया तो इन्होंने बताया कि डॉ. आरएस चौहान तो नगर स्वास्थ्य अधिकारी का काम देख रहे हैं, सरिता कुछ बीमार हैं तो लेट आएंगी। मजे की बात है कि इनके रजिस्टर में तो 40-45 मरीजों के नाम लिखे थे, लेकिन बुधवार को सवा नौ बजे तक एक भी मरीज डिस्पेंसरी पर नहीं पहुंचा।
यहां ये है स्टाफ
मुख्य चिकित्सक डॉ. आरएस चौहान, फार्मेसिस्ट संजीव गुप्ता, अनुचर राजकुमारी, अनुचर अजीज और संविदा पर फार्मेसिस्ट सरिता तैनात हैं। 
 
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सुबह 9.37 से 10 बजे तक

 Amar Ujala Live: municipal hospital 'sick'
hospital - फोटो : अमर उजाला
शहर कोतवाली की बगल में नगर निगम की डिस्पेंसरी है। यहां पर एक फिजिशियन, दो फार्मेसिस्ट, चार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और एक सफाई कर्मचारी तैनात है। सुबह 9.37 बजे जब संवाददाता डिस्पेंसरी पर पहुंचते तो फिजिशियन डा. बीके शर्मा, फार्मेसिस्ट राजेश शर्मा की कुर्सी खाली पड़ी थी। दो तीन मरीज उनके इंतजार में बैठे थे। एक कोने में कुर्सी पर बैठे फार्मेसिस्ट जयंती प्रसाद शर्मा एक मरीज की नब्ज देख रहे थे। जब इनसे चिकित्सक, दवाइयां और अन्य स्टाफ की जानकारी ली गई तो वह पूरे स्टाफ का बचाव करते नजर आए।
यहां ये है स्टाफ 
मुख्य चिकित्सक डॉ. बीके शर्मा, फार्मेसिस्ट जयंती प्रसाद शर्मा, राजेश शर्मा, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महरुनिशा, मूदन, जमील, रफीक अहमद और सफाई कर्मचारी अश्वनी हैं।
 
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छह लाख का बजट, फिर भी दवाइयां नहीं 

 Amar Ujala Live: municipal hospital 'sick'
hospital - फोटो : राजकुमार सैनी
नगर निगम बोर्ड सभी डिस्पेंसरी के लिए छह लाख का बजट देते है। उसके बाद भी दवाइयां नहीं खरीदी जा रही हैं। फार्मेसिस्ट जयंती प्रसाद शर्मा ने बताया कि हमारे यहां पर नाममात्र की दवाइयां हैं। दवाइयों की खरीद के लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी को दस हजार रुपये की फाइल भेजी गई है। लेकिन अभी पैसा पास नहीं किया है। फिलहाल हम अपने स्तर से ही दवाइयां खरीदकर मरीजों को बांट रहे हैं। इन्होंने यह भी बताया कि डिस्पेंसरी में सरकारी दवाइयों की भी सप्लाई होती हैं।
रिकॉर्ड में दिखाएं 70-80 मरीज
निगम की डिस्पेंसरी पर चिकित्सक समय से नहीं पहुंच रहे हैं। फिर भी रजिस्ट्रर में प्रतिदिन 70 से 80 मरीजों की एंट्री हो रही है। सवाल उठता है कि जब चिकित्सक समय से नहीं आते तो मरीज कौन देख रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि दवाइयों के बजट को हजम करने और अपनी नौकरी बचाने के लिए रजिस्टर पूरे किए जा रहे हों।
 

फार्मेसिस्ट नहीं देख सकते मरीज 

 Amar Ujala Live: municipal hospital 'sick'
hospital - फोटो : राजकुमार सैनी
नियमानुसार फार्मेसिस्ट न तो बीमारी की जानकारी रखता है और न ही किसी बीमार व्यक्ति को अपनी मर्जी से दवा लिख सकता है। उसका काम केवल चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाई मरीज को देना होता है। जबकि निगम की डिस्पेंसरी में सबकुछ फार्मेसिस्ट के हाथों में ही चल रहा है।
 

 Amar Ujala Live: municipal hospital 'sick'
hospital - फोटो : राजकुमार सैनी
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरएस चौहान ने बताया क‌ि डिस्पेंसरी से जो भी दवाइयों के बजट की डिमांड आती है उसको तत्काल स्वीकृत करके बजट दिया जाता है बजट की कोई कमी नहीं है। फिर भी अगर कोई डिमांड पास होने के बाद भी धनराशि नहीं मिली है तो हम दिखवाते हैं। जो फार्मेसिस्ट और कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए उनका वेतन काटा जाएगा। 


नगरायुक्त  देवेंद्र कुमार कुशवाहा ने कहा क‌ि अगर डिस्पेंसरी पर लापरवाही हो रही है तो हम कार्रवाई करेंगे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इस समय डिस्पेंसरी पर दवाइयों की कमी नहीं होने दी जाएगी। लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
चिकित्सक नहीं, फार्मेसिस्ट देख रहे हैं मरीज, दवाइयों का टोटा  सुबह आठ बजे का समय, दस बजे तक भी नहीं आते हैं कर्मचारी  शहर के अस्पताल मरीजों से भरे, निगम के अस्पताल पड़े हैं खाली
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