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अंडर पास बनने के बाद से थी ट्रैक पर दिक्कत

Tue, 04 Apr 2017 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 04 Apr 2017 01:08 AM IST
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 After becoming an underpass, there was trouble on the track
train accident - फोटो : demo
महाकौशल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त की जांच में एक के बाद एक कमियां सामने आती जा रही हैं। पता चला है कि दुर्घटनास्थल पर कुछ दिन पूर्व अंडरब्रिज (अंडरपास) का निर्माण हुआ था, तब से ही ट्रैक में दिक्कतें बनी हुई थी। रात में ट्रैकमैन पेट्रोलिंग भी नहीं कर रहे थे। इससे पटरी में कमी बढ़ती गई और हादसा हो गया।
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दुर्घटना की जांच मुख्य संरक्षा अधिकारी एमपी सिंह, मुख्य रॉलिंग स्टाफ अभियंता बीएम अग्रवाल, मुख्य मोटिव पावर अभियंता (डीजल) परमानंद शर्मा, मुख्य ट्रैक अभियंता सीपी गुप्ता और मुख्य यात्री परिवहन की देखरेख में हो रही है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि दुर्घटना स्थल के पास ही कुछ दिन पहले अंडर पास का निर्माण हुआ था, तब से ही पटरियों के आसपास मिट्टी और गिट्टी की कमी थी। दूसरा, रात में कर्मचारियों से पेट्रोलिंग भी नहीं कराई जा रही थी। अगर पेट्रोलिंग हो रही होती तो शायद हादसे से पहले पटरियों में आई कमी को पकड़ा जा सकता था। इस कमी के सामने आने के बाद ही महोबा के सीनियर और जूनियर पीडब्लूआई को निलंबित किया गया। वहीं, हादसे के बाद पटरियों के टूटे 16 हिस्सों को आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया गया है, जिनको जांच के लिए आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गानाइजेशन) लखनऊ भेजा जा रहा है।
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मालूम हो कि, इलाहाबाद रेल रूट पर 29 मार्च की रात 2.07 बजे जबलपुर से निजामुद्दीन जाने वाली 12189 महाकौशल एक्सप्रेस की आठ बोगियां पलटने से 13 यात्री घायल और सौ के करीब यात्री चुटहिल हो गए थे। जांच टीम ड्राइवर, सहायक ड्राइवर, गार्ड, टिकट चेकिंग स्टाफ, महोबा और कुलपहाड़ स्टेशन के स्टेशन मास्टर, प्वाइंट्स मैन, गैंगमैन, गेट मैन, आरपीएफ जवानों समेत करीब 40 कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी हैं।
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नाम नहीं बता सके अफसर 
महोबा में कार्र्यरत इंजीनियरिंग विभाग के एक अफसर ने बयान दिया था कि उनके कर्मचारियों ने हादसे की रात दो लोगों को पटरियों के पास टॉर्च लेकर घूमते देखा था। यह बात सामने आने के बाद पुलिस ने अफसर से पूछताछ की तो वह अपने कर्मचारियों के नाम नहीं बता सके, जिन्होंने दो लोगों को देखा था।
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