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12 साल पुराने सड़क हादसे मामले में आरोपी बरी
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झज्जर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार राणा की अदालत ने वर्ष 2014 के सड़क दुर्घटना मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी गोविंद उर्फ गोवर्धन को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने वर्ष 2019 में बहादुरगढ़ की एसडीजेएम अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और कारावास व जुर्माने की सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान तथा लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
मामले के अनुसार 6 सितंबर 2014 की रात सोमबीर, सुनील और योगेंद्र गांव ईशरहेड़ी से अपने गांव सिद्धीपुर लोहाकलां लौट रहे थे। आरोप था कि तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे तीनों घायल हो गए। उपचार के दौरान घायल सोमबीर की 18 नवंबर 2014 को मौत हो गई। इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने अतिरिक्त सत्र न्यायालय में अपील दायर की।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दुर्घटना के समय चालक मौके से फरार हो गया था और प्रारंभिक एफआईआर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई थी। जांच एजेंसी ने आरोपी की टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई। साथ ही वाहन के पंजीकृत मालिक से आवश्यक पूछताछ नहीं की गई और न ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया गया। अदालत ने इसे जांच की गंभीर कमी माना। अदालत ने यह भी कहा कि केवल अदालत में पहली बार आरोपी की पहचान कर देना पर्याप्त साक्ष्य नहीं है। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका और गोविंद उर्फ गोवर्धन को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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मामले के अनुसार 6 सितंबर 2014 की रात सोमबीर, सुनील और योगेंद्र गांव ईशरहेड़ी से अपने गांव सिद्धीपुर लोहाकलां लौट रहे थे। आरोप था कि तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे तीनों घायल हो गए। उपचार के दौरान घायल सोमबीर की 18 नवंबर 2014 को मौत हो गई। इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने अतिरिक्त सत्र न्यायालय में अपील दायर की।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दुर्घटना के समय चालक मौके से फरार हो गया था और प्रारंभिक एफआईआर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुई थी। जांच एजेंसी ने आरोपी की टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई। साथ ही वाहन के पंजीकृत मालिक से आवश्यक पूछताछ नहीं की गई और न ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत नोटिस जारी किया गया। अदालत ने इसे जांच की गंभीर कमी माना। अदालत ने यह भी कहा कि केवल अदालत में पहली बार आरोपी की पहचान कर देना पर्याप्त साक्ष्य नहीं है। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका और गोविंद उर्फ गोवर्धन को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
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