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ब्रेकफास्ट नहीं तो दिल की बीमारी का खतरा
Chandigarh
Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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चंडीगढ़। पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसन विभाग के एक सर्वे में सामने आया है कि शहर के एक तिहाई कालेजों के छात्र ब्रेकफास्ट ही नहीं करते हैं। नतीजतन उनका मेटाबोलिक सिंड्रोम होने की संभावना बन गई है। ऐसा होने पर उनका शुगर लेवल गड़बड़ हो सकता है। उनको मोटापा तो होगा ही, साथ ही दिल की बीमारी से लेकर हाई ब्लड प्रेशर तक होने की आशंका है। पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसन विभाग ने शहर के पांच प्रमुख कालेजों में कराए गए इस सर्वे की प्राइमरी रिपोर्ट को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च को भेज दिया है। हालांकि ब्रेकफास्ट न करने से युवाओं के शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का परिणाम तो अगले छह महीनों में पता चलेगा।
इस बारे में पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसन विभाग के प्रोफेसर अमरजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने जीसीजी-11, जीसीजी-42, जीसीएम-11, गुरु गोविंद सिंह कालेज-26 और डीएवी-10 के छात्रों पर सर्वे किया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से कराए जा रहे इस सर्वे के पहले परिणाम में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रो. सिंह कहते हैं कि उन्होंने पाया कि एक तिहाई छात्र ब्रेकफास्ट ही नहीं करते हैं, जबकि हैवी ब्रेकफास्ट करना बहुत ही जरूरी होता है। वे बताते हैं कि ऐसा न करने पर युवाओं में कमजोरी और थकान महसूस होती है। वे कहते हैं कि ब्रेकफास्ट न करने वाले युवाओं के शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का आंकलन नहीं किया गया है, लेकिन अगले छह महीनों में इसकी जानकारी युवाओं तथा स्वास्थ्य मंत्रालय को दी जाएगी। हालांकि उनकी टीम ने युवाओं को हैवी ब्रेकफास्ट करने की सलाह देनी शुरू कर दी है। वे कहते हैं कि ब्रेकफास्ट न करने से शुगर का लेवल तो गड़बड़ हो ही जाता है, साथ ही ब्लड प्रेशर समेत दिल की बीमारी की आशंका भी बढ़ जाती है। हालांकि इस सर्वे में एक बात सामने जरूर आई कि युवा छात्रों का झुकाव अध्यात्म की ओर जरूर है। पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसन विभाग की टीम ने 120 मणिपुरी छात्रों और इतने ही पंजाबी छात्रों को जब प्रवचन सुनाए तो पहले चरण में उनकी कोई रुचि नहीं थी, लेकिन बाद में पचास फीसदी से ज्यादा छात्रों ने बार-बार प्रवचन सुनने की इच्छा जाहिर की। बुधवार को इस प्रोजेक्ट पर पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसन विभाग के प्रो. अमरजीत सिंह समेत डॉ. सोनू गोयल और कुछ अन्य डॉक्टरों ने एक किताब का विमोचन भी किया।
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इस बारे में पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसन विभाग के प्रोफेसर अमरजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने जीसीजी-11, जीसीजी-42, जीसीएम-11, गुरु गोविंद सिंह कालेज-26 और डीएवी-10 के छात्रों पर सर्वे किया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से कराए जा रहे इस सर्वे के पहले परिणाम में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्रो. सिंह कहते हैं कि उन्होंने पाया कि एक तिहाई छात्र ब्रेकफास्ट ही नहीं करते हैं, जबकि हैवी ब्रेकफास्ट करना बहुत ही जरूरी होता है। वे बताते हैं कि ऐसा न करने पर युवाओं में कमजोरी और थकान महसूस होती है। वे कहते हैं कि ब्रेकफास्ट न करने वाले युवाओं के शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का आंकलन नहीं किया गया है, लेकिन अगले छह महीनों में इसकी जानकारी युवाओं तथा स्वास्थ्य मंत्रालय को दी जाएगी। हालांकि उनकी टीम ने युवाओं को हैवी ब्रेकफास्ट करने की सलाह देनी शुरू कर दी है। वे कहते हैं कि ब्रेकफास्ट न करने से शुगर का लेवल तो गड़बड़ हो ही जाता है, साथ ही ब्लड प्रेशर समेत दिल की बीमारी की आशंका भी बढ़ जाती है। हालांकि इस सर्वे में एक बात सामने जरूर आई कि युवा छात्रों का झुकाव अध्यात्म की ओर जरूर है। पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसन विभाग की टीम ने 120 मणिपुरी छात्रों और इतने ही पंजाबी छात्रों को जब प्रवचन सुनाए तो पहले चरण में उनकी कोई रुचि नहीं थी, लेकिन बाद में पचास फीसदी से ज्यादा छात्रों ने बार-बार प्रवचन सुनने की इच्छा जाहिर की। बुधवार को इस प्रोजेक्ट पर पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसन विभाग के प्रो. अमरजीत सिंह समेत डॉ. सोनू गोयल और कुछ अन्य डॉक्टरों ने एक किताब का विमोचन भी किया।
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