Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   City & states ›   बहुत पापड़ बेले, फिर मिली ‘फरारी की सवारी’

बहुत पापड़ बेले, फिर मिली ‘फरारी की सवारी’

Sun, 24 Jun 2012 12:00 PM IST
Chandigarh
Chandigarh Updated Sun, 24 Jun 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
चंडीगढ़। थ्री इडियट्स, स्माइल, लाइफ इन मेट्रो जैसी हिट फिल्म में अपने अभिनय से दर्शकों के दिल पर राज करने वाले अभिनेता शरमन जोशी निर्देशक राजेश मापुष्कर के साथ नई फिल्म ‘फरारी की सवारी’ की प्रमोशन के लिए शनिवार को सेक्टर-9 डी स्थित ‘अमर उजाला’ के रीजनल आफिस पहुंचे। इस दौरान उन्होंने फिल्म पर भी चर्चा की और ‘अमर उजाला’ के चंडीगढ़ की स्मार्टेस्ट वूमेन कांटेस्ट-3 के सेमीफाइनल में पहुंची प्रतिभागियों और उनके बच्चों से रूबरू होकर दिल की बातें सांझा की।
विज्ञापन

शरमन ने कहा कि फिल्म ‘फरारी की सवारी’ में पिता के लीड रोल के लिए उन्हें बहुत पापड़ बेलने पड़े। आडीशन में कई चक्कर काटने के अलावा उन्हें बार-बार मेकअप टेस्ट से गुजरना पड़ा। पहले तो निर्देशक ने उन्हें इस रोल के लिए फेल कर दिया, लेकिन आखिरकार उनका चयन हो गया और अब उसका रिजल्ट भी बेहतर मिल रहा है।
विज्ञापन

फिल्म में शरमन के अभिनय और मेकओवर ने ऐसा कमाल दिखाया कि इसे दर्शकों का अच्छा रिस्पांस मिलने लगा। इसकी खुशी शरमन और राजेश के चेहरे पर साफ झलक रही थी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि फिल्म के पहले सप्ताह में ही 21 करोड़ का बिजनेस हो चुका है। अब तो फरारी कार की ही नहीं, महंगी से महंगी कार की सवारी कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


----
फादरहुड को समर्पित है ये फिल्म : राजेश
फरारी की सवारी फिल्म के बारे में फिल्म के निर्देशक राजेश मापुष्कर ने कहा कि यह एक पिता और बेटे की कहानी है। यह फिल्म उन्होंने पूरे फादरहुड को समर्पित की है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ से उनका खास नाता है, इसलिए यहां आना उन्हें बेहद पसंद है।
----
पिता का रोल नहीं था आसान : शरमन
अभिनेता शरमन ने कहा कि फि ल्म में पिता का रोल करना उनके लिए आसान नहीं था। उनके पिता ने उन्हें हमेशा उनके फैसले में साथ दिया। फिल्म में उनका और उनके पिता का रोल वैसा है, जैसे फिल्म में रोजी और उनके बेटे का है। वे इस फिल्म को अपनी सोलो फिल्म नहीं मानते हैं, क्योंकि वे हमेशा खुद को एक्टर मानते हैं।

-------
फिल्म लिखने में लगे साढ़े सात साल
फिल्म के निर्माता विधु विनोद चोपड़ा को कई सालों से सह निर्देशक के तौर पर साथ देने और विज्ञापन जगत में काफी नाम कमाने वाले निर्देशक राजेश मापुष्कर ने कहा कि वे खुद की फिल्म बनाना चाहते थे। इस फिल्म को लिखने में उन्हें साढ़े सात साल लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed