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क्या 'आप' की तर्ज पर बीजेपी विधायकों पर भी गिरेगी गाज?

Sat, 20 Jan 2018 03:27 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Sat, 20 Jan 2018 03:27 PM IST
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Will Election commission take action against BJP MLA in chhattisgarh on the lines of AAP
मुख्यमंत्री रमन सिंह - फोटो : twitter
संसदीय सचिवों के मामले में अगर चुनाव आयोग ने दिल्ली की तरह कोई फैसला किया तो छत्तीसगढ़ में रमन सिंह सरकार संकट में आ सकती है।
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90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के 49 विधायक हैं, जिनमें से 11 संसदीय सचिव के पद पर कार्यरत हैं। दिल्ली की तर्ज पर यहां कार्रवाई हुई तो इनकी संख्या 38 रह जाएगी। इसके उलट कांग्रेस पार्टी के पास अभी 39 सदस्य हैं।

राज्य के 11 संसदीय सचिवों के कामकाज पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा रखी है।

अलग कमरा, वेतन, सुविधाएं

छत्तीसगढ़ में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त इन संसदीय सचिवों को मंत्रालय में अलग से कमरा, वेतन के 73,000 रुपए के अलावा 11,000 रुपए और मंत्रियों को मिलने वाली अधिकांश सुविधायें मिलती रही हैं।
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इसके अलावा विधानसभा में कई अवसरों पर मंत्री की जगह संसदीय सचिव ही प्रश्नों का उत्तर भी देते रहे हैं।

अब कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि चुनाव आयोग छत्तीसगढ़ में भी संसदीय सचिवों के पद पर काम करने वाले विधायकों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करे।

गौरतलब है कि दिल्ली में चुनाव आयोग ने संसदीय सचिव के पद पर रहने वाले 'आप' के मौजूदा 20 विधायकों की सदस्यता रद्द करने को लेकर राष्ट्रपति को सिफारिशें भेजी हैं।
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शुक्रवार को इस खबर के आने के बाद से ही छत्तीसगढ़ की राजनीति भी गरमा गई है। 

अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है

Will Election commission take action against BJP MLA in chhattisgarh on the lines of AAP
रमन सिंह - फोटो : SELF
छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा, "अगर दिल्ली में चुनाव आयोग संसदीय सचिवों की सदस्यता रद्द करने की सिफारिश कर सकती है तो छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं? हम रमन सिंह से मांग करते हैं कि नैतिकता के आधार पर वे अपने संसदीय सचिवों से त्यागपत्र लें।"

छत्तीसगढ़ में लाभ के पद का हवाला देते हुए संसदीय सचिवों के पद को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं।

कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक मोहम्मद अकबर ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के समक्ष इस मुद्दे पर 22 अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, लेकिन निर्धारित समय सीमा में इसे भारत निर्वाचन आयोग को प्रेषित नहीं किये जाने के बाद मोहम्मद अकबर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

मोहम्मद अकबर ने सुनवाई के दौरान अदालत से मांग की थी कि जब तक संसदीय सचिवों से जुड़े मामले में अंतिम फैसला न आ जाए, तब तक छत्तीसगढ़ के संसदीय सचिवों की सुविधाओं और उनके कामकाज पर रोक लगाई जाए।

इसके बाद पिछले साल अगस्त में हाईकोर्ट ने संसदीय सचिवों के अधिकारों को 'सीज' करने का आदेश दिया था। इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है। 

मोहम्मद अकबर ने चुनाव आयोग के ताजा फैसले के बाद उम्मीद जताई है कि छत्तीसगढ़ में भी संसदीय सचिवों की सदस्यता रद्द करने का फैसला होगा। 

इधर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में एक व्यवस्था के तहत संसदीय सचिवों की नियुक्ति की गई थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में हाईकोर्ट का फैसला आना बाकी है। इसलिये इस विषय पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। 
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