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रायपुर में ट्रेड यूनियनों ने खोला मोर्चा: गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई की मांग पर अड़े, कहा- नहीं रुक रहा शोषण
Wed, 13 May 2026 03:05 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Wed, 13 May 2026 03:05 PM IST
सार
Trade Unions Protest in Raipur: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आव्हान पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अंबेडकर चौक में ट्रेड यूनियनों के संयुक्त बैनर तले श्रमिकों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया।
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रायपुर में ट्रेड यूनियनों ने खोला मोर्चा
- फोटो : Amar ujala digital
विस्तार
Trade Unions Protest in Raipur: केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आव्हान पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अंबेडकर चौक में ट्रेड यूनियनों के संयुक्त बैनर तले श्रमिकों और कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। असंगठित श्रमिकों पर जारी शोषण और दमन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान नोएडा सहित दिल्ली-एनसीआर में गिरफ्तार मजदूरों की रिहाई की मांग की गई।
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इस दौरान संयुक्त मंच के संयोजक, आल इंडिया इंश्योरेंस एम्पलाईज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष धर्मराज महापात्र ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, मानेसर, गुरुग्राम, फरीदाबाद और देश के अनेक औद्योगिक क्षेत्रों के श्रमिक अमानवीय शोषण, कम मजदूरी, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और श्रम के बढ़ते ठेकेदारीकरण के विरुद्ध साहसपूर्वक संघर्ष कर रहे हैं। सरकारें इन वास्तविक मांगों को संबोधित करने के बजाय दमन, गिरफ्तारियों, धमकियों और श्रमिकों तथा ट्रेड यूनियन नेताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज करने का रास्ता अपना रही हैं। ठेका श्रमिक औद्योगिक कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। उन्हें प्रतिदिन 10 से 13 घंटे तक कार्य करना पड़ रहा है। मात्र ₹10,000 से ₹12,000 प्रतिमाह के अल्प वेतन पर काम करना पड़ता है।
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उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों ने श्रमिक वर्ग की स्थिति को और भी कठिन बना दिया है। इस कारण देशभर के मजदूर यह मांगें उठा रहे हैं कि न्यूनतम मजदूरी 26,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए। इसके साथ ही 8 घंटे का कार्य दिवस, ठेका श्रमिकों के लिए समान वेतन एवं सुविधाएं, दमनात्मक कार्रवाइयों का तत्काल अंत एवं चारों श्रम संहिताओं को तत्काल खत्म कर पुराने 44 श्रम कानूनों की बहाली की मांग उठ रही है। श्रमिकों की न्यायोचित मांगों पर विचार करने के बजाय उन्हें “राष्ट्रविरोधी” बताकर बदनाम करने का अभियान चलाया जा रहा है। इसी पृष्ठभूमि में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा स्वतंत्र क्षेत्रीय महासंघों एवं संगठनों के संयुक्त मंच ने राष्ट्रीय मांग दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
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प्रदर्शन के दौरान रसोई गैस को सस्ता करने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण रखते हुए बढ़ती महंगाई पर रोक लगाए जाने की मांग भी की गई। प्रदर्शन के अंत में एक प्रस्ताव पारित कर एनआईटी परीक्षा निरस्त किए जाने के कारण पीड़ित छात्रों के जारी आंदोलन का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की गई।