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'मैंखल की उड़ान': मरवाही वन मंडल में शुरू हुआ तितलियों पर तीन दिवसीय शोध कार्यक्रम
Fri, 03 Oct 2025 05:23 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Fri, 03 Oct 2025 05:23 PM IST
सार
वर्तमान में मैंखल क्षेत्र में अब तक 145 प्रकार की तितलियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस शोध के बाद यह संख्या बढ़कर 180 प्रजातियों तक पहुँच सकती है।
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मरवाही वन मंडल में शुरू हुआ तितलियों पर तीन दिवसीय शोध कार्यक्रम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गौरेला-पेंड्रा- मरवाही जिले के मरवाही वन मंडल क्षेत्र में तितलियों की विभिन्न प्रजातियों पर केंद्रित तीन दिवसीय शोध कार्यक्रम ‘मैंखल की उड़ान’ का शुभारंभ हुआ। देशभर से आए शोधार्थियों के चार दल जिले के अलग-अलग हिस्सों में भ्रमण कर तितलियों का अध्ययन कर रहे हैं।
वर्तमान में मैंखल क्षेत्र में अब तक 145 प्रकार की तितलियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस शोध के बाद यह संख्या बढ़कर 180 प्रजातियों तक पहुँच सकती है। तितलियों की इतनी बड़ी संख्या यहां के समृद्ध पर्यावरण और जलवायु संतुलन का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है। शोधार्थियों का कहना है कि आमतौर पर जिन प्रजातियों को खोजने में कई दिन लग जाते हैं, वे यहां सहज ही दिखाई दे रही हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र तितलियों के संरक्षण और अध्ययन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मरवाही वन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि तितलियाँ केवल सुंदरता की प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन की जीवंत पहचान भी हैं। ‘मैंखल की उड़ान’ जैसे शोध कार्यक्रम से न सिर्फ नई प्रजातियों की जानकारी मिलेगी, बल्कि इनके संरक्षण की दिशा में ठोस पहल भी की जा सकेगी। फिलहाल, रंग-बिरंगी तितलियों से सराबोर यह इलाका शोधार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। तीन दिन तक चलने वाला यह कार्यक्रम जिले की जैव विविधता पर नई जानकारियाँ सामने लाने की उम्मीद जगाता है।
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वर्तमान में मैंखल क्षेत्र में अब तक 145 प्रकार की तितलियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस शोध के बाद यह संख्या बढ़कर 180 प्रजातियों तक पहुँच सकती है। तितलियों की इतनी बड़ी संख्या यहां के समृद्ध पर्यावरण और जलवायु संतुलन का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है। शोधार्थियों का कहना है कि आमतौर पर जिन प्रजातियों को खोजने में कई दिन लग जाते हैं, वे यहां सहज ही दिखाई दे रही हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र तितलियों के संरक्षण और अध्ययन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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मरवाही वन मंडल के अधिकारियों ने बताया कि तितलियाँ केवल सुंदरता की प्रतीक नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन की जीवंत पहचान भी हैं। ‘मैंखल की उड़ान’ जैसे शोध कार्यक्रम से न सिर्फ नई प्रजातियों की जानकारी मिलेगी, बल्कि इनके संरक्षण की दिशा में ठोस पहल भी की जा सकेगी। फिलहाल, रंग-बिरंगी तितलियों से सराबोर यह इलाका शोधार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। तीन दिन तक चलने वाला यह कार्यक्रम जिले की जैव विविधता पर नई जानकारियाँ सामने लाने की उम्मीद जगाता है।
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