फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   There used to be silence in Poorvarti bargaining is happening after two decades weekly market is set up in Chh

छत्तीसगढ़: पूवर्ती में कभी हुआ करता था सन्नाटा, दो दशक बाद हो रही सौदेबाजी, लगा साप्ताहिक बाजार, पढ़ें

Mon, 04 Aug 2025 05:00 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा
अमर उजाला नेटवर्क, सुकमा Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 04 Aug 2025 05:00 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के सबसे संवेदनशील और दशकों से नक्सलियों के खौफ़ में घिरे ‘सपनों’ गांव में बीस साल बाद पहली बार साप्ताहिक बाजार लगा। यही वो गांव है, जहां कभी हिड़मा जैसे खूंखार नक्सली की धौंस चलती थी। 

विज्ञापन
There used to be silence in Poorvarti bargaining is happening after two decades weekly market is set up in Chh
लगा साप्ताहिक बाजार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के सबसे संवेदनशील और दशकों से नक्सलियों के खौफ़ में घिरे ‘सपनों’ गांव में बीस साल बाद पहली बार साप्ताहिक बाजार लगा। यही वो गांव है, जहां कभी हिड़मा जैसे खूंखार नक्सली की धौंस चलती थी, लेकिन अब वही गांव भरोसे और बदलाव की नई कहानी लिख रहा है।

विज्ञापन


दो दशक बाद ‘सपनों’ में साकार हुआ बाजार का सपना
छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के सुदूर नक्सल प्रभावित गांव ‘सपनों’,जो कुख्यात नक्सली कमांडर हिड़मा का पैतृक गांव है, वहां 20 साल बाद पहली बार साप्ताहिक बाजार लगा। सलवा जुडूम और नक्सली गतिविधियों के चरम दौर में यह इलाका पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया था। बाजार, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधा – सब कुछ बंद हो गया था। लेकिन अब सुरक्षा बलों की मौजूदगी और प्रशासन की पहल से गांव में सामान्य जनजीवन की वापसी हो रही है।
विज्ञापन


हिड़मा के गढ़ में लोकतंत्र की दस्तक
‘सपनों’ गांव कभी नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था, जहां हिड़मा जैसे दुर्दांत कमांडर ने अपने संगठन की नींव रखी। लेकिन अब उसी गांव में साप्ताहिक बाजार लगना इस बात का संकेत है कि भय के साए में जी रहे ग्रामीण अब मुख्यधारा की ओर लौटने लगे हैं। बाजार में फल-सब्जी, मसाले, नमक-तेल से लेकर आवश्यक घरेलू वस्तुएं अब गांव में ही उपलब्ध हैं, जिससे लोगों को दूर तक पैदल जाने से मुक्ति मिली है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पहले पड़ोसी गांवों तक 20 किमी पैदल चलना पड़ता था
पहले जब बाजार नहीं लगता था, तो सपनों और आसपास के गांवों – जैसे जोन्नागुड़ा, मिनपारा, टेकलगुड़ा – के ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने के लिए 20 से 25 किलोमीटर पैदल चलकर जगरगुंडा या बासागुड़ा जाना पड़ता था। कई बार जंगल के रास्ते में सुरक्षा खतरे भी रहते थे। अब बाजार लगने से न केवल वक्त और मेहनत की बचत हो रही है, बल्कि लोगों का प्रशासन और सुरक्षा बलों पर भरोसा भी बढ़ा है।


CRPF और प्रशासन की साझी पहल रंग लाई
इस बदलाव के पीछे CRPF और ज़िला प्रशासन की संयुक्त पहल है। हाल ही में गांव के पास सपनों में नया सुरक्षा शिविर (FOB) स्थापित किया गया है, जिससे इलाके में गश्त बढ़ी है और नक्सली गतिविधियों में गिरावट आई है। सुरक्षा मिलने के बाद ग्रामीणों ने स्वेच्छा से बाजार लगाने की अनुमति दी, और इसमें व्यापारी भी अब हिस्सा लेने लगे हैं। यह विकास की ओर बढ़ते क़दमों का अहम पड़ाव है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed