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तांदुला जलाशय: वन विभाग ने कटीले तारों से जलाशय को घेरा, रेंजर बोले- वन्य प्राणी कूदकर पी सकते हैं पानी
Wed, 21 Feb 2024 01:08 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
Published by: श्याम जी.
Updated Wed, 21 Feb 2024 01:08 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में तांदुला जलाशय को चारों तरफ से कटीले तारों से घेर दिया गया है। ऐसे में वन्य जीव प्राणियों को पानी के दिक्कत सामना करना पड़ रहा है। वहीं, वन विभाग का कहना है कि जंगल में तालाब खोदे गए हैं, लेकिन हकीकत ये है वे तालाब सूखे पड़ हैं।
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कटीले तारों से जलाशय को घेरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जीवन दायिनी तांदुला जलाशय जो कि मानव जीवन के साथ-साथ वन्य प्राणियों के लिए भी महत्वपूर्ण है, परंतु हाल ही में वन विभाग द्वारा इस जलाशय को चारों ओर से कटीले तार फेंसिंग से घर दिया गया है। लगभग 6 से 8 फीट की इस घेराई के बाद सवाल यह उठता है कि आखिर वन्य प्राणी अब जलाशय से पानी कैसे पी पाएंगे। वहीं, जंगल में खोदे गए तालाब भी ज्यादातर सूखे ही हैं, ऐसे में वन विभाग के रेंजर का बयान आता है कि वन्य प्राणी तार से कूदकर जलाशय तक पहुंच सकते हैं।
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दरअसल, तांदुला जलाशय वन्य क्षेत्र का एक हिस्सा है। यहां पर वन्य प्राणियों का जमावड़ा रहता है। तेंदुए से लेकर हिरण नील गाय अक्सर देखे जाते हैं। ऐसे में इस जगह को चारों ओर से घेर दिया गया है। इससे जलाशय की जो खूबसूरती है वो तो घटी ही है। साथ ही भीषण गर्मी में वन्य प्राणियों को भी तकलीफ होने वाली है। रेंजर हेमलता उइके ने पूरे मामले पर कहा कि वन्य प्राणी नील गाय ऊपर से कूदकर जलाशय तक जा सकता है और एक जगह रास्ता छोड़ा गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या मूकबधिर जानवर प्यास में पानी के पास जाने के लिए तार घेरे के खत्म होने का इंतजार करेंगे।
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जेब भरने का काम
यूथ कांग्रेस के शहर अध्यक्ष साजन पटेल ने पूरे मामले पर वन विभाग को घेरा और कहा कि समझ नहीं आता कि आखिर इसे क्यों घेरा गया है। वन्य प्राणी जलाशय तक अपनी प्यास बुझाने आखिर पहुंचेंगे कैसे और वन विभाग का यह भी कहना है कि जंगल में तालाब खोदे गए हैं। लेकिन जो तालाब खोदे गए हैं, वे सूखे पड़े हैं। उसमें पानी भरने का कोई साधन ही नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले को सीधे-सीधे जेब भरने का साजिश करार दिया है। वहीं, बालोद निवासी तरुण नाथ योगी ने कहा कि इस जगह को हम बचपन से देख रहे हैं। पहली बार इसे घेर दिया गया है। हम सुबह वॉक करने आते हैं तो देखते हैं जानवर प्यासे बेबस कटीली तार के बाहर खड़े रहते हैं। आखिर इसमें वन्य प्राणियों का भला कैसे होगा।
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तालाब भी सूखे
जंगल के बीच में खोदे गए ज्यादातर तालाब सूखे हैं, जिसके कारण वन्य प्राणियों को जलाशय तक जाना अनिवार्य है, लेकिन तालाब को भरने के लिए मानसून का इंतजार करना पड़ेगा और यह तीन महीने का समय वन्य प्राणियों के लिए कहीं घातक सिद्ध न हो जाए और कुछ तो नए तालाब बनाए गए हैं, वहां पानी का एक बूंद नहीं है। वहीं, जलाशय प्रकृति का इतना बड़ा स्रोत है उसे घेर दिया गया है।
वन्य प्राणियों का विचरण क्षेत्र
जिस जगह को तार से घेरा गया है, वह वन्य प्राणियों का विचारण क्षेत्र है। यहां पर नील गाय की बहुलता है और अक्सर हम देखते हैं की डिहाइड्रेशन दुर्घटना तार फेंसिंग में फंसने के कारण घायल होने की सूचना मिलते ही रहती है। अब देखना यह होगा कि पूरे मामले पर वन विभाग का स्टैंड क्या रहता है, क्योंकि तार घेरे करते समय कुछ नियमों को भी दरकिनार किया गया है।