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छत्तीसगढ़: पादरी के घर के बाहर लगे धर्मांतरण रोको के नारे, भीड़ ने घर में घुसकर पीटा
Mon, 30 Aug 2021 01:23 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, कवर्धा
पीटीआई, कवर्धा
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 30 Aug 2021 01:23 AM IST
सार
- करीब 11 बजे पादरी के घर पर पूजा चल रही थी तब लोगों की भीड़ जमा हुई और नारेबाजी करने लगी
- भीड़ ने महिलाओं सहित उनके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की
- पिछले 15 दिनों में, राज्य भर में धार्मिक स्थलों पर कम से कम 10 ऐसे हमले कथित रूप से हुए
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सांकेतिक तस्वीर....
- फोटो : twitter
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के एक गांव में पादी को पीटने का मामला सामने आया है। 100 से अधिक लोगों ने 25 साल के पादरी के घर में घुसकर कथित तौर पर उसकी पिटाई कर दी। इस दौरान भीड़ धर्मांतरण रोको के नारे भी लगा रही थी।
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एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पादरी का नाम कवलसिंह परस्ते है। उनके घर के बाहर धर्म परिवर्तन के खिलाफ नारे लगाए गए और भीड़ ने उनकी संपत्ति की तोड़फोड़ की और मौके से भागने से पहले महिलाओं सहित उनके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की।
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यह घटना तब हुई जब कुकदूर थाना क्षेत्र के पोलमी गांव के रहने वाले पादरी के घर पर पूजा चल रही थी। करीब 11 बजे लोगों की भीड़ जमा हुई और नारेबाजी करने लगी। वहीं पुलिस ने बताया कि भीड़ ने पूजा की वस्तुओं और घरेलू सामानों को क्षतिग्रस्त कर दिया।
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कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची। साथ ही कहा कि इस संबंध में मामला दर्ज किया जा रहा है और आगे की कार्रवाई की जाएगी और मामले की जांच जारी है।
वहीं छत्तीसगढ़ के ईसाई मंच के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने पुलिस और राज्य सरकार पर ईसाई पूजा स्थलों पर हमले के मामलों में उचित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह काफी खतरनाक है, जो राज्य में प्रचलित हो गई है और सरकार इसे रोकने में विफल रही है। सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने में लाचार है।
आगे उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों में, राज्य भर में हमारे धार्मिक स्थलों पर कम से कम 10 ऐसे हमले कथित रूप से हुए, लेकिन किसी भी मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हम सिर्फ न्याय चाहते हैं। बार-बार ऐसी घटनाओं का मतलब है सरकार भी उनका समर्थन कर रही हैं। साथ ही उन्होंने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा वह पुलिस के खिलाफ सबूत के साथ सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करेंगे।