{"_id":"6a895fbec563a67d7501d066","slug":"the-delay-in-the-construction-and-repair-work-of-national-highway-45-is-now-becoming-a-source-of-trouble-for-the-public-political-intervention-has-also-begun-regarding-the-roads-dilapidated-condition-and-the-slow-pace-of-construction-gorella-pendra-marwahi-news-c-1-1-noi1501-4638230-2026-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"NH-45 की बदहाली पर सख्ती: केवंची-रतनपुर मार्ग पर भारी वाहनों की एंट्री बंद, 40 दिन में सुधार की उम्मीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
NH-45 की बदहाली पर सख्ती: केवंची-रतनपुर मार्ग पर भारी वाहनों की एंट्री बंद, 40 दिन में सुधार की उम्मीद
Sat, 22 Aug 2026 05:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2026 05:38 PM IST
सार
राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर द्वारा 20 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक इस मार्ग पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगाई गई है। जिला प्रशासन जीपीएम ने भी प्रतिबंध के आदेश के बाद भारी वाहनों को निर्धारित परिवर्तित मार्ग से रवाना करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
NH-45 पर भारी व ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर 30 सितंबर तक प्रतिबंध।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जबलपुर से केवंची, करिआम, केंदा, रतनपुर होते हुए बिलासपुर और रायपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-45 की बदहाल स्थिति अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में सड़क निर्माण और मरम्मत की धीमी रफ्तार को लेकर लगातार शिकायतों के बाद अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। केवंची से रतनपुर के बीच भारी और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर करीब 40 दिनों के लिए रोक लगा दी गई है।
सड़क की स्थिति को लेकर बिलासपुर सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू और कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा कर निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर ने 20 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक इस मार्ग पर भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया है।
प्रतिबंध लागू होने के बाद जीपीएम जिला प्रशासन ने भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किया है। अब पेंड्रा से रतनपुर और बिलासपुर की ओर जाने वाले भारी वाहनों को पेंड्रा-कोटमी-पसान-कटघोरा-पाली होते हुए रतनपुर भेजा जा रहा है। इससे वाहनों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, लेकिन माना जा रहा है कि भारी वाहनों का दबाव कम होने से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत में तेजी आएगी।
विज्ञापन
सड़क की खराब हालत का असर यात्री बसों पर भी पड़ा है। कई बस सेवाएं बंद हो गई हैं, जबकि कुछ बसों को वैकल्पिक मार्ग से रतनपुर और बिलासपुर की ओर भेजा जा रहा है। इससे यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक लंबे समय से गड्ढों और अधूरे निर्माण के कारण इस मार्ग पर सफर मुश्किल बना हुआ है। ऐसे में भारी वाहनों पर प्रतिबंध से सड़क सुधार की उम्मीद बढ़ी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 30 सितंबर तक निर्माण और मरम्मत का काम निर्धारित गति से पूरा हो पाएगा। यदि विभाग तय समय में काम पूरा करता है, तो क्षेत्रवासियों को लंबे समय बाद सुरक्षित और सुगम आवागमन की बड़ी राहत मिल सकती है।
विज्ञापन
सड़क की स्थिति को लेकर बिलासपुर सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू और कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा कर निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग बिलासपुर ने 20 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक इस मार्ग पर भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया है।
विज्ञापन
प्रतिबंध लागू होने के बाद जीपीएम जिला प्रशासन ने भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय किया है। अब पेंड्रा से रतनपुर और बिलासपुर की ओर जाने वाले भारी वाहनों को पेंड्रा-कोटमी-पसान-कटघोरा-पाली होते हुए रतनपुर भेजा जा रहा है। इससे वाहनों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, लेकिन माना जा रहा है कि भारी वाहनों का दबाव कम होने से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत में तेजी आएगी।
विज्ञापन
सड़क की खराब हालत का असर यात्री बसों पर भी पड़ा है। कई बस सेवाएं बंद हो गई हैं, जबकि कुछ बसों को वैकल्पिक मार्ग से रतनपुर और बिलासपुर की ओर भेजा जा रहा है। इससे यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक लंबे समय से गड्ढों और अधूरे निर्माण के कारण इस मार्ग पर सफर मुश्किल बना हुआ है। ऐसे में भारी वाहनों पर प्रतिबंध से सड़क सुधार की उम्मीद बढ़ी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 30 सितंबर तक निर्माण और मरम्मत का काम निर्धारित गति से पूरा हो पाएगा। यदि विभाग तय समय में काम पूरा करता है, तो क्षेत्रवासियों को लंबे समय बाद सुरक्षित और सुगम आवागमन की बड़ी राहत मिल सकती है।