छत्तीसगढ़ के स्पेशल डीजी आरके विज को दोबारा हुआ कोरोना, पूछा- कोई बताए मुझे फिर क्यों हुआ संक्रमण
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय में स्पेशल डीजीपी राजेंद्र कुमार विज कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे। कोरोना से संक्रमण के बाद उनका इलाज हुआ और उन्होंने वो सभी उपाय किए जो मानक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। लेकिन वो फिर से कोरोना से संक्रमित हो गए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर कहां चूक हो गई कि वो दोबारा इस घातक वायरस से संक्रमित हो गए।
आईपीएस विज ने सोशल मीडिया ट्विटर पर अपना दर्द बयां किया और लिखा, "कोई बताएगा मुझे दोबारा कोविड क्यों हुआ? मैंने तो कोई लापरवाही भी नहीं की। तीसरा दिन है और 99-100 डिग्री तापमान भी। अकेला पड़ा हूं बेचारा। जल्दी ठीक करो सब मिलकर भाई।" उन्होंने लोगों से अपने लिए दुआएं भी मांगी।
कोई बताएगा मुझे दुबारा covid क्यों हुआ? मैने तो कोई लापरवाही भी नही की। तीसरा दिन है और 99-100 डिग्री तापमान भी। अकेला पड़ा हूं बेचारा। जल्दी ठीक करो सब मिलकर भाई । 😊
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good wishes needed.#Covid_19 pic.twitter.com/eVZ6TTs3E3 — RK Vij, IPS (@ipsvijrk) October 6, 2020
इस उदाहरण से यह समझा जा सकता है कि एक बार पीड़ित होकर ठीक हो गए मरीज पर भी कोरोना दोबारा अपना कहर बरपा सकता है। ऐसे में लोग इस बात से चिंतित हैं कि वे क्या सावधानी बरतें जिससे वे कोरोना के संक्रमण से बच सकते हैं।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण से दुनियाभर के लोग परेशान हैं और डरे हुए हैं। अब तक तीन करोड़ 59 लाख से अधिक लोग इस वायरस की चपेट में आकर संक्रमित हो चुके हैं जबकि साढ़े दस लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस जानलेवा वायरस के प्रकोप से बचने के लिए वैक्सीन बनाई जा रही है, जिसका इंतजार पूरी दुनिया को है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस अधानोम ने एक बड़ा एलान किया है कि कोरोना वैक्सीन कब तक तैयार हो सकती है।
क्या वैक्सीन आने पर सब सामान्य हो जाएगा?
लेकिन अगर आपको लगता है कि कोरोना की वैक्सीन आने के बाद सब कुछ एकदम से सामान्य हो जाएगा, तो शायद आपका सोचना गलत हो सकता है। प्रमुख वैज्ञानिकों ने इसे लेकर चेतावनी दी है। वैक्सीन को एक ऐसे उपाय के रूप में देखा जा रहा है, जिसके आते ही कोविड-19 महामारी खत्म हो जाएगी।
जबकि, रॉयल सोसायटी के शोधकर्ताओं ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि वैक्सीन से क्या होगा और क्या हो सकता है, इसे लेकर हमें तार्किक और व्यावहारिक होने की जरूरत है। वैज्ञानिकों का कहना है कि टीका जब भी आए, उसे लोगों तक ले जाने में कम से कम एक साल तक का समय लग सकता है। ऐसे में आवश्यकता है कि कोरोना वायरस के कारण जिन प्रतिबंधों को लागू किया गया है, उन्हें धीरे-धीरे हटाया जाए।
वैक्सीन को लेकर चल रहे प्रयोगों की बात करें, तो दुनियाभर में करीब 200 वैक्सीन प्रोजेक्ट चल रहे हैं। कई प्रारंभिक दौर में हैं, तो कई क्लीनिकल ट्रायल के लिए तैयार हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन के नेशनल हार्ट एंड लंग इंस्टीट्यूट के डॉ. फियोना कुली के मुताबिक, 'वैक्सीन के बारे में जानकर हमारे मन में उम्मीद पैदा होती है कि महामारी समाप्त हो जाएगी, लेकिन हमें इस बात को भी नहीं भूलना चाहिए कि वैक्सीन के विकास में कई बार विफलता का मुंह देखना पड़ा है।'
'यह एक लंबी प्रक्रिया होगी'
ब्रिटेन सरकार के वैज्ञानिक सलाहकारों समेत तमाम लोगों को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक टीका तैयार कर लिया जाएगा और इसके बाद बड़े पैमाने पर टेस्ट किए जा सकेंगे। लेकिन वहीं दूसरी ओर रॉयल सोसायटी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यह एक लंबी प्रक्रिया होगी। इंपीरियल कॉलेज लंदन में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रमुख प्रोफेसर निलय शाह का कहना है, 'अगर वैक्सीन उपलब्ध हो भी जाती है, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि एक महीने के भीतर ही हर किसी को टीका लग जाएगा। इसमें छह महीने भी लग सकते हैं, नौ महीने भी और शायद एक साल भी। इस बात का तो सवाल ही नहीं उठता कि मार्च तक जन-जीवन अचानक से बिल्कुल पहले की तरह सामान्य हो जाएगा।'
कई सवालों के अब तक नहीं मिले जवाब
इंपीरियल कॉलेज लंदन में इम्यूनोलॉजी के प्रमुख प्रोफेसर चार्ल्स बांगम का कहना है, 'हम वाकई ये नहीं जानते हैं कि कोई टीका कब तक तैयार हो जाएगा, यह भी नहीं जानते कि यह कितना प्रभावी होगा और ना तो यही बता सकते हैं कि यह कब तक हर किसी को उपलब्ध हो सकेगा।' वो आगे कहते हैं, 'अगर यह प्रभावी हुआ भी, तो इस बात की संभावना कम है कि तुरंत ही सब कुछ पहले की तरह हो जाएगा।'
दुनिया में हर 10 में से एक व्यक्ति हो सकता है कोरोना संक्रमित
इससे पहले हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना के संक्रमण को लेकर एक डराने वाला खुलासा किया है। दरअसल, स्विट्जरलैंड के जेनेवा स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुख्यालय में संगठन से जुड़े नेताओं की एक विशेष बैठक में डब्ल्यूएचओ ने कहा कि हो सकता है कि दुनिया में हर 10 में से एक व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हुआ हो। संगठन ने कहा कि कोरोना संक्रमण का असली आंकड़ा 80 करोड़ के करीब हो सकता है।
दोबारा संक्रमण पर WHO ने की कोई गाइडलाइन नहीं
विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड की बैठक में टेड्रोस अधानोम ने कहा कि हमें कोरोना वैक्सीन की जरूरत होगी और उम्मीद है कि इस साल के अंत तक हमें एक वैक्सीन मिल सकती है। उन्होंने वैक्सीन के उपलब्ध होने पर समान रूप से उसके वितरण को सुनिश्चित करने के लिए सभी नेताओं के बीच एकजुटता दिखाने का आह्वान किया। लेकिन डब्ल्यूएचओ ने इस बारे में कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं कि लोगों को क्या उपाय करने चाहिए, ताकि वे कोविड-19 संक्रमण का दोबारा शिकार न बनें।