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छत्तीसगढ़: अंबिकापुर में रसोइये पर गर्म खाना फेंककर 6 अपचारी बालक फरार, दो पकड़े गए
Tue, 13 Oct 2026 02:15 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 13 Oct 2026 02:15 PM IST
सार
अंबिकापुर में प्लेस ऑफ सेफ्टी से छह अपचारी बालक फरार हो गए। भोजन के दौरान रसोइये पर गर्म खाना फेंककर सुरक्षा गार्ड को कमरे में बंद किया। दो बालक पकड़े गए, जबकि चार की तलाश जारी है। बार-बार हो रही घटनाओं से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे।
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दो अपचारी बालक हिरासत में
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में गांधीनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कन्या परिसर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी से बीती रात छह अपचारी बालक फरार हो गए। बालकों ने भोजन के दौरान रसोइये पर गर्म खाना फेंक दिया और ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्ड को कमरे में बंद कर दिया। इस घटना के बाद दो अपचारी बालकों को पकड़ लिया गया है, जबकि चार अन्य बालकों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
यह घटना रात में हुई, जब अपचारी बालकों को भोजन कराने के लिए बैरक से बाहर निकाला गया था। उसी समय बालकों ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया और वारदात को अंजाम देकर मौके से भाग निकले। घटना के तुरंत बाद संस्था में हड़कंप मच गया और पुलिस को सूचना दी गई।
दो अपचारी पकड़ाए, चार की तलाश जारी
भागने की कोशिश के दौरान दो अपचारी बालक चोटिल हो गए। इनमें से एक बालक के पैर में गंभीर चोट आई, जिससे वह अधिक दूर नहीं जा सका और लंगड़ाते हुए स्वयं वापस लौट आया। दूसरे बालक के भागते समय गिरने से सिर में चोट लग गई, जिसे पुलिस ने पकड़कर संस्था प्रबंधन को सौंप दिया। अन्य चार फरार बालकों की खोजबीन के लिए गांधीनगर थाना पुलिस ने रात में ही रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य संभावित ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक फरार चारों बालकों का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
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हत्या और चोरी के मामलों में थे बंद
पुलिस के अनुसार, फरार हुए सभी अपचारी बालकों की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच है। इन बालकों के खिलाफ हत्या और चोरी जैसे गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। पुलिस प्रशासन की प्राथमिक मंशा फरार बालकों को जल्द खोजकर सुरक्षित वापस लाने की है।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
कन्या परिसर मार्ग पर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी और बाल संप्रेक्षण गृह से पहले भी बालकों के भागने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इससे पूर्व फरवरी माह में 15 अपचारी बालक गार्ड पर हमला करके भागे थे, जिनमें से पांच को पकड़ा गया था। जून माह में 11 बालक खिड़की उखाड़कर और जुलाई में 13 बालक पुराना दरवाजा तोड़कर फरार हुए थे। इसके अलावा टॉयलेट का रोशनदान तोड़कर भी तीन बालक भाग चुके हैं।
बार-बार हो रही इन घटनाओं के कारण पूर्व में संस्था के अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया था। वर्तमान में यह संस्थान आरक्षकों के भरोसे संचालित हो रहा है। सरगुजा कलेक्टर ने भी सुरक्षा बढ़ाने और फेरबदल के निर्देश दिए थे, लेकिन इस ताजी घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर पुनः प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
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यह घटना रात में हुई, जब अपचारी बालकों को भोजन कराने के लिए बैरक से बाहर निकाला गया था। उसी समय बालकों ने अचानक हंगामा शुरू कर दिया और वारदात को अंजाम देकर मौके से भाग निकले। घटना के तुरंत बाद संस्था में हड़कंप मच गया और पुलिस को सूचना दी गई।
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दो अपचारी पकड़ाए, चार की तलाश जारी
भागने की कोशिश के दौरान दो अपचारी बालक चोटिल हो गए। इनमें से एक बालक के पैर में गंभीर चोट आई, जिससे वह अधिक दूर नहीं जा सका और लंगड़ाते हुए स्वयं वापस लौट आया। दूसरे बालक के भागते समय गिरने से सिर में चोट लग गई, जिसे पुलिस ने पकड़कर संस्था प्रबंधन को सौंप दिया। अन्य चार फरार बालकों की खोजबीन के लिए गांधीनगर थाना पुलिस ने रात में ही रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य संभावित ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक फरार चारों बालकों का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
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हत्या और चोरी के मामलों में थे बंद
पुलिस के अनुसार, फरार हुए सभी अपचारी बालकों की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच है। इन बालकों के खिलाफ हत्या और चोरी जैसे गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। पुलिस प्रशासन की प्राथमिक मंशा फरार बालकों को जल्द खोजकर सुरक्षित वापस लाने की है।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
कन्या परिसर मार्ग पर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी और बाल संप्रेक्षण गृह से पहले भी बालकों के भागने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इससे पूर्व फरवरी माह में 15 अपचारी बालक गार्ड पर हमला करके भागे थे, जिनमें से पांच को पकड़ा गया था। जून माह में 11 बालक खिड़की उखाड़कर और जुलाई में 13 बालक पुराना दरवाजा तोड़कर फरार हुए थे। इसके अलावा टॉयलेट का रोशनदान तोड़कर भी तीन बालक भाग चुके हैं।
बार-बार हो रही इन घटनाओं के कारण पूर्व में संस्था के अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया था। वर्तमान में यह संस्थान आरक्षकों के भरोसे संचालित हो रहा है। सरगुजा कलेक्टर ने भी सुरक्षा बढ़ाने और फेरबदल के निर्देश दिए थे, लेकिन इस ताजी घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर पुनः प्रश्नचिह्न लगा दिया है।