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एसआईआर : 19.13 लाख मतदाताओं की जानकारी जुटाने फिर घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ
Mon, 05 Oct 2026 06:02 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Mon, 05 Oct 2026 06:02 PM IST
सार
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत छूटे हुए मतदाताओं की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया एक बार फिर गति पकड़ने जा रही है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत छूटे हुए मतदाताओं की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया एक बार फिर गति पकड़ने जा रही है। एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं के घरों पर सत्यापन के समय कोई सदस्य उपस्थित नहीं मिला था अथवा जो लोग किसी अन्य स्थान पर चले गए थे, उनकी सही जानकारी जुटाने के लिए बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) दोबारा घर-घर पहुंचेंगे।
प्रदेश में ऐसे लगभग 19.13 लाख मतदाताओं को चिह्नित किया गया है। बीएलओ इन सभी मतदाताओं के पते पर जाकर सत्यापित करेंगे कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में उसी पते पर निवास कर रहा है अथवा नहीं। साथ ही, मतदाता सूची में दर्ज समस्त जानकारियों की भी विस्तार से जांच की जाएगी।
लाखों नाम सूची से बाहर
छत्तीसगढ़ में एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन तंत्र ने बड़े पैमाने पर मतदाता सूचियों की पड़ताल की थी। इस पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। जारी आंकड़ों के मुताबिक इस प्रक्रिया के बाद राज्य भर में करीब 24.99 लाख नाम मतदाता सूची से बाहर हुए थे। सूची से बाहर किए गए इन नामों में 6 लाख से अधिक मतदाता मृत पाए गए थे। इसके अलावा लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले, दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके और अन्य अपात्र श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं की भी पहचान कर उन्हें सूची से पृथक किया गया था।
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पुरानी और नई सूची का मिलान
घर-घर जाकर सत्यापन करने के इस अभियान में बीएलओ अधिकारी पुरानी और नई मतदाता सूची का आपस में मिलान करेंगे। ये अधिकारी एसआईआर से पहले तैयार की गई मतदाता सूची तथा एसआईआर के बाद की संशोधित सूची का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य उन मतदाताओं की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करना है, जो पुनरीक्षण के दौरान अपने पते पर अनुपस्थित मिले थे अथवा जिनके दूसरे स्थानों पर चले जाने की जानकारी सामने आई थी। बीएलओ मौके पर पहुंचकर प्रत्येक मतदाता की भौतिक स्थिति का सही आकलन प्रस्तुत करेंगे।
पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने पर जोर
बीएलओ द्वारा किए जाने वाले इस दोबारा सत्यापन से उन सभी मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिनके संबंध में पहले चरण में पूरी जानकारी हासिल नहीं हो सकी थी। इस प्रशासनिक प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के सभी वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में पूरी तरह सुरक्षित और दर्ज बने रहें। इसके साथ ही, मतदाता सूची में मौजूद किसी भी प्रकार के गलत, दोहरे अथवा अपात्र नामों की सटीक पहचान करके उन्हें नियमानुसार हटाने की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।
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प्रदेश में ऐसे लगभग 19.13 लाख मतदाताओं को चिह्नित किया गया है। बीएलओ इन सभी मतदाताओं के पते पर जाकर सत्यापित करेंगे कि संबंधित व्यक्ति वास्तव में उसी पते पर निवास कर रहा है अथवा नहीं। साथ ही, मतदाता सूची में दर्ज समस्त जानकारियों की भी विस्तार से जांच की जाएगी।
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लाखों नाम सूची से बाहर
छत्तीसगढ़ में एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान निर्वाचन तंत्र ने बड़े पैमाने पर मतदाता सूचियों की पड़ताल की थी। इस पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। जारी आंकड़ों के मुताबिक इस प्रक्रिया के बाद राज्य भर में करीब 24.99 लाख नाम मतदाता सूची से बाहर हुए थे। सूची से बाहर किए गए इन नामों में 6 लाख से अधिक मतदाता मृत पाए गए थे। इसके अलावा लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले, दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके और अन्य अपात्र श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं की भी पहचान कर उन्हें सूची से पृथक किया गया था।
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पुरानी और नई सूची का मिलान
घर-घर जाकर सत्यापन करने के इस अभियान में बीएलओ अधिकारी पुरानी और नई मतदाता सूची का आपस में मिलान करेंगे। ये अधिकारी एसआईआर से पहले तैयार की गई मतदाता सूची तथा एसआईआर के बाद की संशोधित सूची का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य उन मतदाताओं की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करना है, जो पुनरीक्षण के दौरान अपने पते पर अनुपस्थित मिले थे अथवा जिनके दूसरे स्थानों पर चले जाने की जानकारी सामने आई थी। बीएलओ मौके पर पहुंचकर प्रत्येक मतदाता की भौतिक स्थिति का सही आकलन प्रस्तुत करेंगे।
पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने पर जोर
बीएलओ द्वारा किए जाने वाले इस दोबारा सत्यापन से उन सभी मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है, जिनके संबंध में पहले चरण में पूरी जानकारी हासिल नहीं हो सकी थी। इस प्रशासनिक प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के सभी वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में पूरी तरह सुरक्षित और दर्ज बने रहें। इसके साथ ही, मतदाता सूची में मौजूद किसी भी प्रकार के गलत, दोहरे अथवा अपात्र नामों की सटीक पहचान करके उन्हें नियमानुसार हटाने की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।