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छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बनाएगी सरकार!

Wed, 29 Jan 2014 02:59 PM IST
Updated Wed, 29 Jan 2014 02:59 PM IST
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छत्तीसगढ़ में लगातार तीसरी बार सत्ता से बाहर रहने के बाद कांग्रेस पार्टी अब छाया मंत्रिमंडल बनाने की तैयारी कर रही है। ये छाया मंत्रिमंडल राज्य की भाजपा सरकार की निगरानी करेगा और भ्रष्टाचार रोकने के लिये हर संभव कोशिश करेगा।

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राज्य की विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव का कहना है कि इस छाया मंत्रिमंडल का असली उद्देश्य सत्ता पक्ष की निगरानी के लिये कार्यों का बंटवारा करना है। वहीं विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ऐसी किसी भी छाया मंत्रिमंडल की उपयोगिता पर ही सवाल उठाए हैं।
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दूसरी ओर संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के छाया मंत्रिमंडल की सफलता हमेशा से ही संदिग्ध रही है क्योंकि इस छाया मंत्रिमंडल की न तो वैधानिकता होती है और न ही किसी तरह का विशेषाधिकार। ऐसे में यह प्रतिपक्ष से कहीं बड़ी भूमिका नहीं निभा पाएगा।

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क्या है छाया मंत्रिमंडल?

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छाया मंत्रिमंडल के तहत मुख्य विपक्षी दल अपने सदस्यों को उसी तरह विभिन्न विभागों का प्रभार देता है। असल में छाया मंत्रिमंडल या शैडो कैबिनेट की शुरुआत ब्रिटेन में 1937 में हुई थी, जिसे ऑफिशियल लॉयल अपोजिशन का नाम दिया गया था। आज की तारीख़ में कम से कम दो दर्जन ऐसे देश हैं, जहां छाया मंत्रिमंडल अपने अस्तित्व में है।

संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में भी यह व्यवस्था 1952 में ही शुरु हो जाती। लेकिन किसी दल को इतनी सीटें नहीं मिली थीं कि उसे छाया मंत्रिमंडल का दर्जा दिया जा सके।

भारत में भी हुईं थीं कोशिशें

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1977 में पहली बार नेता प्रतिपक्ष बनी इंदिरा गांधी को केंद्रीय मंत्री का दर्जा दिया गया और उसी के समान वेतन व दूसरी सुविधाएं देने की परंपरा शुरू की गई। हालांकि नेता प्रतिपक्ष के अलावा उनकी टीम के दूसरे सदस्यों को ऐसा महत्व नहीं दिया गया। यह परंपरा अब भी जारी है।

देश में राजस्थान, हरियाणा जैसे राज्यों में भी छाया मंत्रिमंडल बनाने की कोशिशें हुई थीं लेकिन विपक्षी दल इस छाया मंत्रिमंडल को चला पाने में विफल रहे। छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने छाया मंत्रिमंडल बनाने की कवायद शुरू कर दी है।

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भूपेश बघेल का कहना है कि राज्य में जिस तरीके से भाजपा सरकार काम कर रही है, यहां हर कहीं भ्रष्टाचार नज़र आ रहा है। भूपेश बघेल की योजना है कि कांग्रेस के अलग-अलग विधायकों को सत्तारुढ़ सरकार के अलग-अलग विभाग के मंत्रियों पर पूरी तरह से नज़र रखने और उनकी एक-एक योजना और कार्य की पूरी जानकारी रखने का जिम्मा दिया जाएगा।

भूपेश बघेल के अनुसार कांग्रेस के छाया मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ कांग्रेस पदाधिकारियों की टीम भी उनकी मदद के लिये रहेगी। छाया मंत्री सत्तारुढ़ सरकार के काम-काज को जनता के सामने ले जाने का भी काम करेंगे।

राज्य में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव कहते हैं, "छाया मंत्रिमंडल के सहारे हमारी कोशिश असल में सरकार के मंत्रियों पर नज़र रखने की है। हम अपने विधायकों की अलग-अलग विभागों की जवाबदेही तय करना चाहते हैं, जिससे एक बेहतर प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई जा सके।"

क्या इससे पड़ेगा कुछ फर्क?

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सिंह देव का कहना है कि उन्होंने छाया मंत्रिमंडल का प्रस्ताव आलाकमान को भेज दिया है और जल्दी ही छाया मंत्रिमंडल धरातल पर काम करना शुरु कर देगा। लेकिन छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल इस तरह के छाया मंत्रिमंडल की कोई खास भूमिका नहीं देखते।

गौरीशंकर अग्रवाल कहते हैं, "आप अपने घर में कुछ भी कर लें, किसी को कुछ भी बना दें, उससे विधानसभा की कार्रवाई में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।"

संवैधानिक मामलों के जानकार भी छाया मंत्रिमंडल को लेकर बहुत आशान्वित नहीं हैं। राज्य के वरिष्ठ वकील और संविधान विशेषज्ञ कनक तिवारी कहते हैं कि सरकार के बहुत सारे नीतिगत फैसले ऐसे होते हैं, जिनकी गोपनीयता ज़रुरी होती है और मंत्री इसकी संवैधानिक शपथ लेते हैं।

कनक तिवारी कहते हैं, "कई बार अपने नीतिगत निर्णयों की जानकारी सार्वजनिक करने के बजाय उन पर अमल का काम सरकार कर सकती है। ऐसे में अगर छाया मंत्रिमंडल को सरकार की सोच का ही पता नहीं हो तो भला वह उसके समर्थन या विरोध का काम कैसे कर पाएगी? ऐसी ही स्थिति प्रशासनिक निर्णयों को लेकर भी पैदा होगी। बेहतर तो ये हो कि विपक्षी कांग्रेस के विधायक धरातल पर स्थितियों को देखें और उनमें सुधार की कोशिश करें।"

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