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Chhattisgarh: ग्रामीण महिलाएं जैविक खेती से बन रहीं आत्मनिर्भर, बोलीं- घर तक सीमित बल्कि खेत हमारी पहचान

Fri, 02 May 2025 03:53 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Fri, 02 May 2025 03:53 PM IST
सार

स्व-सहायता समूह की इन महिलाओं ने उद्यानिकी विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से 50-50 डिसमिल भूमि पर लौकी, करेला और एक-एक एकड़ में मिर्ची और टमाटर की जैविक खेती कर रही हैं।

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Rural women are becoming self-reliant through organic farming in Chhattisgarh
स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने की सब्जियों की खेती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के इस छोटे से गांव की 20 महिलाएं जैविक खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूह की इन महिलाओं ने उद्यानिकी विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से 50-50 डिसमिल भूमि पर लौकी, करेला और एक-एक एकड़ में मिर्ची और टमाटर की जैविक खेती कर रही हैं। बिना किसी रासायनिक खाद और कीटनाशक के उगाई गई। 
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जिले की कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में यह प्रयास शुरू हुआ। उन्होंने विगत दिनों स्वयं खेतों का निरीक्षण किया था और महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि जैविक खेती महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर है। कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रशासन ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय के सशक्त अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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स्व-सहायता समूह की महिलाएं न केवल जैविक फसल उगा रही हैं, बल्कि उन्हें थोक मंडियों और फुटकर विक्रेताओं को बेचकर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। अभी तक 15-15 क्विंटल लौकी और करेला बेच चुके हैं, जिससे उन्हें 35 हजार रुपए की आमदनी हुई है।
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उद्यानिकी विभाग के अधिकारी विनय त्रिपाठी ने बताया कि इन समूहों को 1690 हाईब्रिड पौधा दिया गया था, इसके अलावा फेसिंग, मल्चिंग, ड्रिप सिस्टम, जैविक खाद, दवाई आदि उपलब्ध कराया गया था। उन्होंने कहा कि इस पहल ने इनका आत्मविश्वास बढ़ाया है और घर की आर्थिक स्थिति में सुधार लाया है। एक महिला किसान ने कहा कि अब हम खुद को गर्व से किसान कहती हैं। हमारी मेहनत अब आमदनी बढ़ रही है।
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