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तीन पहाड़ियों के बीच स्थित जलाशय: सैलानियों के लिए नाव की सवारी, प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन का अद्भुत केंद्र
Wed, 08 Jan 2025 02:16 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 08 Jan 2025 02:16 PM IST
सार
तीन पहाड़ियों के मध्य मनियारी नदी पर निर्मित यह जलाशय अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। यह छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में है। जिसे राजीव गांधी जलाशय या खुड़िया जलाशय भी कहा जाता है।
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खुड़िया जलाशय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तीन पहाड़ियों के मध्य मनियारी नदी पर निर्मित यह जलाशय अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। यह छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में है। जिसे राजीव गांधी जलाशय या खुड़िया जलाशय भी कहा जाता है। यह पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
राजीव गांधी जलाशय की विशेषता इसकी विशालता और चारों ओर फैली हरियाली है। पहाड़ियों से घिरा यह स्थल दूर से किसी समुद्र का आभास कराता है। सैलानियों के लिए नाव की सवारी यहां का मुख्य आकर्षण है, जहां वे पानी के बीचों-बीच प्रकृति की गोद में समय बिता सकते हैं। वर्षा के मौसम में जलाशय और भी खूबसूरत हो जाता है, जब पहाड़ियों से गिरते जलप्रवाह और हरियाली का नजारा पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
यह जलाशय न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि इसका ऐतिहासिक और कृषि महत्व भी है। इसका निर्माण अंग्रेजी शासन काल में 1927 में कृषि के उद्देश्य से शुरू हुआ था और 1930 में इसे पूरा किया गया। इसका नाम बाद में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया। यह जलाशय आज भी स्थानीय किसानों के लिए एक मुख्य जल स्रोत है, जिससे वे अपनी कृषि भूमि की सिंचाई करते हैं।
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राजीव गांधी जलाशय के आसपास कई और पर्यटन स्थल हैं जो सैलानियों के अनुभव को और खास बना देते हैं। इनमें डोंगरी देवी मंदिर प्रमुख है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, पहाड़ियों और हरियाली से घिरा वातावरण ट्रेकिंग और पिकनिक के लिए भी आदर्श है। इस वर्ष नए साल के मौके पर हजारों पर्यटक राजीव गांधी जलाशय पहुंचे। जलाशय के साफ और शांत वातावरण, नाव की सवारी, और प्राकृतिक दृश्यों ने सभी को मोहित किया। पर्यटकों ने इस क्षेत्र की स्वच्छता और व्यवस्था की प्रशंसा की।
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राजीव गांधी जलाशय की विशेषता इसकी विशालता और चारों ओर फैली हरियाली है। पहाड़ियों से घिरा यह स्थल दूर से किसी समुद्र का आभास कराता है। सैलानियों के लिए नाव की सवारी यहां का मुख्य आकर्षण है, जहां वे पानी के बीचों-बीच प्रकृति की गोद में समय बिता सकते हैं। वर्षा के मौसम में जलाशय और भी खूबसूरत हो जाता है, जब पहाड़ियों से गिरते जलप्रवाह और हरियाली का नजारा पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
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यह जलाशय न केवल एक पर्यटन स्थल है, बल्कि इसका ऐतिहासिक और कृषि महत्व भी है। इसका निर्माण अंग्रेजी शासन काल में 1927 में कृषि के उद्देश्य से शुरू हुआ था और 1930 में इसे पूरा किया गया। इसका नाम बाद में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर रखा गया। यह जलाशय आज भी स्थानीय किसानों के लिए एक मुख्य जल स्रोत है, जिससे वे अपनी कृषि भूमि की सिंचाई करते हैं।
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राजीव गांधी जलाशय के आसपास कई और पर्यटन स्थल हैं जो सैलानियों के अनुभव को और खास बना देते हैं। इनमें डोंगरी देवी मंदिर प्रमुख है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, पहाड़ियों और हरियाली से घिरा वातावरण ट्रेकिंग और पिकनिक के लिए भी आदर्श है। इस वर्ष नए साल के मौके पर हजारों पर्यटक राजीव गांधी जलाशय पहुंचे। जलाशय के साफ और शांत वातावरण, नाव की सवारी, और प्राकृतिक दृश्यों ने सभी को मोहित किया। पर्यटकों ने इस क्षेत्र की स्वच्छता और व्यवस्था की प्रशंसा की।