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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Ration received under Public Distribution System was cut in Gaurela Pendra District:

CG: ग्रामीणों के राशन में कटौती कर कोटेदार भर रहे अपना पेट, किराना दुकान से राशन खरीदने के लिए मजबूर हितग्राही

Thu, 06 Jun 2024 12:59 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला पेंड्रा मरवाही Published by: श्याम जी. Updated Thu, 06 Jun 2024 12:59 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन में कटौती का मामला सामने आया है। यहां हितग्राहियों को मिलने वाले राशन में दुकान संचालक द्वारा कटौती की जा रही है। ऐसे में मजबूर होकर उन्हें किराना दुकान से राशन खरीदना पड़ रहा है। 

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Ration received under Public Distribution System was cut in Gaurela Pendra District:
ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में शासन की महत्वाकांक्षी योजना पर कैसे पलीता लगाया जा रहा है, इसका नजारा देखने को मिला है। गरीबों को मुफ्त में मिलने वाले राशन पर डाका डाला जा रहा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला राशन ग्रामीणों को कम तो कईयों को महीनों से नहीं मिला है। अलाम यह है कि ग्रामीण करें तो करें क्या। वे बाजार से चावल खरीदकर खाने को मजबूर हैं। वहीं, प्रशासन मामले में जल्द कार्रवाई किये जाने की बात कह रहा है।

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पेंड्रा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जाटादेवरी के आश्रित गांव हर्राडीह में रहने वाले ग्रामीणों को पिछले अप्रैल माह में शासन के द्वारा एक साथ 70 किलो चावल देना था, लेकिन गांव में राशन दुकान का संचालन करने वाली वैष्णवी महिला स्वं. सहायता समूह के द्वारा गरीब हितग्राहियों को 70 किलो चावल नहीं दिया गया। राशन लेने पहुंचे ग्रामीणों को सेल्समेन के द्वारा सिर्फ 50 किलो चावल देते हुए कहा दिया गया कि उनके नाम से उनके पास सिर्फ 50 किलो चावल अभी आया है। जबकि 20 किलो बचा चावल उन्हें बाद में मिलेगा।
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हितग्राहियों के द्वारा बचा हुआ 20 किलोग्राम चावल के लिए कई बार राशन दुकान जाने के बाद भी उन्हें उनका बचा हुआ चावल नहीं दिया गया। बस आज मिलेगा कल मिल जाएगा कहकर टाल दिया जाता। यही नहीं कुछ हितग्राहियों का कहना है कि उन्हें राशन दुकान संचालक के द्वारा पिछले 3 से 4 माह का न चावल न ही शक्कर न ही चना मिला है। बार-बार दुकान जाने के बाद भी उन्हें राशन नहीं मिला, जबकि राशन दुकान संचालक के द्वारा बड़े ही चालाकी से गरीब हितग्राहियों के राशन कार्ड में राशन दिया जाना बतालाकर माह का राशन चढ़ा दिया जाता रहा।
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कुछ ग्रामीणों की मानें तो उन्हें तो 4-4 माह होने के बाद भी शक्कर और चना दुकानदार के द्वारा नहीं दिया गया। ग्रामीणों को राशन नहीं मिलने के चलते काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। स्थिति यह है कि उन्हें अपना और अपने परिवार के लोगों का पेट भरने के लिए गांव के किराना दुकानों से चावल खरीदना पड़ रहा है। वहीं,  ग्रामीणों और ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की मानें तो मामले की शिकायत उनके द्वारा उच्चाधिकारियों को भी की गई, लेकिन वहां से भी कोई समाधान नही हुआ।

खाद्य अधिकारी श्वेता अग्रवाल ने बताया कि मामले की शिकायत के बाद उनके द्वारा संबंधित खाद्य अधिकारी को मौके पर भेजकर जांच करवाई गई है। मामले में ग्रामीणों की शिकायत भी सही पाई गई है। जांच प्रतिवेदन बनाकर अग्रिम कार्रवाई के लिए अमित बेक एसडीएम पेंड्रा रोड को दे दिया गया है। जल्द ही मामले में कार्रवाई की जाएगी।।


सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गरीब हितग्राहियों को मुफ्त में मिलने वाले राशन में हेराफेरी का यह कोई नया मामला नहीं है। हेराफेरी करने वाले दुकान संचालकों के द्वारा ऐसा करना कहीं न कहीं इनके ऊपर होने वाली कार्रवाई का डर बिल्कुल भी नहीं होता, जिसके चलते ये लोग गरीबों के हक में डाका डालने में नहीं चूकते। जरूरत है ऐसे दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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