{"_id":"6a7b3fa18867b938b002e038","slug":"posting-objectionable-pictures-created-using-ai-on-social-media-is-a-cyber-crime-women-s-commission-warns-2026-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chhattisgarh: एआई से बनी आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालना साइबर अपराध, महिला आयोग ने किया आगाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chhattisgarh: एआई से बनी आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालना साइबर अपराध, महिला आयोग ने किया आगाह
Tue, 11 Aug 2026 08:59 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 11 Aug 2026 08:59 PM IST
सार
राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान AI से महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का मामला सामने आया। इसे गंभीर साइबर अपराध मानते हुए मामले को अगली सुनवाई के लिए रखा और शिकायत करने की अपील की।
विज्ञापन
छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें बनाकर प्रसारित करने के बढ़ते मामलों को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने गंभीर चिंता जताई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से किसी महिला की आपत्तिजनक तस्वीर तैयार कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करना गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में आता है। पीड़ित महिला ऐसे मामलों में तत्काल पुलिस से शिकायत कर एफआईआर दर्ज करा सकती है।
रायपुर स्थित राज्य महिला आयोग कार्यालय में मंगलवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय द्वितीय जनसुनवाई में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की गई। अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्य दीपिका शोरी की मौजूदगी में कुल 30 प्रकरण रखे गए। इनमें 17 मामलों पर सुनवाई हुई, जबकि 5 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया।
जनसुनवाई के दौरान एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि कुछ लोगों द्वारा एआई तकनीक का इस्तेमाल कर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार की गईं और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने इसे साइबर अपराध से जुड़ा मामला माना। संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई तय की गई है।
विज्ञापन
आयोग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की तस्वीरों और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत बताई। महिलाओं से अपील की गई कि ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी तस्वीर, मॉर्फ्ड फोटो या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने की स्थिति में चुप न रहें और तत्काल कानूनी सहायता लें।
जनसुनवाई में कुछ महिलाओं ने अपने मामलों में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की शिकायत भी आयोग के समक्ष रखी। आयोग ने ऐसे प्रकरणों की जांच और आवश्यक पुनर्विचार की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की बात कही। वहीं पति-पत्नी के विवाद और प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता होने की जानकारी सामने आई। आयोग ने मामले को निगरानी में रखने का निर्णय लिया, ताकि आगे किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
सुनवाई के दौरान संपत्ति विवाद, पारिवारिक कलह और प्रताड़ना से जुड़े मामले भी सामने आए। आयोग ने संबंधित महिलाओं को विधिक सहायता लेने, विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त करने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने की सलाह दी।
अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने कहा कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों के स्वरूप में भी बदलाव आया है। ऐसे में महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।
आयोग ने महिलाओं से अपील की कि सोशल मीडिया पर होने वाले किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार की स्थिति में संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखें और बिना देरी किए पुलिस या सक्षम कानूनी संस्था में शिकायत दर्ज कराएं।
विज्ञापन
रायपुर स्थित राज्य महिला आयोग कार्यालय में मंगलवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय द्वितीय जनसुनवाई में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की गई। अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्य दीपिका शोरी की मौजूदगी में कुल 30 प्रकरण रखे गए। इनमें 17 मामलों पर सुनवाई हुई, जबकि 5 प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया।
विज्ञापन
जनसुनवाई के दौरान एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि कुछ लोगों द्वारा एआई तकनीक का इस्तेमाल कर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार की गईं और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने इसे साइबर अपराध से जुड़ा मामला माना। संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए मामले की अगली सुनवाई तय की गई है।
विज्ञापन
आयोग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की तस्वीरों और व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत बताई। महिलाओं से अपील की गई कि ऑनलाइन उत्पीड़न, फर्जी तस्वीर, मॉर्फ्ड फोटो या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित किए जाने की स्थिति में चुप न रहें और तत्काल कानूनी सहायता लें।
जनसुनवाई में कुछ महिलाओं ने अपने मामलों में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की शिकायत भी आयोग के समक्ष रखी। आयोग ने ऐसे प्रकरणों की जांच और आवश्यक पुनर्विचार की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की बात कही। वहीं पति-पत्नी के विवाद और प्रताड़ना से जुड़े एक मामले में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता होने की जानकारी सामने आई। आयोग ने मामले को निगरानी में रखने का निर्णय लिया, ताकि आगे किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
सुनवाई के दौरान संपत्ति विवाद, पारिवारिक कलह और प्रताड़ना से जुड़े मामले भी सामने आए। आयोग ने संबंधित महिलाओं को विधिक सहायता लेने, विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त करने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने की सलाह दी।
अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने कहा कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों के स्वरूप में भी बदलाव आया है। ऐसे में महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।
आयोग ने महिलाओं से अपील की कि सोशल मीडिया पर होने वाले किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार की स्थिति में संबंधित साक्ष्यों को सुरक्षित रखें और बिना देरी किए पुलिस या सक्षम कानूनी संस्था में शिकायत दर्ज कराएं।