{"_id":"6a05db2e520e7f83290603bb","slug":"new-strategy-prepared-to-protect-crops-from-weeds-3-day-meeting-concluded-at-raipur-agricultural-university-2026-05-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"CG News: फसलों को खरपतवार से बचाने नई रणनीति तैयार, रायपुर कृषि विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय बैठक संपन्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
CG News: फसलों को खरपतवार से बचाने नई रणनीति तैयार, रायपुर कृषि विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय बैठक संपन्न
Thu, 14 May 2026 07:54 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 14 May 2026 07:54 PM IST
सार
तीन दिनों तक चली इस बैठक में देशभर के कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने फसलों को खरपतवार से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए नई रणनीतियों पर चर्चा की।
विज्ञापन
रायपुर कृषि विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय बैठक संपन्न
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित अखिल भारतीय समन्वित खरपतवार प्रबंधन अनुसंधान परियोजना की 33वीं वार्षिक समीक्षा बैठक का समापन हो गया। तीन दिनों तक चली इस बैठक में देशभर के कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने फसलों को खरपतवार से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए नई रणनीतियों पर चर्चा की।
बैठक के अंतिम दिन उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें आधुनिक खरपतवार नियंत्रण तकनीकों, कृषि उपयोगी उत्पादों और अनुसंधान आधारित समाधानों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाने और प्रभावी खरपतवार प्रबंधन उपायों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
समीक्षा बैठक के दौरान वैज्ञानिकों ने विभिन्न फसलों में खरपतवार के प्रभाव और उससे होने वाले नुकसान को कम करने के उपायों पर मंथन किया। साथ ही रासायनिक खरपतवारनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी, जल और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई गई। वैज्ञानिकों ने हानिकारक हर्बिसाइड के उपयोग को सीमित कर वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई।
विज्ञापन
यह तीन दिवसीय बैठक 12 से 14 मई 2026 तक आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (एनआरएम) ए.के. नायक की मौजूदगी में हुआ। बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की।
बैठक में देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के 17 प्रमुख केंद्रों और 7 स्वयंसेवी केंद्रों से जुड़े करीब 100 वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसके अलावा आईसीएआर संस्थानों और हर्बिसाइड उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हुए। समीक्षा बैठक में वर्ष 2025-26 के अनुसंधान कार्यों की समीक्षा करते हुए आगामी दो वर्षों की तकनीकी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया।
विज्ञापन
बैठक के अंतिम दिन उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें आधुनिक खरपतवार नियंत्रण तकनीकों, कृषि उपयोगी उत्पादों और अनुसंधान आधारित समाधानों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाने और प्रभावी खरपतवार प्रबंधन उपायों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
विज्ञापन
समीक्षा बैठक के दौरान वैज्ञानिकों ने विभिन्न फसलों में खरपतवार के प्रभाव और उससे होने वाले नुकसान को कम करने के उपायों पर मंथन किया। साथ ही रासायनिक खरपतवारनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी, जल और पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई गई। वैज्ञानिकों ने हानिकारक हर्बिसाइड के उपयोग को सीमित कर वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता बताई।
विज्ञापन
यह तीन दिवसीय बैठक 12 से 14 मई 2026 तक आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (एनआरएम) ए.के. नायक की मौजूदगी में हुआ। बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने की।
बैठक में देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के 17 प्रमुख केंद्रों और 7 स्वयंसेवी केंद्रों से जुड़े करीब 100 वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसके अलावा आईसीएआर संस्थानों और हर्बिसाइड उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ भी शामिल हुए। समीक्षा बैठक में वर्ष 2025-26 के अनुसंधान कार्यों की समीक्षा करते हुए आगामी दो वर्षों की तकनीकी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया।