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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Raipur: When tribals came to meet CM by taking arrows in their hands

रायपुर : जब हाथों में तीर-कमान लेकर सीएम से मिलने पहुंचे आदिवासी 

Fri, 14 Sep 2018 05:47 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Updated Fri, 14 Sep 2018 05:47 PM IST
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Raipur: When tribals came to meet CM by taking arrows in their hands
सांकेतिक चित्र

छत्तीसगढ़ में आगामी नवंबर को विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, लेकिन चुनाव से पहले ही राजधानी रायपुर में सैकड़ों कमार समाज के आदिवासी हाथों में तीर कमान, भाला आदि लेकर सीएम डॉ. रमन सिंह से मिलने पहुंच गए। हांलाकि कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने मामले में सक्रियता दिखाते हुए आदिवासियों को सीएम से मिलवाया और उनके आश्वासन के बाद आदिवासी वापस लौट गए। 

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राजधानी में शुक्रवार को अचानक सैंकड़ों कमार जनजाति के लोग हाथों में तीर-कमान और भाला लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करते नजर आए। राज्य सरकार तक जैसे ही आदिवासियों के रायपुर पहुंचने की खबर लगी तो आनन-फानन में कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप आदिवासियों को मनाने पहुंच गए। क्योंकि केदार कश्यप खुद आदिवासी समुदाय से आते हैं। 
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दरअसल बस्तर के कमार, भुजिया पिछड़ी जनजाति के लोगों की मांग है कि शासन द्वारा विशेष पिछड़ी जनजातियों को शासकीय सेवा में नियुक्ति दिए जाने वाले आदेश के तहत गैर कार्यपालिका तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी में जिला स्तरीय कैडर में ही 20 प्रतिशत नियुक्ति के साथ शासन के समस्त विभागों में मुख्य रूप से योग्यताधारी कमार युवक-युवतियों को नियुक्ति प्रदान की जाए।
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रातों-रात अपने जिलों से पैदल राजधानी पहुंचे कमार जनजाति के लोग मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मिलने की मांग करते हुए सीएम हाउस की तरफ बढ़ने लगे, तभी प्रशासन मुस्तैद हो गया और कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने मौके पर पहुंचकर आदिवासियों को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मिलवाया। मुख्यमंत्री से मांगें पूरी होने का आश्वासन मिलने के बाद आदिवासी वापस घर को लौट गए।


आपको बता दें कि कांकेर, कोंडागांव,धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद और बलौदाबाजार जिले से पैदल चलकर राजधानी पहुंचे लोगों में करीब पांच सौ महिलाएं भी शामिल थीं। छत्तीसगढ़ में नंबवर में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है, ऐसे में इस तरह के प्रदर्शन से सरकार की नींद उड़ना स्वाभाविक है। बहरहाल, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से आश्वासन मिलने के बाद आदिवासियों ने अपना प्रदर्शन तो रोक दिया, लेकिन मांगें पूरी न होने पर विधानसभा चुनाव में मजा चखाने की चुनौती जरूर दे दी है।

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