Raipur: तोता लाने वाले को मिलेगा 11 हजार रुपए का ईनाम, जानिए क्या है मामला
घनश्याम विश्वकर्मा ने बताया कि गुम हो चुके तोते को वे फाफाडीह के बाज़ार से तब लेकर आए थे जब उनके बच्चे छोटे थे। बच्चों ने जिद की थीं कि उन्हें खिलौना चाहिए बच्चों की जिद पर वो तोता ले आए थे।
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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के विकास विहार कालोनी में निवासरत घनश्याम विश्वकर्मा पेशे से मोटर मैकनिक हैं। वे इन दिनों अपने पालतू तोता के गुम हो जाने से परेशान हैं। दिन रात अपने तोते की खोजबीन कर रहे है। उन्होंने अखबार में तोते की गुम होने की सूचना भी दी है। उन्होंने इस तोते को खोजकर लाने वाले को 11 हजार रुपए का ईनाम देने की घोषणा की है।
घनश्याम विश्वकर्मा ने बताया कि गुम हो चुके तोते को वे फाफाडीह के बाज़ार से तब लेकर आए थे जब उनके बच्चे छोटे थे। बच्चों ने जिद की थीं कि उन्हें खिलौना चाहिए बच्चों की जिद के बाद उन्होंने सोचा कि वे बच्चों को कृत्रिम खिलौना नहीं देंगे। वे तोता ले आए और उसे पूरे घर पर विचरण करने के लिए खुला छोड़ दिया। तोता बहुत जल्द परिवार के सभी सदस्यों के साथ घुल-मिल गया।
उन्होने बताया कि उनके घर पर मरम्मत का काम चल रहा था किसी काम करने वाले ने कोई सामान जोर से पटका तभी तोता डरकर कहीं उड़ गया। अब उड़कर कहां गया यह नहीं मालूम। तोते को यह तो नहीं मालूम होगा कि वह किस जाति का है? लेकिन घनश्याम विश्वकर्मा ने जाति व्यवस्था का सम्मान करते हुए विज्ञापन में बकायदा तोते की जाति का उल्लेख भी किया है। पूरी दुनिया में 393 प्रकार के तोते पाए जाते हैं। तोते की एक प्रजाति पहाड़ी भी होती है पहाड़ी तोते की उड़ान नीची और लहरदार होती है। वह मोहब्बत करने और मोहब्बत लुटाने पर यकीन करता है।