Raipur: उपेक्षा का शिकार महाराजबंध तालाब, कागजों में काम पर धरातल पर कुछ नहीं, ग्रीन आर्मी ने लिया ये संकल्प
Green Army chhattisgarh on Maharajbandh pond Raipur: ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ ने रायपुर के ऐतिहासिक महाराजबंध तालाब के सौंदर्यीकरण और उसके संरक्षण और संवर्धन को लेकर संकल्पित है।
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Green Army chhattisgarh on Maharajbandh pond Raipur: ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ ने रायपुर के ऐतिहासिक महाराजबंध तालाब के सौंदर्यीकरण और उसके संरक्षण और संवर्धन को लेकर संकल्पित है। इस क्रम में संगठन ने शनिवार को राज्य सरकार से तालाब के गहरीकरण, सफाई और पुनरुत्थान को लेकर कार्य करने की मांग की है। इस संबंध में संस्था ने महाराजबंध तालाब परिसर मठपारा में पत्रकार वार्ता ली। इस दौरान तालाब परिसर का निरीक्षण किया गया और स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद कर सुझाव लिया गया।
ग्रीन आर्मी ने कहा कि 'स्वच्छ तालाब, स्वस्थ रायपुर' यही हमारा संकल्प है। रायपुर शहर कभी तालाबों और मंदिरों के लिए प्रसिद्ध था। आज वह अपनी पहचान खोने की कगार पर है। शहर के ऐतिहासिक जलाशय जो हमारी संस्कृति, आस्था और पर्यावरणीय धरोहर के प्रतीक हैं। अब लापरवाही और गंदगी के शिकार हो रहे हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण जलाशय महाराजबंध तालाब राजधानी रायपुर के मध्य में स्थित है। वह आज अत्यंत दयनीय स्थिति में है। यह तालाब कलचुरी राजा ब्रह्मदेव के काल में निर्मित हुआ था और धार्मिक रूप से अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम वनवास के दौरान रायपुर प्रवास में दूधाधारी मठ में रुके थे और यह क्षेत्र उनके चरणों से पवित्र हुआ था।
ग्रीन आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष एवं संस्थापक अमिताभ दुबे ने कहा कि यह मठ और तालाब सदियों से स्थान साधु-संतों, साधुओं और श्रद्धालुओं का केंद्र रहा है, लेकिन आज इसकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। तालाब में गंदगी और कचरे का अंबार लगा है। जलकुंभी और खरपतवार ने पूरे क्षेत्र को ढक लिया है और वर्षों से कोई गहरीकरण कार्य नहीं हुआ। घरों और नालियों का गंदा पानी सीधे तालाब में गिर रहा है, जबकि एसटीपी प्लांट निष्क्रिय पड़ा हुआ है। शासन ने तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिये करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए थे लेकिन अधिकांश योजनाएं केवल कागजो तक ही सीमित हैं। सीमांकन न होने से अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है, और विसर्जन कुंड के अभाव में मूर्तियां और झांकियाँ तालाब में ही सड़ रही हैं। परिणामस्वरूप स्थानीय लोग बदबू, मच्छरों और बीमारियों से परेशान हैं और मॉर्निंग वॉक जैसी गतिविधियां न के बराबर है। इतिहास और आस्था का प्रतीक यह धरोहर अब राजनीति और प्रयोगों का विषय बनकर रह गई है।
ग्रीन आर्मी ने की ये मांगें-
- तालाब का तत्काल गहरीकरण, सफाई और पुनर्जीवन कार्य शुरू किया जाए।
- नालियों और घरों का गंदा पानी तालाब में गिरने से रोका जाए।
- एस.टी.पी. प्लांट को पुनः प्रभावी रूप से संचालित किया जाए।
- विसर्जन कुंड का निर्माण अनिवार्य रूप से कराया जाए।
- स्थानीय नागरिकों को जोड़कर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।

लिया ये संकल्प
यदि शासन-प्रशासन एक माह (10 दिसंबर 2025) तक ठोस कार्रवाई नहीं करता है, तो ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ स्थानीय नागरिकों के सहयोग से “महाराजबंध तालाब पुनर्जीवन अभियान” 11 दिसंबर 2025 से प्रारंभ करेगी। ग्रीन आर्मी ने कहा कि महाराजबंध तालाब केवल एक जलाशय नहीं,यह रायपुर की आस्था, इतिहास और अस्तित्व का प्रतीक है। इसे बचाना केवल सरकार की नहीं बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। ग्रीन आर्मी छत्तीसगढ़ यह संकल्प लेती है कि वो इस ऐतिहासिक धरोहर को पुनर्जीवित करेंगे । आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ, सुंदर और जीवंत तालाब सौंपेंगे।
बैठक में ये रहे मौजूद
इस दौरान ग्रीन आर्मी के लगभग 100 सदस्य उपस्थित रहे। इसमें प्रदेश अध्यक्ष एवं संस्थापक अमिताभ दुबे, रायपुर जिला अध्यक्ष गुरदीप टुटेजा, ब्लू विंग अध्यक्ष भारती श्रीवास्तव, प्रदेश मीडिया प्रभारी शशिकांत यदु, ब्राउन विंग अध्यक्ष पंडित विनीत शर्मा और ग्रीन आर्मी के अन्य पदाधिकारी व सदस्यगण मौजूद रहे।