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Raigarh: चार मासूमों को मिली नई जिंदगी, सांप के काटने के बाद डॉक्टरों की निगरानी में चला इलाज

Wed, 18 Jun 2025 07:46 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, रायगढ़ Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 18 Jun 2025 07:46 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला मुख्यालय के स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विशेषज्ञ डाक्टरों की निगरानी में चले गहन इलाज के बाद जहरीले सांप से दंश से जिंदगी और मौत के बीच झुल रहे चार मासूमों को नई जिंदगी मिली है।

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Four innocent children got a new life treatment was done under the supervision of  doctors after snake bite i
चार बच्चियों का सफल इलाज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला मुख्यालय के स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विशेषज्ञ डाक्टरों की निगरानी में चले गहन इलाज के बाद जहरीले सांप से दंश से जिंदगी और मौत के बीच झुल रहे चार मासूमों को नई जिंदगी मिली है। जिससे अब मासूम बच्चों के परिजनों की मुस्कान लौट आई है। मिली जानकारी के मुताबिक जहरीले सांप के डसने से रायगढ़ के मेडिकल कालेज अस्पताल में भर्ती दितवी चैहान उम्र 4 वर्ष, अनन्या यादव उम्र 9 वर्ष ,तारिका सिदार उम्र 1 वर्ष और नित्यांश चैहान उम्र 6 वर्ष को जहरीले सांपों ने काट लिया था और इनकी जान पर बन आई थी। दितवी चैहान, अनन्या यादव ,तारिका सिदार को जहरीले करैत सांप ने डस लिया था। इनमें से नित्यांश चैहान सांप काटने के कारण मरणासन्न हालत में शासकीय मेडिकल कॉलेज रायगढ़ में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। 

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सांप का जहर पूरे शरीर में फैल चुका था और स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी। शरीर में लकवे का असर दिख रहा था और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। इसी दौरान दितवी चैहान और अनन्या यादव भी पूरी तरह से होश में नहीं थी। दितवी चैहान को आठ दिन और अनन्या यादव को दो दिन वेंटीलेटर में रखना पड़ा था। सांप के काटने से बच्चों के शरीर में जहर पूरी तरह से फैल चुका था। सांस लेने में तकलीफ हो रही थी तथा हाथ एवं पैर की नसें कमजोर हो गयी थी। 
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आपातकालीन विभाग में बच्चों को साँस की नली डालकर कृत्रिम ऑक्सीजन की मशीन (वेंटिलेटर) में डाला गया। बच्चों को इलाज के दौरान बहुत सारी जटिलताओं का सामना करना पड़ा जैसे कि आंतरिक रक्तस्त्राव, पेशाब में खून आना इत्यादि । गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ.एल. के. सोनी, विभागाध्यक्ष बाल्य एवं शिशुरोग के नेतृत्व में डॉक्टरों और स्टॉफ नर्सों की टीम के अथक प्रयासों से बच्चो के स्वास्थ्य में सुधार आना शुरू हुआ। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल रायगढ़ के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने 15 दिन तक गहन इलाज कर चारों की जान बचाई और नया जीवनदान दिया। कई दिनों तक चले गहन ईलाज से बच्चों के स्वास्थ्य में पूर्ण सुधार पश्चात चारों को आज अस्पताल से डिस्चार्ज (छुट्टी ) किया गया। अपने बच्चों के साथ अस्पताल से घर लौटते वक्त उनके परिजनों ने कहा कि शासकीय मेडिकल कॉलेज के ईलाज से उनके बच्चों की मुस्कुराहट लौटी है जिसे वो जीवन भर याद रखेंगे। 
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उचित इलाज से बचाई जा सकी जान
करैत भारत में पाए जाने वाले सर्वाधिक जहरीले सांपों में से एक है। इसका जहर न्यूरोटॉक्सिक होता है। जिससे नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है। सही समय पर इलाज न मिले तो जान बचने की गुंजाइश कम होती है। ऐसे में इन बच्चों की रायगढ़ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में मिले उचित इलाज से जान बचाई जा सकी। 


विशेषज्ञ डाक्टरों का प्रयास हुआ सफल
ईलाज के दौरान एंटी स्नैक वेनम, आइनोट्रोप उपयुक्त एंटीबायोटिक एवं वेंटीलेटर के इस्तेमाल से बच्चों की जान बचाई जा सकी। गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ. एल.के सोनी (विभागाध्यक्ष बाल्य एवं शिशुरोग, डॉ. गौरव क्लाडियस (असिस्टेंट प्रोफसर), डॉ. अंशुल विक्रम श्रीवास्तव (असिस्टेंट प्रोफेसर), डा. दुष्यंत कुमार सिदार (जे. आर.), डॉ नीना नीतिका पैकरा (जे. आर.), डॉ. राहुल बी. पालड़िय (जे. आर.) एवं स्टॉफ नर्सों की अथक प्रयासों से बच्चो के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आना शुरु हुआ। कई दिनों तक चले गहन ईलाज से बच्चे के स्वास्थ्य में पूर्ण सुधार पश्चात चारो बच्चो को आज अस्पताल से डिस्चार्ज (छुट्टी )किया गया।

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