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छत्तीसगढ़: गाइडलाइन दरों की बढ़ोतरी पर सियासत गर्म, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सीएम साय को लिखा पत्र

Wed, 03 Dec 2025 02:14 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 03 Dec 2025 02:14 PM IST
सार

रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे जनहित के विपरीत बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री साय को भेजे पत्र में मांग की है कि नई गाइडलाइन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, क्योंकि इससे आम नागरिकों पर आर्थिक भार बढ़ रहा है।

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Politics heats up over hike in guideline rates, Raipur MP Brijmohan Agrawal writes to CM Sai in Chhattisgarh
रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ में जमीन खरीद-बिक्री के गाइडलाइन रेट में की गई भारी बढ़ोतरी ने राजनीतिक माहौल को तपा दिया है। कई जिलों में जहां दरें दोगुनी हुई हैं, वहीं कुछ स्थानों पर यह बढ़ोतरी 700% से 800% तक पहुंच गई है। नए रेट लागू होने के बाद इसका सीधा असर किसानों, मध्यम वर्ग और संपत्ति खरीदने वालों पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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रायपुर लोकसभा सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता बृजमोहन अग्रवाल ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे जनहित के विपरीत बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को भेजे पत्र में मांग की है कि नई गाइडलाइन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, क्योंकि इससे आम नागरिकों पर आर्थिक भार बढ़ रहा है।
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सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा कि गाइडलाइन दरों में अचानक की गई वृद्धि से पहले न तो स्थानीय लोगों से कोई राय ली गई और न ही असली बाजार कीमतों का उचित आकलन किया गया। उन्होंने कहा कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन वर्गों पर पड़ रहा है जो पहले ही आर्थिक दबाव झेल रहे हैं—किसान, छोटे व्यवसायी, कुटीर उद्योग, मध्यवर्गीय परिवार और रियल एस्टेट सेक्टर। उन्होंने कहा कि जिस समय देश में "ईज़ ऑफ लिविंग" और "ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस" को बढ़ावा देने की बात की जा रही है, उसी समय इतनी बड़ी बढ़ोतरी जनता के लिए अतिरिक्त बोझ बन रही है।
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उन्होंने पत्र में उदाहरण देते हुए कहा कि लाभंधी और निमोरा जैसे क्षेत्रों में गाइडलाइन दरें 725% और 888% तक बढ़ा दी गई हैं, जबकि इन इलाकों में पिछले वर्षों में विकास या बाजार मूल्यों में कोई विशेष बढ़ोतरी नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नवा रायपुर के आस-पास के कई ग्रामीण इलाकों को बिना आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए शहरी घोषित कर दिया गया, जिससे वहां के लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ रहा है।

सरकार का तर्क है कि बढ़े हुए गाइडलाइन रेट से भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों को अधिक मुआवजा मिलेगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अग्रवाल ने कहा कि अधिग्रहण का प्रतिशत बेहद कम है, जबकि गाइडलाइन में बढ़ोतरी का बोझ पूरे प्रदेश की जनसंख्या पर पड़ेगा। उन्होंने रजिस्ट्रेशन शुल्क को लेकर भी सवाल उठाए और सुझाव दिया कि इसे 4% से घटाकर 0.8% किया जाए ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।


तीन मुख्य मांगें
सांसद अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में तीन प्रमुख बिंदुओं पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की है कि 20 नवंबर 2025 से लागू नई गाइडलाइन दरों को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। राज्य में पहले से लागू पुरानी गाइडलाइन को पुनः बहाल किया जाए। वास्तविक बाजार मूल्य निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों की समिति का गठन किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने नवा रायपुर में जोड़े गए ग्रामीण इलाकों की स्थिति की समीक्षा कर उन्हें दोबारा ग्रामीण क्षेत्र घोषित करने का सुझाव दिया है।
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