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सुप्रीम कोर्ट से भी डॉ. आशीष सिन्हा को राहत नहीं: मेडिकल छात्रा उत्पीड़न केस में खारिज हुई याचिका
Fri, 22 Aug 2025 04:41 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 22 Aug 2025 04:41 PM IST
सार
मेडिकल छात्रा से यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में फंसे पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर के प्रोफेसर डॉ. आशीष सिन्हा को सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है।
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मेडिकल छात्रा उत्पीड़न केस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी डॉ. आशीष सिन्हा को राहत नहीं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मेडिकल छात्रा से यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में फंसे पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर के प्रोफेसर डॉ. आशीष सिन्हा को सुप्रीम कोर्ट से भी बड़ा झटका लगा है। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र की डबल बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी।
इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉ. सिन्हा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि यह अपराध बेहद गंभीर और संवेदनशील प्रकृति के हैं, जिनमें महिला की गरिमा और कार्यस्थल की सुरक्षा जुड़ी है। अदालत ने माना कि दर्ज एफआईआर में देरी या किसी तरह का दुरुपयोग नज़र नहीं आता।
छात्रा ने लगाए थे गंभीर आरोप
कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एक द्वितीय वर्ष की छात्रा ने डॉ. सिन्हा पर शारीरिक छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। छात्रा का कहना था कि प्रोफेसर बार-बार अपने केबिन में बुलाकर अनुचित स्पर्श करते और विरोध करने पर परीक्षा में फेल करने की धमकी देते थे। इतना ही नहीं, डिजिटल माध्यमों से भी उन्हें आपत्तिजनक संदेश और प्रस्ताव भेजे जाते रहे।
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जनवरी से जारी शिकायतों की अनदेखी
पीड़िता ने जनवरी 2025 में ही डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को पूरी घटना की लिखित जानकारी दी थी। जांच में डॉ. सिन्हा को क्लीन चिट दे दी गई। इसके बाद छात्रा ने कॉलेज की विशाखा कमेटी से भी शिकायत की, जहां आरोपों को गंभीर मानते हुए उन्हें एचओडी पद से हटा दिया गया। इसके बावजूद उत्पीड़न का सिलसिला नहीं थमा, जिसके बाद आखिरकार छात्रा ने मौदहापारा थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
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इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉ. सिन्हा की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि यह अपराध बेहद गंभीर और संवेदनशील प्रकृति के हैं, जिनमें महिला की गरिमा और कार्यस्थल की सुरक्षा जुड़ी है। अदालत ने माना कि दर्ज एफआईआर में देरी या किसी तरह का दुरुपयोग नज़र नहीं आता।
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छात्रा ने लगाए थे गंभीर आरोप
कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एक द्वितीय वर्ष की छात्रा ने डॉ. सिन्हा पर शारीरिक छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। छात्रा का कहना था कि प्रोफेसर बार-बार अपने केबिन में बुलाकर अनुचित स्पर्श करते और विरोध करने पर परीक्षा में फेल करने की धमकी देते थे। इतना ही नहीं, डिजिटल माध्यमों से भी उन्हें आपत्तिजनक संदेश और प्रस्ताव भेजे जाते रहे।
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जनवरी से जारी शिकायतों की अनदेखी
पीड़िता ने जनवरी 2025 में ही डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन को पूरी घटना की लिखित जानकारी दी थी। जांच में डॉ. सिन्हा को क्लीन चिट दे दी गई। इसके बाद छात्रा ने कॉलेज की विशाखा कमेटी से भी शिकायत की, जहां आरोपों को गंभीर मानते हुए उन्हें एचओडी पद से हटा दिया गया। इसके बावजूद उत्पीड़न का सिलसिला नहीं थमा, जिसके बाद आखिरकार छात्रा ने मौदहापारा थाने में एफआईआर दर्ज कराई।