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छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों के लिए नए नियम लागू: बिना मान्यता 9वीं से 12वीं की कक्षाएं चलाना होगा मुश्किल
Tue, 08 Sep 2026 07:24 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 08 Sep 2026 07:24 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने राज्य में निजी स्कूलों की मान्यता और संचालन के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने राज्य में निजी स्कूलों की मान्यता और संचालन के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी। नए नियमों के तहत माध्यमिक शिक्षा मंडल से मान्यता लिए बिना कोई भी निजी स्कूल कक्षा नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित नहीं कर सकेगा। मंडल ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2018 के नियमों के स्थान पर लागू हो रही इस गाइडलाइन में स्कूल संचालकों को प्रक्रियागत राहत दी गई है, जबकि विद्यार्थियों की सुरक्षा और शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़े प्रावधानों को अधिक सख्त बनाया गया है।
प्रक्रिया को सुगम बनाते हुए अब निजी स्कूलों के लिए एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके बजाय स्कूल संचालकों को ऑनलाइन पोर्टल पर स्व-प्रमाणीकरण पत्र देना होगा। इसमें भवन सुरक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल मैदान और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति का ब्योरा देना अनिवार्य होगा। गलत जानकारी देने पर स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है और जुर्माना भी लगेगा। इसके अलावा कॉर्पस फंड की न्यूनतम सीमा भी खत्म कर दी गई है। अब स्कूल प्रबंधन को केवल वेतन भुगतान की पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था की जानकारी देनी होगी। सत्र समाप्ति के तीन महीने के भीतर ऑडिट रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य होगा।
दोहरे माध्यम और भवन के कड़े मानक
हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की मान्यता अब एक साथ नहीं मिलेगी। पहले हाईस्कूल और उसके बाद ही प्लस-टू की मान्यता के लिए आवेदन किया जा सकेगा। यदि कोई स्कूल हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में पढ़ाई कराना चाहता है तो दोनों के लिए अलग जमीन, भवन, प्राचार्य और शिक्षकों की व्यवस्था करनी होगी। एक ही भवन में दो अलग-अलग बोर्ड संचालित नहीं होंगे। स्कूल परिसर की भूमि संचालक के नाम पर होनी चाहिए या न्यूनतम तीन साल का पंजीकृत लीज अनुबंध अनिवार्य होगा। नगर निगम या पंचायत से स्वीकृत नक्शा तथा बहुमंजिला भवनों के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट देना होगा।
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कक्षाओं की क्षमता और छात्र सुरक्षा
मानकों के अनुसार प्रत्येक क्लासरूम का क्षेत्रफल कम से कम 300 वर्गफीट होगा और एक कक्षा में अधिकतम 45 विद्यार्थी ही बैठ सकेंगे। हर छात्र के लिए कम से कम छह वर्गफीट जगह तय की गई है। हाईस्कूल के लिए न्यूनतम सात कमरों की अनिवार्यता रखी गई है। स्कूल परिसर में खेल, प्रार्थना और पार्किंग हेतु पर्याप्त स्थान रखना होगा। मान्यता समाप्त होने पर विद्यार्थियों को पास के सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।
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प्रक्रिया को सुगम बनाते हुए अब निजी स्कूलों के लिए एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके बजाय स्कूल संचालकों को ऑनलाइन पोर्टल पर स्व-प्रमाणीकरण पत्र देना होगा। इसमें भवन सुरक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल मैदान और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति का ब्योरा देना अनिवार्य होगा। गलत जानकारी देने पर स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है और जुर्माना भी लगेगा। इसके अलावा कॉर्पस फंड की न्यूनतम सीमा भी खत्म कर दी गई है। अब स्कूल प्रबंधन को केवल वेतन भुगतान की पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था की जानकारी देनी होगी। सत्र समाप्ति के तीन महीने के भीतर ऑडिट रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य होगा।
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दोहरे माध्यम और भवन के कड़े मानक
हाईस्कूल और हायर सेकंडरी की मान्यता अब एक साथ नहीं मिलेगी। पहले हाईस्कूल और उसके बाद ही प्लस-टू की मान्यता के लिए आवेदन किया जा सकेगा। यदि कोई स्कूल हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में पढ़ाई कराना चाहता है तो दोनों के लिए अलग जमीन, भवन, प्राचार्य और शिक्षकों की व्यवस्था करनी होगी। एक ही भवन में दो अलग-अलग बोर्ड संचालित नहीं होंगे। स्कूल परिसर की भूमि संचालक के नाम पर होनी चाहिए या न्यूनतम तीन साल का पंजीकृत लीज अनुबंध अनिवार्य होगा। नगर निगम या पंचायत से स्वीकृत नक्शा तथा बहुमंजिला भवनों के लिए स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट देना होगा।
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कक्षाओं की क्षमता और छात्र सुरक्षा
मानकों के अनुसार प्रत्येक क्लासरूम का क्षेत्रफल कम से कम 300 वर्गफीट होगा और एक कक्षा में अधिकतम 45 विद्यार्थी ही बैठ सकेंगे। हर छात्र के लिए कम से कम छह वर्गफीट जगह तय की गई है। हाईस्कूल के लिए न्यूनतम सात कमरों की अनिवार्यता रखी गई है। स्कूल परिसर में खेल, प्रार्थना और पार्किंग हेतु पर्याप्त स्थान रखना होगा। मान्यता समाप्त होने पर विद्यार्थियों को पास के सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।