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लापरवाही या अनदेखी : स्कूल की टूटी-फूटी छत के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर मासूम, अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान

Mon, 14 Aug 2023 06:42 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर Published by: श्याम जी. Updated Mon, 14 Aug 2023 06:42 PM IST
सार

बीजापुर में शिक्षा व्यवस्था और स्कूल की इमारतें पूरी तरह बदहाली का शिकार हो चुकी हैं। भैरमगढ़ ब्लॉक का मिरतुर मिडिल स्कूल की छत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। उसके ऊपर प्लास्टिक की झिल्ली डालकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। छत कब गिर जाए कुछ पता नहीं है।

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Mirtur Middle School completely dilapidated and authorities are not paying attention in Bijapur
मिरतुर मिडिल स्कूल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तमाम सरकारी दावों के बावजूद शिक्षा व्यवस्था बदहाली की मार से गर्त में जाती नजर आ रही है। भैरमगढ़ ब्लॉक का मिरतुर मिडिल स्कूल शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। इस स्कूल में बच्चों को बारिश से बचाने के लिए प्लास्टिक की झिल्ली का सहारा लिया गया है। जर्जर और बदहाल व्यवस्था के बीच जिले की शैक्षणिक व्यवस्था कैसी होगी। इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। जबकि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता स्कूल जतन को लेकर प्रमुखता से रही है।

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स्कूल की छत पर पड़ी है प्लास्टिक की झिल्ली
बीजापुर जिला मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर भैरमगढ़ ब्लॉक में संचालित मिडिल स्कूल मिरतुर अपनी बदहाली की दास्तान खुद कह रहा है। तीन कमरों वाला मिडिल स्कूल, जहां 30 बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं। इस स्कूल की हालत दुर्घटना के खतरों को आमंत्रित कर रही है। छत इतनी जर्जर है कि यहां के शिक्षकों को बारिश से बच्चों को बचाने के लिए प्लास्टिक की झिल्ली का सहारा लेना पड़ रहा है। 
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हेड मास्टर और शिक्षकों ने कई बार लगाई गुहार
यहां के भवन की मरम्मत के लिए बीते तीन साल में हेड मास्टर और शिक्षकों ने कई बार गुहार लगाई, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। इस बार मुख्यमंत्री शाला जतन योजना से उम्मीद बंधी थी कि भवन का कायाकल्प होगा, लेकिन ये आस भी बारिश के शुरू होते ही टूट गई। आखिरकार शिक्षकों को स्कूल चलाने के लिए प्लास्टिक की झिल्ली का सहारा लेकर स्कूल का संचालन करना पड़ा। 
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मजबूरन खुले में नित्य क्रिया करने जाते हैं बच्चे
अब हालात ये है कि कमजोर छतों के खतरे के बीच नौनिहालों का भविष्य मजबूत कैसे होगा। जबकि शिक्षा विभाग की नजरों में ये समस्या इतनी महत्वपूर्ण नहीं दिख रही है। जिसे प्राथमिकता से दुरुस्त किया जाए। भवन की छत, दीवार फर्श जर्जर होकर बदहाली की कहानी खुद कह रहे हैं। शौचालय की स्थिति काफी खराब है, जिससे स्वच्छता के दावे मुंह चिढ़ा रहे हैं। शिक्षकों और बच्चों को मजबूरन खुले में नित्य क्रिया करने जाना पड़ता है। इन हालातों में शिक्षा व्यवस्था किस बदहाल स्थिति में है ये आसानी से समझा जा सकता है। 

शिक्षा विभाग में जिला से लेकर संकुल स्तर तक निरीक्षण के कई अधिकारी मौजूद हैं।बावजूद व्यवस्था को दुरुस्त करने में इनकी कोई भूमिका नजर नही आती है। पानी ज्यादा तेज बरसने पर मजबूरन शिक्षकों को स्कूल में छुट्टी देनी पड़ती है और बच्चों की पढ़ाई लिखाई ठप्प हो जाती है। इन हालातों के लिए जिम्मेदार शासन प्रशासन की मुकदर्शिता शिक्षा को लेकर प्राथमिकता को स्पष्ट कर रहा है। 

स्कूल जतन योजन हुई फेल
राज्य के मुख्यमंत्री ने इस साल बदहाल स्कूलों को संवारने 2500 करोड़ का पैकेज दिया, ताकि स्कूलों की दुर्दशा को ठीक कर नया कलेवर दिया जा सके। लेकिन बीजापुर जिला मुखमंत्री की मंशा को साकार करने में सफल नहीं हो पाया। जिले में प्राइमरी और मिडिल स्कूलों की जो हालत है, वो गंभीर दुर्घटनाओं को आमंत्रित करते दिख रही है। बताया जा रहा है कि स्कूल जतन योजना में 137 स्कूलों के जीर्णोद्धार का काम होना था, लेकिन यह महत्वपूर्ण योजना विभाग की उदासीनता की भेंट चढ़ गई।

अब तक नहीं पहुंचे अफसर
मिडिल स्कूल मिरतुर के एचएम रामलाल मरकाम ने बताया कि वे यहां 2022 में आये हैं। उन्होंने बताया कि भवन जर्जर हालात में है। भवन की छत पर झिल्ली लगाकर काम चलाया जा रहा है। हेड मास्टर मरकाम ने बताया कि सत्र में अब तक न जिला शिक्षा अधिकारी और न ही खंड शिक्षा अधिकारी यहां निरीक्षण के लिए आये हैं। गांव के लोग व मिडिल स्कूल की तरफ से एमएलए को नये स्कूल भवन निर्माण के लिए मांग पत्र दिया गया है। 


डिस्मेंटल योग्य है भवन
भैरमगढ़ ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी आरएस नेताम ने बताया कि पिछले सत्र में मिडिल स्कूल भवन मरम्मत के लिए मांग की गई थी। बजट सेंसन नहीं होने से मरम्मत का काम नहीं हो पाया। उन्होंने बताया कि स्कूल जतन योजना के तहत आये स्कूलों की लिस्ट में इस स्कूल का नाम शामिल नहीं था। बीईओ नेताम ने स्वीकार किया है कि ब्लॉक के 13 स्कूल भवन डिस्मेंटल योग्य हैं। इनमें से एक मिरतुर मिडिल स्कूल भी शामिल है।

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