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सीजी: गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना भी वैवाहिक क्रूरता, हाईकोर्ट ने विवाह खत्म कर पत्नी को दी तलाक की मंजूरी

Thu, 24 Sep 2026 01:52 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 24 Sep 2026 01:52 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बिलासपुर पीठ ने वैवाहिक विवाद के एक मामले में कहा कि लगातार गाली-गलौज, अपमान और मानसिक प्रताड़ना भी वैवाहिक क्रूरता के दायरे में आ सकती है। अदालत ने परिवार न्यायालय का आदेश निरस्त करते हुए महिला को तलाक की मंजूरी दे दी।

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Mental torture is also marital cruelty…Chhattisgarh High Court approves divorce
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की बिलासपुर पीठ ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए तीन वर्ष पुराने विवाह को समाप्त कर दिया है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वैवाहिक जीवन में केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि लगातार गाली-गलौज, अपमान और मानसिक प्रताड़ना भी गंभीर क्रूरता की श्रेणी में आते हैं। न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू और न्यायमूर्ति सुषमा सावंत की खंडपीठ ने अंबिकापुर स्थित परिवार न्यायालय के पूर्व आदेश को पलटते हुए पीड़ित पत्नी को तलाक की मंजूरी दे दी।
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मानसिक उत्पीड़न भी क्रूरता
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पति के आचरण को अत्यंत गंभीर माना। अदालत ने कहा कि कोई भी महिला इस प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना सहने के लिए मजबूर नहीं है। उच्च न्यायालय के अनुसार, पत्नी तथा उसकी बहनों को फोन पर अभद्र भाषा में गालियां देना और निरंतर मानसिक रूप से परेशान करना वैवाहिक क्रूरता माना जाएगा। पीठ ने माना कि ऐसा व्यवहार वैवाहिक जीवन को सामान्य रूप से चलाने की संभावनाओं को समाप्त कर देता है, इसलिए पीड़िता को कानूनी राहत मिलना आवश्यक है।
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दहेज मांग और मारपीट के आरोप
यह मामला उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की निवासी महिला और बिहार के भोजपुर निवासी आनंद कुमार गुप्ता से जुड़ा है। दोनों की शादी 5 दिसंबर 2021 को हुई थी। पीड़ित महिला का आरोप था कि शादी के कुछ समय बाद ही पति उसके साथ मारपीट करने लगा और अभद्र व्यवहार पर उतर आया। इसके अलावा पति दहेज में एयर-कंडीशनर की मांग कर रहा था। पति के लगातार विवाद, मारपीट और उत्पीड़न से तंग आकर महिला अंबिकापुर स्थित अपने मायके लौट आई।
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परिवार न्यायालय के आदेश में बदलाव
मायके लौटने के बाद महिला ने अंबिकापुर के परिवार न्यायालय में क्रूरता के आधार पर पति के खिलाफ सिविल याचिका दायर की। महिला ने याचिका में बताया कि पति न केवल उसे प्रताड़ित करता था, बल्कि उसकी बहनों को भी फोन कर अभद्र भाषा में गालियां देता था। परिवार न्यायालय से राहत न मिलने पर महिला ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। खंडपीठ ने सभी तथ्यों का अध्ययन करने के बाद परिवार न्यायालय के आदेश को निरस्त कर दिया और दोनों के बीच दिसंबर 2021 में हुए विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया।
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