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सर्प दंश के मरीजों को मिला जीवनदान : डॉक्टरों की निगरानी में 10 परिवारों में छाई खुशी, जानिए लक्षण व उपचार

Wed, 02 Aug 2023 05:58 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: श्याम जी. Updated Wed, 02 Aug 2023 05:58 PM IST
सार

डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में इस महीने चिकित्सकों के साथ ही जेआर, स्टाफ नर्स, ईटर्न आदि के द्वारा किए गए उपचार के चलते 10 सांप काटने के मरीजों को नया जीवनदान मिला। 

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Mekaj Hospital doctors cured ten patients of snake bite in Jagdalpur
डिमरापाल मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में इस महीने चिकित्सकों के साथ ही जेआर, स्टाफ नर्स, ईटर्न आदि के द्वारा किए गए उपचार के चलते 10 सांप काटने के मरीजों को नया जीवनदान मिला। इसके बाद इन परिवार के लोगों ने चिकित्सकों से लेकर स्टाफ नर्स आदि को धन्यवाद दिया।

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एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जॉन मसीह ने बताया कि बारिश के दिनों में सांप काटने के काफी मामले देखने को मिलते हैं। ज्यादातर देखा जाता है कि मजदूर किसान अपने खेतों में काम करने के दौरान, सोने के समय, रात को काम के दौरान व कई ऐसे मामले सामने आते है, जहां किसानों को या मजदूरों को सांप के द्वारा डस लिया जाता है। इसके बाद मरीजों को इलाज के लिए मेकाज लाया जाता है। मेकाज में उपलब्ध एंटी स्नैक वैनम की दवा देने के साथ ही उन्हें 24 घंटे निगरानी में रखने रखा जाता है। उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष में बेहतर देखभाल के लिए रखा जाता है, जिसका परिसाद यह निकला है कि 10 मरीजों को नया जीवनदान मिला है।
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सांप काटने पर क्या करें?
चिकित्सकों ने बताया कि मेकाज में कई ऐसे मामले देखने को मिला है, जिसमें सांप काटने के बाद मरीजों को इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र न लाकर घर में ही जड़ी-बूटी के अलावा बैगा-गुनिया के चक्कर में फंसकर इलाज किया जाता है।  ऐसे में सांप का जहर तेजी से फैलने के चलते मरीजों की मौत हो जाती है। ग्रामीणों में इस बात को देखना चाहिए कि जैसे ही मरीज को सांप के काटे, उसे तुरंत अस्पताल लाना चाहिए। मरीज को सांप के डसते ही तुरंत हॉस्पिटल लाकर उन्हें एंटी स्नैक वैनम की दवा देनी चाहिए, जिससे मरीज की जान आसानी से बचायी जा सके।
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चिकित्सको ने इन्हें दिया नया जीवनदान
चिकित्सकों ने बताया कि मरीजों में रामधर (40) निवासी तोंगपाल, अर्जुन (23) कोलावंड, तुलेश कुमार (25) कोड़ेनार, जीतू (13) बीजापुर, पिंकी (25) बीजापुर, बालमति (28) परपा, मेहतर (69) पलवा परपा, जगबंधु (50) ईराकोट परपा, वीरू (22) बस्तर, चंद्रिका (24) कोंडागांव के अलावा राजेश (18) कटेकल्याण शामिल हैं।

मरीजों को घंटो निगरानी में रखा जाता है 
मेकाज में जुलाई महीने में कई ऐसे मरीज आए, जिन्हें भर्ती करने के बाद 24 घंटे से लेकर 36 घंटे तक निगरानी में रखा गया। इसमें कई मरीज ठीक होने के बाद चिकित्सकों के द्वारा बताए गए सुझाव को उन्हीं के अनुसार करने की बात कहते हुए अपने घर चले गए। वहीं, मरीज पूरी तरह ठीक होने के बाद उपलब्ध दवा को लेने के बाद ही घर जाते हैं।


दिखते हैं ये लक्षण
सांप के डसने के बाद मरीज बेहोश हो जाता है और उसके मुंह से झाग आना शुरू हो जाता है। या कई बार मरीज के डसे हुए हिस्से में सूजन आना शुरू हो जाती है। इन सबके अलावा कई बार मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होती है। मेकाज में मिलने वाले एंटी स्कैन वेनम की उपलब्धता के चलते मरीजों की जान बच सकी है। इन मरीजों की जान बचाने के लिए अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू ने डॉक्टरों, स्टाफ नर्स , ईटर्न की पूरी को बधाई दी है।

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