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Korba: चैतुरगढ़ के जंगल में शेर की दस्तक, दो भैसों को बनाया शिकार, ग्रमीणो में दहशत का माहौल
Mon, 19 May 2025 07:54 PM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: Digvijay Singh
Updated Mon, 19 May 2025 07:54 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में कटघोरा वन मंडल के पाली वन परिक्षेत्र के चैतुरगढ़ पहाड़ पर एक शेर के हमले से हड़कंप मच गया। जंगल में चर रही दो भैंसों को बड़े शिकार की तरह मार गिराने की घटना से आसपास के गांवों में दहशत फैल गई।
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चैतुरगढ़ के जंगल में शेर की दस्तक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में कटघोरा वन मंडल के पाली वन परिक्षेत्र के चैतुरगढ़ पहाड़ पर एक शेर के हमले से हड़कंप मच गया। जंगल में चर रही दो भैंसों को बड़े शिकार की तरह मार गिराने की घटना से आसपास के गांवों में दहशत फैल गई।
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जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची। विशेषज्ञों ने मौके पर मिले पंजों के गहरे निशान और घसीटे गए शिकार के चिह्नों की जाँच कर यह पुष्टि कर दी कि हमला शेर का ही था। फौरन ही आसपास के गांवों में मुनादी कराई गई और ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने की सख़्त हिदायत दी गई।
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सुरक्षा के लिहाज़ से पाली रेंज के रेंजर संजय लकड़ा के नेतृत्व में वनकर्मियों को क्षेत्र में तैनात किया गया है। वन विभाग ने शेर की गतिविधियाँ पकड़ने के लिए जंगल में 19 ट्रैप कैमरें लगा दिए हैं, ताकि उसकी सटीक लोकेशन और आवा-जाही का पता चलता रहे। शेर की आहट की खबर पाते ही तेंदू पत्ता संग्रहण का काम फिलहाल रोक दिया गया है। ज़िला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने लाफा के सुशासन तिहार शिविर में ग्रामीणों को सतर्क रहते हुए सुरक्षित क्षेत्रों में रहने की सलाह दी है।
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ग्रामीणों ने बताया कि एक किसान की दो भैंस गांव से लेकर जंगल में चरने के लिए गया हुआ था जहां काफी समय बीत जाने के बाद भी जब वापस नहीं लौटा तो उसे देखने गया शेर का शिकार हो चुका था जहां उसके पंजे के निशान पाए गए हैं इसकी सूचना वन विभाग को दी गई।
ग्रामीणों की माने तो इससे पहले शेर को इसी इलाके में विचरण करते देखा जा चुका है और इस बार फिर से देखे जाने से ग्रामीणों में दशक का माहौल है वह लोग जंगल जाने से डर रहे हैं। इस घटना के बाद वन विभाग की टीम जंगल से लेकर आसपास गांव में मुनादी कर रही है और उन्हें जंगल जाने से रोका जा रहा है।
फिलहाल वनकर्मियों की चौकसी बढ़ा दी गई है और गांववालों से अपील की गई है कि वे समूह में ही खेतों में जाएं, रात में जंगल के पास न रुकें और किसी भी आवाज़ या आहट की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें, ताकि शेर को जल्द से जल्द सुरक्षित ढंग से जंगल के भीतर ही सीमित रखा जा सके।