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जंगल की 'कमली' बनी समाज की 'गीता': कोंडागांव में पांच लाख की ईनामी महिला नक्सली ने किया आत्मसमर्पण
Wed, 15 Oct 2025 03:51 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव
अमर उजाला नेटवर्क, कोंडागांव
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Wed, 15 Oct 2025 03:51 PM IST
सार
पूर्वी बस्तर डिवीजन अंतर्गत टेलर टीम कमांडर (ACM) पद पर सक्रिय 5 लाख रुपये की ईनामी महिला नक्सली गीता उर्फ कमली सलाम ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक वॉय अक्षय कुमार के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
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कोंडागांव में पांच लाख की ईनामी महिला नक्सली ने किया आत्मसमर्पण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोंडागांव जिले में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। पूर्वी बस्तर डिवीजन अंतर्गत टेलर टीम कमांडर (ACM) पद पर सक्रिय 5 लाख रुपये की ईनामी महिला नक्सली गीता उर्फ कमली सलाम ने बुधवार को पुलिस अधीक्षक वॉय अक्षय कुमार के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
40 वर्षीय गीता उर्फ कमली सलाम, पिता गडरू, निवासी मड़ानार थाना बयानार, लंबे समय से नक्सली संगठन में सक्रिय थी। उस पर हत्या, हमला, धमकी और बेदखली जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं। बयानार थाने में उसके विरुद्ध अपराध क्रमांक 09/14, 10/14 और 11/14 पंजीबद्ध हैं, जिनमें भा.दं.सं., एससी-एसटी एक्ट, आर्म्स एक्ट और यूएपीए की धाराएं शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान, सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई, संगठन के भीतर मतभेद और कई शीर्ष नक्सली नेताओं के आत्मसमर्पण से गीता प्रभावित हुई। वहीं गांव-गांव तक पहुंच रहे विकास कार्य, सड़क, बिजली, पानी और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं और सामुदायिक पुलिसिंग ने भी उसे मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
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आत्मसमर्पण कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक के साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) रूपेश कुमार डाण्डे और उप पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) सतीश भार्गव मौजूद थे। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत गीता को तत्काल 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण नीति के तहत गीता को अन्य सुविधाएं और लाभ उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव वरिष्ठ कार्यालय को भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि विकास और पुनर्वास योजनाओं के व्यापक प्रचार से और भी नक्सली मुख्यधारा में लौट सकते हैं।
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40 वर्षीय गीता उर्फ कमली सलाम, पिता गडरू, निवासी मड़ानार थाना बयानार, लंबे समय से नक्सली संगठन में सक्रिय थी। उस पर हत्या, हमला, धमकी और बेदखली जैसे गंभीर अपराध दर्ज हैं। बयानार थाने में उसके विरुद्ध अपराध क्रमांक 09/14, 10/14 और 11/14 पंजीबद्ध हैं, जिनमें भा.दं.सं., एससी-एसटी एक्ट, आर्म्स एक्ट और यूएपीए की धाराएं शामिल हैं।
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पुलिस के अनुसार, लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान, सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई, संगठन के भीतर मतभेद और कई शीर्ष नक्सली नेताओं के आत्मसमर्पण से गीता प्रभावित हुई। वहीं गांव-गांव तक पहुंच रहे विकास कार्य, सड़क, बिजली, पानी और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं और सामुदायिक पुलिसिंग ने भी उसे मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
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आत्मसमर्पण कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक के साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) रूपेश कुमार डाण्डे और उप पुलिस अधीक्षक (ऑप्स) सतीश भार्गव मौजूद थे। शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत गीता को तत्काल 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण नीति के तहत गीता को अन्य सुविधाएं और लाभ उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव वरिष्ठ कार्यालय को भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि विकास और पुनर्वास योजनाओं के व्यापक प्रचार से और भी नक्सली मुख्यधारा में लौट सकते हैं।