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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Jawan Sater Singh who was sacrificed in Naxalite encounter was brought up by his uncle

CG: मां-पिता के निधन के बाद चाचा ने सतेर सिंह का किया लालन-पालन, बलिदान की खबर सुनते ही टूट गया परिवार

Thu, 18 Jul 2024 02:24 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: श्याम जी. Updated Thu, 18 Jul 2024 02:24 PM IST
सार

नक्सली हमले में जवान सतेर सिंह बलिदान हो गए। उनके परिजन सूचना के बाद पार्थिव शरीर लेने जगदलपुर पहुंचे। बताया जा रहा है कि मां-पिता की मौत के बाद चाचा ने सतेर सिंह का लालन-पालन किया था। 
 

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Jawan Sater Singh who was sacrificed in Naxalite encounter was brought up by his uncle
जवान सतेर सिंह और परिजनों का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नारायणपुर जिले के ग्राम बहमनी में रहने वाले रामसाय ने कभी नहीं सोचा था कि जिस बच्चे को इतने जतन से पाल रहे हैं, उसी बच्चे के पार्थिव शरीर को एक दिन उन्हें कंधा देना पड़ेगा। बड़े भाई और भाभी के मौत के बाद सतेर सिंह को बचपन से चाचा ने ही पाला और खेती-किसानी करते हुए अपने बच्चे के साथ ही बड़े भाई के बच्चे को पाल पोसकर पढ़ाया लिखाया और पुलिस विभाग में नौकरी भी करने दी। लेकिन अचानक से सतेर के निधन से पूरा परिवार टूट के बिखर गया। घटना के बाद परिवार के लोग जगदलपुर पहुंचे। परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

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बलिदान सतेर सिंह के बड़े भाई ने बताया कि दो भाइयों में सतेर छोटा था। मां-पिता के निधन के बाद दोनों छोटे चाचाओं ने अलग-अलग हमें पाला। छोटे चाचा रामसाय सतेर सिंह को अपने साथ ले गए, जहां बचपन से उसे पढ़ाने-लिखाने के साथ ही उसकी हर ख्वाहिश को पूरी की। सतेर ने पुलिस में जाने की बात भी कही, जिस पर चाचा ने जाने से मना भी नहीं किया।
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नतीजा 2017 में सतेर सिंह की सीएएफ में नौकरी लगी, उसके कुछ वर्ष के बाद एसटीएफ ज्वाइन की। अभी इस ऑपरेशन में जाने से दो दिन पहले अपने भाभी रमुला को फोन करके इस बात की जानकारी दी कि वे एक ऑपरेशन में जा रहे हैं, जहां से आने के बाद घर आने का प्लान करने की भी बात कही जा रही थी। भाभी से बात करने के बाद रात करीब दो बजे सतेर के ही मित्र मुन्ना ने फोन पर जानकारी दी, जिसके बाद पूरा परिवार तत्काल जगदलपुर पहुंचा, जहां पोस्टमार्टम के बाद शव नारायणपुर ले जाने की बात कही गई।
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परिजनों ने यह भी बताया कि दो माह पहले ही 14 मई को सतेर का जन्मदिन था। साथ ही 2 से 3 माह पहले ही घर आया था, जिसके बाद परिवार के साथ कुछ समय बिताने के बाद वापस ड्यूटी चले गए, लेकिन परिवार ने कभी नही सोचा कि सतेर को आखरी बार देख रहे हैं। इस घटना से घर परिवार से लेकर गांव में भी मातम छा गया है।

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