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जशपुर: सरकारी स्कूलों में एआई, कोडिंग और रोबोटिक्स की पढ़ाई, तीन स्कूलों के छात्रों को मिलेगा प्रशिक्षण
Thu, 29 Oct 2026 05:27 PM IST
अमन कोशले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जशपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जशपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 29 Oct 2026 05:27 PM IST
सार
तीन सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को एक साल तक एआई, कोडिंग, रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला प्रशासन और एडु रोबोवर्स के सहयोग से छात्र आधुनिक तकनीक सीखकर स्थानीय समस्याओं पर आधारित प्रोजेक्ट तैयार करेंगे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
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छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। कलेक्टर रोहित व्यास के प्रयासों से जिला प्रशासन और एडु रोबोवर्स के बीच गैर-वित्तीय सहयोग के आधार पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत जिले के तीन सरकारी स्कूलों में कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को एक वर्ष तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग, रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आधुनिक तकनीक से जुड़ेंगे विद्यार्थी
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि तकनीक का व्यावहारिक उपयोग करना भी सीखेंगे। प्रशिक्षण के दौरान वे इंटरनेट ऑफ थिंग्स की मदद से सेंसर, मोटर और विभिन्न उपकरणों को आपस में जोड़कर स्मार्ट सिस्टम तैयार करना सीखेंगे। इसके साथ ही विद्यार्थी कृषि, जल संरक्षण, वन, पर्यावरण और ऊर्जा जैसे स्थानीय विषयों पर आधारित वास्तविक प्रोजेक्ट भी तैयार करेंगे। इससे जिले के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।
स्कूलों में नियुक्त होंगे विशेष ट्रेनर
कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए एडु रोबोवर्स की ओर से प्रत्येक स्कूल में एक विशेष ट्रेनर नियुक्त किया जाएगा। ट्रेनर सप्ताह में दो दिन विद्यार्थियों की कक्षाएं लेंगे और विद्यालय के शिक्षकों को भी आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इससे स्कूलों में आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा और शिक्षक भी नई तकनीकों से परिचित हो सकेंगे। यह व्यवस्था विद्यालयों में दीर्घकालिक शिक्षण क्षमता को मजबूत बनाएगी।
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स्टूडेंट टेक्नोलॉजी पासपोर्ट से मूल्यांकन
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक विद्यार्थी का 'स्टूडेंट टेक्नोलॉजी पासपोर्ट' तैयार किया जाएगा। इसमें विद्यार्थी के कौशल, मूल्यांकन और तैयार किए गए प्रोजेक्ट्स का रिकॉर्ड रखा जाएगा। संस्था द्वारा कार्यक्रम की प्रगति की मासिक रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। प्रशिक्षण के अंत में विद्यार्थी अपने द्वारा तैयार किए गए प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन भी करेंगे।
स्थानीय समस्याओं के समाधान की प्रेरणा
कलेक्टर रोहित व्यास ने कहा कि आज का दौर तकनीक का है और आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा रोबोटिक्स जैसे कौशल हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें स्वयं करके सीखने और आसपास की समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना है।
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आधुनिक तकनीक से जुड़ेंगे विद्यार्थी
इस पहल के माध्यम से विद्यार्थी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि तकनीक का व्यावहारिक उपयोग करना भी सीखेंगे। प्रशिक्षण के दौरान वे इंटरनेट ऑफ थिंग्स की मदद से सेंसर, मोटर और विभिन्न उपकरणों को आपस में जोड़कर स्मार्ट सिस्टम तैयार करना सीखेंगे। इसके साथ ही विद्यार्थी कृषि, जल संरक्षण, वन, पर्यावरण और ऊर्जा जैसे स्थानीय विषयों पर आधारित वास्तविक प्रोजेक्ट भी तैयार करेंगे। इससे जिले के ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।
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स्कूलों में नियुक्त होंगे विशेष ट्रेनर
कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए एडु रोबोवर्स की ओर से प्रत्येक स्कूल में एक विशेष ट्रेनर नियुक्त किया जाएगा। ट्रेनर सप्ताह में दो दिन विद्यार्थियों की कक्षाएं लेंगे और विद्यालय के शिक्षकों को भी आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान करेंगे। इससे स्कूलों में आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा और शिक्षक भी नई तकनीकों से परिचित हो सकेंगे। यह व्यवस्था विद्यालयों में दीर्घकालिक शिक्षण क्षमता को मजबूत बनाएगी।
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स्टूडेंट टेक्नोलॉजी पासपोर्ट से मूल्यांकन
कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक विद्यार्थी का 'स्टूडेंट टेक्नोलॉजी पासपोर्ट' तैयार किया जाएगा। इसमें विद्यार्थी के कौशल, मूल्यांकन और तैयार किए गए प्रोजेक्ट्स का रिकॉर्ड रखा जाएगा। संस्था द्वारा कार्यक्रम की प्रगति की मासिक रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। प्रशिक्षण के अंत में विद्यार्थी अपने द्वारा तैयार किए गए प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन भी करेंगे।
स्थानीय समस्याओं के समाधान की प्रेरणा
कलेक्टर रोहित व्यास ने कहा कि आज का दौर तकनीक का है और आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा रोबोटिक्स जैसे कौशल हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर, उन्हें स्वयं करके सीखने और आसपास की समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना है।